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सरकार है तो जंगल में मंगल

सरकार है तो जंगल में मंगल

पटना। कानून सभी के लिए एक समान है, यह सिर्फ कहने की बात है। ठीक उसी तरह से जैसे मुंबइया फिल्मों में बारिश अच्छी लगती है। नायक-नायिका भीगते हुए गाना गाते हैं- आज फिसल जाएं तो हमें न उठइयो। यही बारिश कुछ लोगों के घर में चूल्हा नहीं जलने देती और बच्चों को भी खाली पेट सोना पडता है। इसी तरह किसी को जब अदालत से सजा सुनाई जाती है और ऊंची अदालत तक मुकदमा लडने का उसके पास पैसा नहीं होता, तब भी उसके परिवार में किसी के गले से निवाला नीचे नहीं उतरता है। जेल में उसकी रात कैसे गुजरी, इस दुख को सिर्फ वही समझ सकता है। उसकी जगह कोई सेलिब्रिटी होता तो शायद दूसरे दिन अखबारों में यह खबर छपती कि फलां की रात जागते-जागते बीती, सारी रात मच्छरों के कारण सो नहीं सके। आम लोगों और खास लोगों के बीच इतना अंतर तो होता ही है।

झारखंड उच्च न्यायालय ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को रिम्स अस्पताल से वापस बिरसा मुंडा जेल भेजने की मांग और उनके द्वारा जेल मैनुअल के उल्लंघन के मामलों में दाखिल तीन जनहित याचिकाओं पर गत 4 दिसम्बर को एक साथ सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को आठ जनवरी तक अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रविरंजन की अध्यक्षता वाली खंड पीठ ने इस मामले में दाखिल तीन विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब मांगा। पीठ ने सरकार को याचिकाकर्ताओं के आरोपों का जवाब आठ जनवरी तक देने का निर्देश दिया है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि लालू बिहार विधानसभा चुनाव के समय जेल से ही सक्रिय रहे। उन्होंने बिहार में नवगठित सरकार को गिराने का प्रयास भी किया। इस कारण उन्हें तत्काल बिरसा मुंडा कारागार शिफ्ट कर देना चाहिए। यह भी आरोप लगाया गया है कि रिम्स में भर्ती रहने के दौरान लालू यादव को सेवादार सहित अन्य सुविधाएं मिली हैं, जो राज्य सरकार और जेल अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। रिम्स के पेइंग वार्ड में भी हर कोई उनसे मुलाकात कर लेता है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि बिहार चुनाव के दौरान जेल मैनुअल का उल्लंघन कर लोगों ने लालू से मुलाकात की। बंगले के अंदर की उनके साथ कार्यकर्ताओं ने फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की हैं। बिहार विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव से पहले एक आडियो समाचार चैनलों पर लगभग पूरे दिन दिखाया गया था। इस आडियो में सुनाई पड रहा था कि कथित रूप से लालूप्रसाद यादव भाजपा के एक विधायक से फोन पर बात करते हुए स्पीकर चुनाव में नीतीश कुमार की सरकार का साथ न देने के लिए कह रहे हैं। इतना ही नहीं लालू प्रसाद यादव उस विधायक को मंत्री बनाने का लालच भी देते हुए सुनाई पड़ते हैं। इस मामले में राजद की तरफ से कहा गया था कि आडियो नकली है और लालू प्रसाद की आवाज किसी और की है।

इस मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंड पीठ ने सरकार को इस मामले में आठ जनवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता रत्नेश कुशवाहा को अदालत ने अपना पूरा ब्योरा देने को कहा। उसने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और पटना उच्च न्यायालय का वकील बताया है। वहीं, इससे पहले झारखंड उच्च न्यायालय ने भी 4 दिसम्बर को राज्य सरकार से पूछा कि आखिर किसके आदेश पर चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव को राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के निदेशक के, 'केली' बंगले में स्थानांतरित किया गया था और पुनः उन्हें हाल में बंगले से पेइंग वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया?

झारखण्ड में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा की सरकार है। हेमंत सोरेन की इस सरकार में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी शामिल है। इस तरह कहा जा सकता है कि लालू यादव जहां जेल में बंद हैं, वहां उनकी सरकार है। इसीलिए लालूप्रसाद यादव को रिम्स में इलाज के लिए मिली सुविधाओं के कथित दुरुपयोग से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राज्य सरकार से यह सवाल किए। उच्च न्यायालय ने यह भी जानना चाहा कि आखिर अस्पताल में लालू के सेवादार की नियुक्ति किस आधार पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है तथा अस्पताल में किसे सेवादार बनाया जा सकता है? इससे पहले न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ में लालू से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने राज्य सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि न्यायिक हिरासत में इलाज कराने वाले कैदियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई गई है। उसी के तहत उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि किसी भी कैदी से अनावश्यक लोग मिलते हैं तो इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार होगा? उच्च न्यायालय के सवालों पर अपर महाधिवक्ता ने एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर के लिए निर्धारित की। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने उच्च न्यायालय को बताया कि जेल नियमावली का उल्लंघन करने को लेकर लालू प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि वह एक अलग मामला है।

सीबीआई ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पिछले तीन माह में लालू से मिलने वाले लोगों की सूची भी राज्य प्रशासन से मांगी थी। इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि यह सूची उन्हें मिल गई है। उल्लेखनीय है कि 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से संबंधित चार विभिन्न मामलों में 14 वर्ष तक कैद की सजा पाने के बाद न्यायिक हिरासत में रिम्स में इलाजरत लालू यादव की जमानत याचिका पर उच्च न्यायालय में बहस के दौरान 27 नवंबर को सीबीआई ने यह मामला उठाया था और अदालत को बताया था कि लालू रिम्स में मिली इलाज की सुविधा का दुरुपयोग कर रहे हैं। तब अदालत ने सीबीआई की यह बात सुनने के बाद निर्देश दिया था कि इस मामले में वह चार दिसंबर को सुनवाई करेगी।

उच्च न्यायालय ने लालू की जमानत पर सुनवाई के दौरान अक्तूबर में जेल प्रशासन से पूछा था कि जेल में रहने के दौरान लालू प्रसाद से कितने लोग मिले हैं, इसकी पूरी रिपोर्ट उच्च न्यायालय में दाखिल की जाए. इसी आदेश के आलोक में उच्च न्यायालय में इसकी रिपोर्ट दाखिल की गई थी। इसके अलावा, नौ अक्तूबर को सुनवाई के दौरान लालू के लंबे समय से रिम्स में इलाज के लिए भर्ती होने के मामले का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने रिम्स प्रशासन को लालू यादव के स्वास्थ्य की विस्तृत रिपोर्ट उच्च न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिये थे। इसी के बाद आनन-फानन में वापस रिम्स के वार्ड में भेज दिया गया था।

उच्च न्यायालय में इन दोनों मामलों में सुनवाई का महत्व लालू यादव द्वारा भाजपा विधायक ललन पासवान को कथित रूप से अस्पताल से फोन कर बिहार सरकार को गिराने में मांगी गयी मदद की पृष्ठभूमि में और बढ़ गया था। इसी फोनकांड के चलते लालू यादव को 26 नवंबर को रिम्स निदेशक के बंगले से आनन-फानन में वापस रिम्स के वार्ड में भेज दिया गया था। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब भी मांगा गया। सवाल है कि इस तरह का सुख कितने ही लोग भोग रहै हैं और उनके बारे में कोई अदालत में गुहार क्यों नहीं उठा रहा है? (हिफी)

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