बुढ़ाना क्षेत्र में युवाओं की पहली पसंद हैं गज्जू पठान

बुढ़ाना क्षेत्र में युवाओं की पहली पसंद हैं गज्जू पठान

मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना क्षेत्र की समस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन करने वाले युवा गज्जू पठान क्षेत्र में युवकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। समस्या चाहें कैसी भी हो और किसी की भी हो गज्जू हमेशा उसके निपटारे के लिए तैयार रहते हैं। अपनी इसी जोशीली कार्यशैली के चलते वे क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम बन गये हैं। हालांकि वे पूर्व विधायक नवाजिश आलम की प्रेरणा से राजनीति में आये थे और सपा युवजन सभा के जिला महासचिव नियुक्त हो गये थे, लेकिन जल्दी ही सपा से उनका मोह भंग हो गया और उन्होंने जयंत चैधरी से प्रभावित होकर रालोद का दामन थाम लिया और आज वे युवा लोकदल के प्रदेश महासचिव हैं।






मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना तहसील स्थित गांव बवाना निवासी मेहर इलाही के घर जन्मे गज्जू पठान को राजनीति में आने की प्रेरणा पूर्व विधायक नवाजिश आलम से मिली थी और उन्हीं की प्रेरणा से उन्होंने वर्ष 2010 में समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी। 2012 में गज्जू पठान को सपा युवजन सभा का जिला महासचिव बनाया गया, लेकिन जल्दी ही उनका सपा नेताओं की टांग खिचाऊ राजनीति से मन भर गया और उन्होंने सपा को टाटा कहकर वर्ष 2016 में जयंत चैधरी के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया था और आज वे युवा लोकदल के प्रदेश महासचिव हैं।



सपा नेताओं के प्रति मन में खटास के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में गज्जू पठान ने बताया कि सपा में ऐसे नेताओं का बोलबाला हो गया था, जिनका कोई जमीनी आधार नहीं था। इन नेताओं का मुख्य कार्य एक दूसरे की टांग खींचना और अपने छोटे पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करना रह गया था। ये किसी भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता का कद बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते थे और कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर राजनीति चमकाने की कोशिश में रहते थे। उन्होंने अपनी खटास की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि एक बार वे वार्ड 23 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन सत्ता के नशे में चूर कुछ हवाहवाई नेताओं ने अपने प्रभाव से उक्त सीट पिछडी जाति की महिला के लिए आरक्षित करवा दी थी, क्योंकि वे अपने छोटे पदाधिकारी को आगे बढ़ने देना नहीं चाहते थे। सत्ता के विरोध के बावजूद उन्होंने वार्ड 23 पर कल्लू प्रधान की पत्नी मेहमूदा का समर्थन किया था। उस चुनाव में सत्ताधारी सपा की उम्मीदवार तीसरे नम्बर पर रही थी, जबकि उनकी समर्थित उम्मीदवार मेहमूदा बहुत कम वोटों के मार्जन से दूसरे नम्बर पर रही थी। इसके बाद उन्होंने सत्ता पक्ष सपा के विरोध में ब्लाॅक प्रमुखी चुनाव में अपने प्रत्याशी बबलू उर्फ अजीत सिंह को विजय दिलवाकर अपने नाम का डंका बजवा दिया था।






गज्जू पठान बताते हैं कि सत्ता में रहकर और सत्ता से में नहीं रहते हुए भी उन्होंने क्षेत्र में कई दर्जन सड़के बनवायी हैं। इसके साथ ही सपा के तत्कालीन कद्दावर मंत्री के सहयोग से सफीपुर पट्टी में एक राजकीय इंटर कालेज की स्थापना भी करवायी थी। उन्होंने बताया कि वे किसानों के हित में युवाओं की टीम के साथ अक्सर बजाज हिन्दुस्थान की भैसाना चीनी मिल, तहसील, ब्लाॅक व बिजली के दफ्तरों पर अक्सर धरना-प्रदर्शन करते ही रहते हैं। उन्होंने कई बार बकाया गन्ना मूल्य की मांग को लेकर क्षेत्र की भैसाना चीनी मिल, एसडीएम व तहसीलदार का घेराव कर चुके हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि वे बढ़ती बिजली की दरों व स्कूलों में बढ़ती फीस के खिलाफ जल्दी ही एक बड़ा आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज एक ओर तो बिजली की बढ़ती दरों से किसान बदहाल है तो दूसरी ओर स्कूल-कालेजों की मनमानी फीस से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है, जिससे निजात दिलाना बेहद जरूरी है।








वर्तमान में गज्जू पठान व्यक्तिगत जीवन में पत्रकार राशिद अली खोजी को अपना आदर्श मानते हैं, लेकिन राजनीति में राष्ट्रीय लोकदल के महासचिव जयंत चौधरी को आदर्श मान चुके हैं। गज्जू पठान की मानें तो वे विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं और यदि पार्टी आलाकमान का आदेश हुआ तो वे विधानसभा चुनाव अवश्य लडेंगे और जीतकर भी दिखायेंगे। उन्होंने बताया कि वे वार्ड 23 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ने के मूड़ में हैं। अगर पार्टी का आदेश हुआ तो वे जिला पंचायत चुनाव भी जरूर लडेंगे।

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