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मोइली ने प्रभारियों पर उठाया सवाल

मोइली ने प्रभारियों पर उठाया सवाल

लखनऊ। कांग्रेस में प्रौढ़ों और युवाओं में आमने-सामने की लड़ाई शुरू हो गयी है अथवा प्रभारी महासचिव अपने दायित्व को ठीक से नहीं निभा रहे हैं। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने और भाजपा में जाने के बाद राजस्थान में युवा नेता सचिन पायलट ने बगावत कर दी है। उन्हें सभी पदों से हटा दिया गया। इसी प्रकार उनका पक्ष रखने पर महाराष्ट्र के युवा नेता संजय झा को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया। इन युवा नेताओं की शिकायत भी एकदम से खारिज नहीं की जा सकती लेकिन वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने जो बात कही है, उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

राजस्थान के राजनीतिक संकट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि राज्यों के प्रभारी महासचिवों ने अपना काम नहीं किया है और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले संगठन को मजबूत करने के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) स्तर पर सुधार की जरूरत है। पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन किया और कहा कि बागी नेता सचिन पायलट को धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए। मोइली ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में कई युवाओं को प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन उनका टेस्ट लेने की आवश्यकता है। आप केवल दिग्गजों की उपेक्षा नहीं कर सकते हैं। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि आज के कई युवाओं में धैर्य बिल्कुल नहीं है। उन्हें

दृढ़ता रखने की आवश्यकता है। सचिन पायलट मुख्यमंत्री पद के लायक हो सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए था। 42 वर्षीय नेता को सांसद, केंद्रीय मंत्री, उपमुख्यमंत्री और पीसीसी अध्यक्ष जल्दी बनाया गया था। पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि राज्यों के प्रभारी एआईसीसी महासचिव सतर्क नहीं हैं और स्थानीय पार्टी इकाइयों की समस्याओं को नहीं समझते हैं। कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने कहा कि इन दिनों हम इस तरह की कवायद नहीं कर रहे हैं चाहे वह उत्तर-पूर्वी राज्य हों, या मध्य प्रदेश या कर्नाटक। कई बार हाई-कमान की ओर से सतर्कता का भी अभाव है। परिणामस्वरूप जब सब कुछ हो जाता है, तभी वे सक्रिय हो जाते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए।

आंध्र प्रदेश, असम, केरल, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी के कांग्रेस प्रभारी रह चुके वीरप्पा मोइली ने कहा कि मैं सभी राज्यों में जाता था। कार्यकर्ताओं की शिकायत सुनता था। इन दिनों ये नहीं किया जाता है। अब उन लोगों को राज्यों का प्रभार दिया गया है, जिनके पास वहां जाने या वहां रहने का कोई समय नहीं है। न ही वे जिलों का भ्रमण कर रहे हैं। वीरप्पा मोइली ने कहा कि आपको न केवल राज्य स्तर पर बल्कि जिला स्तर पर भी नेताओं की आकांक्षाओं को समझना होगा। निष्ठावान नेताओं को लगाकर कांग्रेस को मजबूत करना होगा। बीजेपी बस मौके का इंतजार करती है। उनके निशाने पर गैर-भाजपा सरकारें हैं और वे इन आकांक्षी युवाओं (अन्य दलों से) को पकड़ते हैं, जो शालीन हैं।

उधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। साथ ही यह भी कहा कि हमारे डिप्टी सीएम सचिन पायलट खुद राजस्थान सरकार गिराने की डील कर रहे थे। हमारे विधायकों को पैसे के लालच दिए जा रहे हैं। मेरे पास सबूत है। सचिन पायलट पर हमला बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि पहले भी हमें अपने विधायकों को 10 दिन तक होटल में रखना पड़ा। अगर उस वक्त हम नहीं रखते तो आज जो मानेसर वाला खेल हुआ है, वो उस समय होने वाला था। रात के दो बजे लोगों को भेजा जा रहा था। खुद षड्यंत्र में शामिल नेता सफाई दे रहे थे।

