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शुरू हुई किसान संसद-मुकदमें वापस लेने की मांग पर चल रही चर्चा

शुरू हुई किसान संसद-मुकदमें वापस लेने की मांग पर चल रही चर्चा

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर किसानों की संसद शुरू हो गई है। कृषि कानूनों के विरोध में लगाई गई संसद में किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देने के बाद नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर चर्चा शुरू हुई।


बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ राजधानी के बॉर्डरों पर आंदोलन कर रहे किसान जंतर मंतर पर पहुंचे। किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर आज सवेरे से ही जंतर मंतर पर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है। जिसके चलते भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। किसान संसद की शुरुआत में सबसे पहले किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उसके बाद कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को लेकर किसान नेताओं के ऊपर सरकार की ओर से जो मुकदमे दायर किए गए हैं उन्हें वापस लेने की मांग उठी। फिलहाल संसद में किसान इसी के ऊपर चर्चा कर रहे हैं। जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में किसान पहुंच चुके हैं। इनकी किसान संसद की घोषणा के मद्देनजर संसद भवन के आसपास सुरक्षा बल पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

किसान संसद में भाग लेने के लिए जंतर मंतर पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि किसान अब अपनी संसद बैठाएंगे। सदन के भीतर अगर सांसद किसानों के हित में अपनी आवाज नहीं उठाएंगे तो उनके क्षेत्र में ही उनकी निंदा की जाएगी। फिर चाहे वह सांसद किसी भी पार्टी के क्यों न हो। प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर पर पहुंचे किसानों ने जमकर नारेबाजी शुरू की। वही पुलिसकर्मियों ने जंतर-मंतर को दोनों तरफ से सील कर दिया है। प्रदर्शन स्थल के आसपास मीडियाकर्मियों को भी प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उधर किसान आंदोलन को जोर पकड़ता हुआ और पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव देखकर शिरोमणि अकाली दल भी अब कृषि कानूनों के विरोध में सामने आ गया है। आज सवेरे संसद भवन के बाहर शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने कृषि कानूनों के विरोध में बनाए गए पोस्टर दिखाते हुए कृषि मंत्री के सामने विरोध प्रदर्शन किया। उधर किसानों के प्रदर्शन के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश इस बात का गवाह है कि सरकार के कृषि कानून बेहद जरूरी और किसानों के हित में है। हमने इन कानूनों पर विस्तृत चर्चा की है। अगर किसान इन कानूनों को लेकर अपनी समस्याएं बिंदुवार रखते हैं तो हम उनसे बातचीत करने के लिए तैयार हैं।





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