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क्या लालू नाम से पीछा छुड़ाना चाहती है कांग्रेस ?

क्या लालू नाम से पीछा छुड़ाना चाहती है कांग्रेस ?

पटना पोस्टर के जरिए बिहार में छिड़ी सियासत के बीच कांग्रेस ने नया पोस्टर जारी करते हुए बिहार की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है. बिहार किसान कांग्रेस की तरफ से शहर भर में लगाए गए पोस्टरों में 15 साल बनाम 15 साल नारे की जगह कांग्रेस के 30 साल के शासन को सीएम नीतीश कुमार के 30 साल (केंद्र और राज्य मिलाकर) के शासन से तुलना की है. कांग्रेस ने इस पोस्टर के जरिये लालू राज (लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का शासन काल) से परहेज किया है. कांग्रेस ने पोस्टर लगाते हुए 30 साल पहले मतलब लालू-राबड़ी की सरकार से पहले कांग्रेस की सरकार के समय की बात कही गई है. इस पोस्टर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तस्वीरें लगाई गई हैं, पर आरजेडी के किसी भी नेता इसमें नहीं हैं।

इस पोस्टर में बताया गया है कि कांग्रेस के समय बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग-धंधे की स्थिति बेहतर थी. वहीं, नीतीश कुमार के केंद्र में रहे मंत्री काल और बिहार में मुख्यमंत्री के तौर पर है 15 साल की तुलना करते हुए बताया है कि बिहार में न तो शिक्षा और स्वास्थ्य की हालत ठीक है और न ही उद्योग धंधे और रोजगार की स्थिति. कांग्रेस द्वारा जारी किए गए इस पोस्टर में लालू राज के 15 साल से परहेज करने से इस बात ने तूल पकड़ लिया है. सियासी गलियारों में सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या कांग्रेस चुनाव में खुद लालू राज से परहेज करना चाहती है? क्या विरोधियों का लालू राज पर हमले से कांग्रेस परेशान है?

कांग्रेस के पोस्टर पर तंज कसते हुए जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि अब कांग्रेस को लगने लगा है कि लालू राज की बातों से उसे खुद ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए लालू राज से खुद को अलग दिखना चाहती है. साथ कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा कि आज बिहार में जो भी बेरोजगारी और पिछड़ापन है वो कांग्रेस की देन है।कांग्रेस शासन में लिए गए फैसलों के कारण ही बेरोजगारी बढ़ी है. कांग्रेस ने विरासत में जो पिछड़ा बिहार नीतीश कुमार के हाथों में सौपा उसे ठीक करने का प्रयास हो रहा है।

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