भई वाह! पुलिस अफसर हो तो ऐसा, एसपी अजय कुमार ने पेश की मानवता की नई मिसाल

भई वाह! पुलिस अफसर हो तो ऐसा, एसपी अजय कुमार ने पेश की मानवता की नई मिसाल

शामली। जनपद की जनता पुलिस अधीक्षक अजय कुमार की ऐसे ही नहीं तारीफ करती है, बल्कि उन्होंने मानवता, संवदेनशीलता के साथ लोगों की सेवा करके उनका दिल जीत लिया है। उन्होंने शामली जनपद की जनता का भरोसा और प्यार जीता है। इसके लिए उन्होंने अपने कार्यालय और कैम्प ऑफिस के दरवाजे आम जनता के लिए हमेशा खुले रखे हैं। सभी से मिलना, सबकी बातें ध्यान से सुनना और गुण-दोष के आधार पर तुरंत ही निर्णय ले लेना कोई एसपी अजय कुमार से सीखे।


मानवता व संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश करता ताजा वाकया बीते कल यानी 6 सितम्बर का है। हुआ यूं कि एसपी अजय कुमार अपने कार्यालय का काम निपटाने के बाद करीब 1 बजे अपनी गाड़ी में बैठ कर निकले ही थे, कि कार्यालय से करीब 1 किलोमीटर जाने के बाद उन्हंे एक ई-रिक्शा अपने कार्यालय की ओर आता हुआ दिखायी दिया, जिसमें एक वृद्ध दम्पति बैठे थे। उनके हाथ में एक कागज था, जिसको थामे वे एसपी की तरफ इशारा कर ही रहे थे। कार में बैठे हुए एसपी शामली अजय कुमार की नजर उन पर पड़ी तो उन्हें यह समझते देर न लगी कि ये वृद्ध दम्पति फरियादी हैं और अपनी किसी समस्या को लेकर उनसे मिलने उनके दफ्तर ही जा रहे हैं। उन्होंने तुरंत अपनी सरकारी कार रूकवाई और बिना किसी से कुछ बोले जल्दी से गाडी से उतरे और लम्बे-लम्ब डग भरते हुए वृद्ध दम्पति तक पहुंच गये। उनको देखकर वृद्ध दम्पति की बूढ़ी आँखें आशा व विश्वास की किरणों से चमक उठीं। एसपी अजय कुमार ने भी वहीं खड़े-खड़े मौके पर ही उनकी पूरी बात सुनकर उनके प्रार्थना पत्र सम्बन्धित को कार्यवाही के लिए आदेश कर दिये और फिर अपने रास्ते चल पडे। जिसने भी इस मंजर को देखा, बस वाह-वाह कर उठा।



बता दें कि 2011 बैच के आईपीएस अफसर अजय कुमार ने बतौर एसपी 15 नवम्बर 2018 को शामली जिले का चार्ज सम्भाला था। अब तक के अपने लगभग 11 माह के कार्यकाल में वे जनता का दिल जीतकर सबसे कामयाब एसपी साबित हुए हैं। वे आॅपरेशन शिकंजा के तहत अपराधियों के खिलाफ तानाबाना बुनकर उन्हंे उनके अंजाम (जेल) तक पहुंचाते हैं तो वे हालचाल दस्ते के जरिये जहां एक ओर जनपदवासियों से निकटतम सम्पर्क स्थापित करने में सफलता प्राप्त करते हैं, वहीं दूसरी ओर हालचाल दस्ते के कारण अपराध को होने से पहले ही उसका उपचार करने की कोशिश शुरू कर देते हैं। वे महिला सशक्तिकरण के तहत बालिकाओं का मनोबल बढ़ाते हैं, तो नशे के कारोबारियों के लिए आफत भी बने हुए हैं।

Top