हाशिये पर है RSS व BJP का जुझारू सिपाही

हाशिये पर है RSS व BJP का जुझारू सिपाही

मुजफ्फरनगर। इसे किस्मत कहें या चापलूसी की धूल में खो गये खरे सोने की संज्ञा दें कि वर्तमान में गौसेवा आयोग द्वारा जिला स्तर पर बनी गौ समिति के नामित सदस्य राजेन्द्र धनगर लगभग 41 साल पहले 1978 में जुझारू कार्यकर्ता के रूप में आरएसएस से जुड़े थे और तभी से आरएसएस के सच्चें सिपाही के रूप में उन्होंने खुद को हर मौके पर प्रस्तुत किया है, लेकिन आज वे सत्ताधारी पार्टी से जुड़े होने के बाद भी हाशिये पर हैं।




हिंडन नदी के तट पर बसे जनपद के उस बुढ़ाना कस्बे में जमींदार परिवार में जन्में राजेन्द्र धनगर के बाबा बलदेव सिंह बुढ़ाना नगरपंचायत के चेयरमैन रह चुके हैं। उनके पिता ओमप्रकाश क्षेत्र के प्रतिष्ठित किसान माने जाते हैं। उनकी भाभी सोमी देवी नगर पंचायत में अपने वार्ड की प्रथम नागरिक रह चुकी हैं। राजेन्द्र धनगर 1978 में आरएसएस ज्वाइन करने के बाद 1984 में भाजपा के सक्रिय सदस्य बने और 1987 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे 1988 में भाजपा युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष बने और 1989 में रामजन्मभूमि आंदोलन में बजरंग दल के नेता के रूप में सक्रिय भूमिका निभायी। इस दौरान वे जेल भी गये थे। इसके बाद 1990 में उन्हें भाजपा का नगर अध्यक्ष नियुक्त किया और 1998 में वे किसान सेवा सहकारी समिति के निदेशक पद के लिए निर्वाचित किये गये थे। वे वर्तमान में भाजपा जिला कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।धार्मिक प्रवत्ति के धनी राजेन्द्र धनगर 1995 शान्तिकुंज हरिद्वार से सक्रिय रूप में जुड़े हुए हैं।


इसे किस्मत कहें या तत्कालीन कथित रूप से उभरते पार्टी नेताओं की स्वार्थपरता कहें कि भाजपा से निस्वार्थ भाव से जुड़े राजेन्द्र धनगर को अब तक पार्टी ने लगभग नजरअंदाज कर रखा है, जबकि आरएसएस व भाजपा उनके लिए केवल पार्टी ही नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जो उनके व्यवहार व खून में रचबस गयी है। पार्टी के प्रति वफादारी की बात करें तो वे अब तक तमाम-उतार से लगभग अंजान रहकर पार्टी के प्रति पूरी वफादारी निभाते रहे। एक बार 1991 में आश्वासन मिलने के बाद विधानसभा चुनाव के चरथावल सीट से नामांकन करने के बावजूद टिकट नहीं मिलने पर अपना नामांकन वापिस ले लिया था और चूं तक नहीं की थी।


पेशे से खेतीहर राजेन्द्र धनगर काफी समय पूर्व बुढ़ाना से आकर घासीपुरा में बस गये थे और यहीं से बुढ़ाना और बेगराजपुर का कार्य देख रहे हैं। जनपद की भाजपा राजनीति की धुरी मानी जाने वाली पूर्व मंत्री एवं सांसद मालती शर्मा को अपना राजनीतिक गुरू मानने वाले राजेन्द्र धनगर ने कई दिग्गजों के चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाकर उन्हें सत्ता की चासनी चखायी है। राजेन्द्र धनगर बताते हैं कि जनपद में मालती देवी ने भाजपा के लिए कार्य किया है, वह हर किसी के लिए मिसाल है। उनके अनुसार उनकी राजनीतिक गुरू मालती शर्मा 1980 से 1991 तक लगभग 11 साल भाजपा की निर्विवाद जिलाध्यक्ष रही थी। 1986 में तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष व अपनी राजनीतिक गुरू के नेतृत्व में चलाये गये जेल भरों आंदोलन में जेल भी गये थे। इसके बाद 1991 में विधानसभा चुनाव के दौरान हुए साम्प्रदायिक दंगों के चलते भी उन्हें जेल जाना पड़ा था। राजेन्द्र धनगर बुढ़ाना क्षेत्र का एक ऐसा नाम है जो न केवल बुढ़ाना क्षेत्र, बल्कि अपने खर्च पर बाहर भी पार्टी का झण्ड़ा बुलन्द करते रहे हैं।मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन व उत्तर प्रदेश आयुष परिषद के चेयरमैन डा.सुभाष शर्मा भी राजनीति में राजेन्द्र धनगर के आदर्श हैं।


आज जब बुढ़ाना की मिट्टी में जन्में नवाजुद्दीन सिद्दी सिने स्टार बनकर देश-विदेश में बुढ़ाना का नाम रोशन कर रहे हैं। बुढ़ाना की मिट्टी में जन्मे और पले-बढ़े जितेन्द्र कुमार त्यागी व उनकी पत्नी नगर पंचायत के चेयरमैन बनकर क्षेत्र की सेवा करके अपनी जन्मभूमि का कर्ज उतारने में लगे हुए है और बुढ़ाना के ही सुबोध त्यागी डीसीडीएफ का चेयरमैन बनकर बुढ़ाना की मिट्टी का कर्ज उतारने का अवसर प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में राजेन्द्र धनगर की भी इच्छा है कि वे भी पार्टी के जुझारू सिपाही होने के नाते कुछ पद प्राप्त करके अपनी जन्मभूमि के लिए कुछ कर सकूं और उनकी यह इच्छा नावाजिब नहीं है। उन्हें लगभग 41 वर्षों से आरएसएस व भाजपा की सेवा करने का कुछ सिला तो सत्ताधारी पार्टी पार्टी से मिलना ही चाहिए। ताकि वे भी गर्व से कह सकें कि उनकी सेवा व्यर्थ नहीं गयी और उन्हें भी सेवा का मेवा मिल गया है। शालीन स्वभाव के धनी राजेन्द्र धनगर की मानें तो वे 1991 से लगातार पार्टी से विधानसभा के टिकट की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन स्वार्थपरता की राजनीति के चलते और राजेन्द्र धनगर के संकोची स्वभाव के चलते उनकी मांग को अब तक अनसुना किया जाता रहा है।

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