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कुम्भ की कमान संभालने वाले एडीजी एस एन साबत को अब लखनऊ जोन का जिम्मा

कुम्भ की कमान संभालने वाले एडीजी एस एन साबत को अब लखनऊ जोन का जिम्मा

प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महत्वकांक्षा के अनुरूप ऐतिहासिक स्तर पर कुम्भ मेला इलाहाबाद में कानून और व्यवस्था की कमान बखूबी संभालने वाले एडीजी एसएन साबत को इसका भरपूर ईनाम मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनको लखनऊ ज़ोन की जिम्मेदारी सौंपकर सौगात देने का काम किया है। एडीजी एसएन साबत को ब्यूरोक्रेसी में एक साहित्यिक आईपीएस के रूप में पहचाना जाता है। उनकी अंग्रेजी और हिन्दी साहित्यिक की पुस्तकों के लिए देश विदेश से भी सम्मान मिल चुका है।






साहित्यिक रूचि के धनी एस एन साबत जालौन, मिर्जापुर, इटावा, मुजफ्फरनगर जनपदों में बतौर पुलिस प्रमुख व मिर्जापुर, बनारस व कानपुर बतौर डीआईजी व आईजी पदों पर सेवा देने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनको प्रयागराज जोन में अपर पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनात किया। उनको यहां पर कुम्भ मेला सकुशल सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी के साथ भेजा गया और उनके द्वारा कुम्भ मेला में कानून व्यवस्था को जिस स्तर तक सुदृढ़ करते हुए कुम्भ मेला निर्विघ्न सम्पन्न कराया, वह ऐतिहासिक रहा। उत्कृष्ट कार्यशैली और हर विषय पर मजबूत पकड़ का ही नतीजा रहा कि कुम्भ मेला सम्पन्न कराने पर 1990 बैच के आईपीएस अफसर एस एन साबत को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस महानिदेशक का प्रशंसा चिन्ह प्लेटिनम पदक के नामित किया गया। उन्हें यह सम्मान स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदान किया गया।






आईपीएस अधिकारी एस एन साबत एक ओर पूरी साहित्यिक रूचि के व्यक्ति हैं, तो वहीं दूसरी ओर कई मौकों पर वे बदमाशों के लिए आफत का परकाला भी साबित हुए हैं। मुजफ्फरनगर में बतौर एसपी 28 व बनारस में दो बार बतौर एसएसपी तैनाती के दौरान 48 एन्काउंटर किये यह वह दौर था, जब पुलिस के लिए एन्काउंटर जोख़िम हुआ करते थे, ये जोख़िम आज भी उतना ही है, लेकिन जिस तरह से आज पुलिस का मनोबल बढ़ा है, उस आधार पर संसाधनों से परिपूर्ण पुलिस अब बदमाशों पर हावी हो रही है, लेकिन उस जमाने में पुलिस संसाधन के अभाव में बदमाशों से लोहा लेने में इतनी सक्षम नहीं मानी जा सकती थी। ऐसे दौर में आईपीएस एस एन साबत के द्वारा एन्काउंटर के सहारे बदमाशों को दहशत का अहसास कराया था। अक्टूबर 2004 को एक ही दिन छः बदमाशों के एन्काउंटर का रिकार्ड भी डॉ एस एन साबत के नाम ही है। उस दौर में बदमाशों में डॉ एस एन साबत नाम का ऐसा टेरर था कि नाम सुनते ही बदमाशों के होश फाख्ता हो जाते थे।






एडीजी एस एन साबत को 2001 में संयुक्त राष्ट्रीय संघ के शान्ति मिशन (कोसोगो) में सराहनीय कार्य के लिए यूनाईटेड नेशन शान्ति पुरस्कार, 2016 में पुलिस महानिदेशक का प्रशंसा चिन्ह सिल्वर पदक व वर्ष 2018 में पुलिस महानिदेशक का प्रशंसा चिन्ह गोल्ड पदक से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्हें गृह मंत्रालय की ओर से उनकी पुस्तक ''भारत में मानवाधिकार, वैदिक काल से आधुनिक काल तक'' के लिए पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।






