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कांग्रेस में एकता का अभाव

कांग्रेस में एकता का अभाव

कांग्रेस के नेता भले ही कह रहे हों कि गुजरात विधानसभा चुनाव से उन्हें टाॅनिक मिला है लेकिन मध्य प्रदेश में कांग्रेस में एकता का अभाव साफ-साफ दिख रहा है। राज्य के छह जिलों में नगरीय निकाय चुनाव और रीवां में नगर परिषद सेमरिया के अध्यक्ष पद के लिए उपचुनाव होना है। इन चुनावों में कांग्रेस को एकजुट होकर सत्तारूढ़ भाजपा का मुकाबला करना चाहिए लेकिन इसके नेता सत्ता के लिए एक-दूसरे की टांग खींचते हुए नजर आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में धार, बड़वानी, खंडवा, गुना, शिवपुरी और अनूपुर में नगरीय निकाय के चुनाव हो रहे हैं। इसी तरह रीवां की नगर परिषद सेमरिया में अध्यक्ष पद का उपचुनाव होना है। धार जिले में धार नगर पालिका के लिए पूर्व मंत्री मोहन सिंह बुंदेला और पूर्व विधायक बाल मुकुंद गौतम के बीच जमकर तनातनी देखी जा रही है।
विधायक व ब्लाक कमेटियों के पदाधिकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी से कुछ नगरीय निकायों के प्रत्याशियों के बी फार्म लेकर अपने-अपने क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह से उनके सरकारी निवास पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने इसी संदर्भ में गत दिनों मुलाकात भी की थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव चाहते हैं कि आपस में झगड़ा नहीं होना चाहिए। धार नगर पालिका के लिए बुंदेला अपने बेटे को टिकट दिलाना चाहते हैं जबकि बाल मुकुन्द गौतम विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए अपने किसी समर्थक को टिकट दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस में धार नगर पालिका अध्यक्ष के अलावा आठ वार्डों में पार्षदों को लेकर भी सहमति नहीं बन पायी है। नगरीय निकाय चुनावों में जहां पर प्रत्याशी तय हो चुके हैं, वहां की कांग्रेस कमेटियों को निर्देश मिल गया कि वे प्रत्याशियों को बी फार्म दे दें। अब, प्रत्याशी ही तय नहीं हो चुनाव प्रचार कैसे करें। कांग्रेस के ही कुछ नेता कहने लगे हैं कि निकाय चुनाव में प्रत्याशी तय करने में यह स्थिति है तो विधानसभा चुनाव में तो महाभारत ही मच जाएगा।

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