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि हमारे डिप्टी सीएम हों या पीसीसी चीफ, उनसे जब खरीद-फरोख्त की जानकारी मांगी गई तो सफाई दे रहे हैं। वह खुद षड्यंत्र में शामिल थे। दिल्ली में बैठे लोगों ने सरकार गिराने की साजिश रची। लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश हो रही है। कर्नाटक और मध्य प्रदेश की तरह साजिश हो रही है। सीएम अशोक गहलोत ने कहा हम तो तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। 40 साल की राजनीति हो गई। हम तो नई पीढ़ी को तैयार करते हैं। आने वाला कल उनका है। हमारी बहुत रगड़ाई हुई थी। 40 सालों तक जिन्होंने संघर्ष किया, वो आज मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और पार्टी के शीर्ष पर हैं।

सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि लोग कहते हैं हम नई पीढ़ी को पसंद नहीं करते हैं। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और खुद अशोक गहलोत उन्हें पसंद करता है। गवाह है कि जब भी मीटिंग होती है तो मैं युवाओं और एनएसयूआई के लिए लड़ाई लड़ता हूं। इनकी रगड़ाई नहीं हुई थी, इसलिए यह समझ नहीं पा रहे हैं।सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि इनकी बिना रगड़ाई हुए केंद्रीय मंत्री और पीसीसी चीफ बन गए। अगर रगड़ाई हुई होती तो आज और अच्छा काम करते। आज हमसे अच्छा काम ये कर सकते हैं। अगर ये खुद ही हॉर्स ट्रेडिंग को पसंद करेंगे और उसका हिस्सा बनेंगे तो देश को बर्बाद करेंगे। अब सचिन पायलट का पक्ष भी देख लें तो उनकी शिकयत भी वाजिब लगती है। सचिन पायलट को 14 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया। अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोलना सचिन पायलट को भारी पड़ा और कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि पायलट ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार को गिराने का षड्यंत्र रचा है।

सचिन कहते हैं मैं उनसे नाराज नहीं हूं और ना ही किसी तरह की कोई स्पेशल शक्ति मांग रहा हूं। मैं बस इतना चाहता हूं कि कांग्रेस की सरकार राजस्थान में लोगों से किए हुए वादे को पूरा करे जो चुनाव के दौरान किए गए थे। हमने चुनाव में वसुंधरा राजे की सरकार के खिलाफ प्रचार किया, जिसमें अवैध माइनिंग का मसला था लेकिन सत्ता में आने के बाद अशोक गहलोत जी ने कुछ नहीं किया और उसी रास्ते पर चल पड़े। पिछले साल राजस्थान हाई कोर्ट ने एक पुराने फैसले को पलटते हुए वसुंधरा राजे को बंगला खाली करने को कहा, लेकिन अशोक गहलोत सरकार ने फैसले पर अमल करने की बजाय इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। वे कहते हैं अशोक गहलोत एक तरफ तो पूर्व मुख्यमंत्री की मदद कर रहे हैं और दूसरी तरफ मुझे और मेरे समर्थकों को राजस्थान के विकास में काम करने की जगह नहीं दे रहे हैं। अफसरों को कहा गया कि मेरे आदेश न मानें, मुझे फाइलें नहीं भेजी जा रही थीं। महीनों तक विधायक दल या कैबिनेट की बैठक नहीं होती है। ऐसे पद का क्या फायदा अगर मैं लोगों को किया गया वादा ही न पूरा कर सकूं।

मुख्यमंत्री बनने की बात नहीं है, मैंने मुख्यमंत्री पद की बात तब की थी जब मैंने 2018 में पार्टी की जीत की अगुवाई की थी। मेरे पास सही तर्क थे। जब मैंने अध्यक्ष पद संभाला तो पार्टी 200 में से 21 सीटों पर आ गई थी। पांच साल के लिए मैंने काम किया और गहलोत जी ने एक शब्द भी नहीं बोला। लेकिन चुनाव में जीत के तुरंत बाद गहलोत जी ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा ठोंक दिया। अनुभव के मसले पर, उनका क्या अनुभव है? सचिन ने कहा 2018 से पहले वो दो बार मुख्यमंत्री बने हैं, दो चुनाव में उनकी अगुवाई में पार्टी 56 और 26 पर आ पहुंची। इसके बाद भी उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री बना दिया गया। इस प्रकार मोइली का आकलन वाजिब दिखता है।

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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