एडीजी एस एन साबत का हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं के लेखक के रूप में पूरा कमाण्ड़ है। इससे पूर्व भी 2004 में उनका लेख राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा प्रकाशित 'नई दिशाएं पुस्तक में प्रकाशित हो चुका है, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2006 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।



एडीजी एस एन साबत ने पीड़ितों की समस्याओं के समाधान ओर मानवाधिकार के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने पुलिस अफसर के रूप में पीड़ितों को त्वरित न्याय देकर आम जनमानस में अपनी छाप छोड़ी है। जालौन जनपद से पुलिस सेवा की शुरूआत करने वाले डॉ एस एन साबत मिर्जापुर, इटावा व मुजफ्फरनगर में जिला पुलिस के प्रमुख, व मिर्जापुर, बनारस व कानपुर में डीआईजी पर कार्य करने के बाद डॉ एस एन साबत 5 साल तक सीआरपीएफ में आईजी के पद पर तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड़ में अपनी सेवाएं दी थी। वहां नक्सल एरिया में भी उन्होंने नक्सलियों से मुकाबला करते हुए जनता को बचाने में अपना योगदान दिया था। सीआरपीएफ से वापस आने पर डॉ एस एन साबत को आईजी रेलवे लखनऊ और उसके बाद एडीजीपी पुलिस भर्ती एंव प्रोन्नति बोर्ड में तैनात किया गया। एडीजी पुलिस भर्ती बोर्ड के पद पर रहते हुए उन्होंने पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से भर्ती प्रक्रिया को सम्पादित कराया। वह पहला मौका था, जब भर्ती प्रक्रिया पर किसी ने कोई अंगुली तक नहीं उठायी थी।






अभी हाल में प्रयागराज में सकुशल सम्पन्न हुए विश्वप्रसिद्ध कुम्भ मेले में उनकी व्यवस्था को न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुक्त कंठ से सराहा था, बल्कि उनकी व्यवस्था को पूरे देश में बहुत सराहना प्राप्त हुई थी। विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं को भी कुम्भ मेले में ऐसे सुरक्षा बंदोबस्त मिले जो अभूतपूर्व रहे।



कुम्भ मेले के दौरान 50 दिनों में लगभग 24 करोड़ श्रद्धालुओं ने कुम्भ स्नान किया था। इतना ही नहीं मौनी अमवस्या पर एक दिन में 3 करोड़ श्रद्धालु प्रयागराज में पधारे थे। कुम्भ मेले की व्यवस्था के लिए 36 हजार पुलिस बल नियुक्त किया गया था। इस दौरान 5 लाख 68 हजार गाड़ियों के पार्किंग की व्यवस्था की गयी थी। जानकारों के अनुसार कुम्भ मेले का प्रबन्ध वहां आने वाले श्रद्धालुओं के विशालतम हजुम को देखते हुए काफी चुनौती भरा था, जिसमें आतंकवाद से लेकर भगदड़ और अन्य तरह के क्राईम पर नियंत्रण रखना था, लेकिन सब चुनौतियों पर पार पाते हुए एडीजी एस एन साबत ने सभी से अपनी योग्यता का लोहा मनवा दिया था।



कुम्भ मेले में एडीजी एस एन साबत ने क्राउड मैनेजमेंट का जो फार्मूला अपनाकर सरल और सुलभ व्यवस्थाओं को पेश किया, उनके इसी काम ने शासन में उनके कद को और बढ़ाया। यही कारण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा के बाद प्रदेश के पुलिस मुखिया डीजीपी ओपी सिंह ने उनके काम की कद्र की और अब एडीजी एस एन साबत को लखनऊ जोन में कानून व्यवस्था और अपराध उन्मूलन की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। एडीजी एस एन साबत ने लखनऊ ज़ोन का चार्ज संभाल कर अपनी नई पारी की शुुुरुआत कर दी है।

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