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उन्नाव रेप पीड़िता दुर्घटना के बारे में उत्तरप्रदेश डीजीपी ओपी सिंह का बयान

लखनऊ ।उन्नाव रेप पीड़िता दुर्घटना के बारे में पत्रकारों से बात करते डीजीपी यूपी ओपी सिंह ने कहा कि -


उन्नाव रेप पीड़िता के सड़क हादसे में घायल होने पर डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक्सिडेंट का मामला प्रतीत हो रहा है लेकिन पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है और गहनता से विवेचना की जा रही है और उसी के अनुसार हर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ट्रक के मालिक, चालक व क्लीनर को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों ही गाड़ियों की फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए गए हैं ।.

डीजीपी ओपी सिंह ने पीड़ित युवती की सुरक्षा में हुई ढील पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा, पीड़ित युवती की सुरक्षा में किसी तरह की चूक नहीं हुई थी. उनकी गाड़ी में पर्याप्त जगह नहीं थी इसलिए उन्होंने ख़ुद ही अपनी सुरक्षा में तैनात सिपाहियों को साथ ना चलने के लिए कहा था.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप पीड़िता का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। उन्नाव रेप पीड़िता की गाड़ी और ट्रक की भिड़ंत में उसकी चाची और मौसी की मौत हो गई, जबकि वकील और पीड़िता गंभीर रूप से घायल हैं और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है।

आपको बताते चलें उन्नाव गैंगरेप पीड़िता जेल में बंद अपने चाचा से मिलने के लिए अपनी दो महिला रिश्तेदारों के साथ गाड़ी से जा रही थी। रास्ता में गाड़ी को एक ट्रक ने टक्कर मार दी।

इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने एक बार फिर से चर्चा में आ गये है

बात साल 2017 की है एक लड़की ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के पास आत्मदाह करने की कोशिश की। पता चला कि जिस लड़की ने आत्मदाह का प्रयास किया है वह उन्नाव की रहने वाली है और उसने विधायक पर रेप का आरोप लगाया है।इसके बाद पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटे जाने का मामला सामने आया। आरोप था कि पुलिस के सामने विधायक के लोगों ने पीड़िता के पिता को पीटा था। इस मामले में पीड़िता के पिता को ही जेल भी भेज दिया गया।

दरअसल उस वक्त पुलिस ने उनकी बेटी के साथ रेप का मुकदमा नहीं लिखा था, इससे परेशान होकर वो कोर्ट की शरण में चले गए थे।
कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। आरोप है कि मुकदमा दर्ज किए जाने से नाराज विधायक के भाई ने अपने लोगों के साथ मिल कर पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटा। पुलिस ने मारपीट के मामले में पीड़िता के पिता को जेल भेज दिया।
जेल में उनकी तबियत खराब हो गई और खून की उल्टियां होने लगीं तो उन्हें अस्पताल भेजा गया जहां उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि पिटाई के कारण उनका आंतें फट गयी थी। विधायक कुलदीप सेंगर मोर्चा आए और खुद को निर्दोष बताया था।


उन्होंने पीड़िता के चाचा पर आरोप लगाया और कहा कि प्रज्ञा के चुनाव के कारण वह (चाचा) उनसे रंजिश रखते हैं। इस सबके बीच विपक्ष योगी सरकार पर लगातार निशाना साध रहा था और एक के बाद एक बयान सामने आ रहे थे। वह योगी सरकार कानूव व्यवस्था के मुद्दे पर लगातार घिरती हुई नजर आ रही थी।
ऐसे में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस मामले को दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश जारी कर दिए। इसी तरह बाद में विधायक के भाई अतुल सेंगर को गिरफ्तार कर लिया गया। इधर एसआईटी ने भी अपनी जांच शुरू कर दी थी लेकिन दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर दिया था।
अप्रैल 2018 में सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच के लिए याचिका भी दायर की गई। इसी दौरान विधायक की पत्नी ने अपने पति को बेगुनाह और पीड़ित परिवार को झूठा बताया। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और जांच रिपोर्ट मांगी।
हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा कि पॉक्सो एक्ट में एफआईआर के बाद भी अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है।

अब रेप पीड़िता अपने दो रिश्तेदारों, वकील के साथ अपने चाचा से मिलने जा रही थी जो जेल में बंद हैं। अचानक एक ट्रक ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों महिलाओं की मौत हो गई जबकि वकील और पीड़िता की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।


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