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मुजफ्फरनगर के कप्तान-कलेक्टर के जिम्मे अब गाजियाबाद, अपराधियों और भ्रष्टाचारियों पर रहेगी आफत

मुजफ्फरनगर के कप्तान-कलेक्टर के जिम्मे अब गाजियाबाद, अपराधियों और भ्रष्टाचारियों पर रहेगी आफत

गाजियाबाद । खबरदार ! अब गाजियाबाद में भी भ्रष्टाचारियों व माफियाओं की खैर नहीं, क्योंकि मुजफ्फरनगर में चाहें सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार के सफाये का मामला हो या माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही की बात हो। जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह की जोडी ने बदमाशों और भ्रष्टाचारियों को नाको चने चबवा दिये थे। अब यही जोडी गाजियाबाद में गलत काम करने वालों का जीना हराम करने वाली है।

गाजियाबाद जनपद भूमाफियाओं और अन्य शातिर अपराधियों के लिए कुख्यात् है

बता दें कि गाजियाबाद जनपद भूमाफियाओं और अन्य शातिर अपराधियों के लिए कुख्यात् है। दिल्ली से सटे होने के कारण यहां शातिर बदमाश अपराध करके दिल्ली स्थित सत्ता के गलियारों में गुम हो जाते है, जिसके कारण पुलिस प्रशासन को अक्सर काफी मशक्कत का सामना करना पडता है। अब देखना है कि डीएम अजय कुमार पाण्डेय और एसएसपी सुधीर कुमार सिंह की जोडी ऐसे मामलों को कैसे हैंडिल करती है।

योगी सरकार के अपराध विहीन यूपी का सपना पूरा करने में जुटे





बता दें कि योगी सरकार के अपराध विहीन यूपी का सपना पूरा करने में जुटे बतौर एसएसपी सुधीर कुमार सिंह के लगभग 300 दिन के कार्यकाल के दौरान मुजफ्फरनगर में पुलिस और बदमाशों के बीच 200 मुठभेड हुई, जिसमें 362 बदमाशों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें से 2 बदमाश पुलिस मुठभेड़ में दुनिया को टा-टा कर गये थे, तो 79 बदमाशों को पुलिस की गोली खाकर जेल की चारदीवारी में जाना पड गया था। बदमाशों के स्वीप अभियान के तहत मुठभेड का दोहरा शतक पूरा करने के दौरान एक लाख के इनामी कुख्यात आदेश बालियान को उसके अंजाम तक पंहुचा दिया गया। मुठभेड़ में मारे गये कुख्यात आदेश बालियान का वेस्ट यूपी में बहुत खौफ था। बड़े उद्योगपति से रंगदारी, लूट और अपहरण की वारदातों को अंजाम दे चुका था। उसने दिल्ली के रोहिणी में भी कई वारदातों को अंजाम दिया। गत वर्षो में अपना ठिकाना दिल्ली और गाजियाबाद में बना लिया था। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में तीस से अधिक मुकदमे दर्ज थे। पुलिस सूत्रों की मानें तो पुलिस की ऐसी कोई धारा नहीं बची थी, जिसके तहत कुख्यात् आदेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज न हो।




गाजियाबाद में चार्ज लेने के तुरन्त बाद एसएसपी सुधीर कुमार सिंह की पुलिस ने साहिबाबाद स्थित खोड़ा के संगम पार्क में पेट्रोल छिड़ककर मां को आग लगाने वाले आरोपित बेटे को पुलिस ने दबोच लिया था। थाने लाने के बाद उसे अपनी गलती पर पछतावा हुआ और वह जमकर रोया भी था।

कोतवाली क्षेत्र की अल्वी नगर कालोनी में आठ माह पूर्व हुई हत्या के आरोपित को भाी पुलिस ने रिमांड पर ले लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद किया है।

लोनी स्थित ट्रॉनिका सिटी थाना पुलिस ने चेकिग के दौरान तीन लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया। लुटेरों ने अपने तीन साथियों के नाम भी पुलिस को बताये।

लोनी के बार्डर थाना क्षेत्र में बंथला नहर पर युवक से मोटरसाइकिल लूट कर भाग रहे बदमाश को पुलिस ने पाइपलाइन रोड स्थित एक खाली प्लाट में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। उसका एक साथी पुलिस को गच्चा देकर मौके से फरार हो गया। गिरफ्तार बदमाश दिल्ली नंदनगरी निवासी हिस्ट्रीशीटर गुल्फराज है। उसके खिलाफ दिल्ली एनसीआर में 35 से अधिक लूट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके कब्जे से एक पिस्टल, 32 बोर दो कारतूस और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद हुई है।

ईस्टर्न पेरीफेरल हाइवे स्थित दुहाई टोल प्लाजा के ठेकेदार से रंगदारी मांगने और महीना बांधने की धमकी देने वाले तीन आरोपियों को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों में एक दिल्ली पुलिस का सिपाही है। इनके कब्जे से पुलिस ने पिस्टल, तमंचा और घटना में इस्तेमाल की गई सिपाही की स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद की है।

तेजतर्रार आईपीएस अफसर सुधीर कुमार सिंह का स्पष्ट कहना है कि जब-जब बदमाश कोई वारदात करने की कोशिश करेंगे, तब-तब पुलिस भी उनसे दो कदम आगे बढ़कर अपराध और अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही करने से नहीं चूकेगी।

मुज़फ्फरनगर जनपद के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराने के बाद अब गाजियाबाद की ओर रूख किया





दूसरी ओर सर्वोन्मुख विकास के प्रति अपनी विशिष्ट कार्यशैली के चलते मुजफ्फरनगर में पूर्व जिलाधिकारी डा.प्रभात कुमार, योगेन्द्र नारायण माथुर व मनोज कुमार की तरह जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय ने भी जनपद के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराने के बाद अब गाजियाबाद की ओर रूख किया है।

बता दें कि जब से जिलाधिकारी के रूप में अजय शंकर पाण्डेय ने मुजफ्फरनगर में कार्यभार सम्भाला था, तब से वे लगातार भष्ट्राचार पर वार कर रहे थे। सबसे पहले उनका ध्यान भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर गया और उन्होंने इसमें हो रहे भ्रष्टाचार के प्रति अपनी नजर टेडी कर ली, जिसके चलते कभी क्षेत्र की सस्ते गल्ले की दुकान को निरस्त कराकर अपने नाम में कराने की होड़ लग जाती थी और इसकी ऐवज में वे लाखों रूपये पानी की तरह बहानेें के लिए तैयार रहते थे, लेकिन जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्ड़ेय द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार पर वार करने के लिए सुनिश्चित की गयी व्यवस्था में आसपास की सस्ते गल्ले की दुकान खुद से सम्बद्ध कराना तो दूर अपनी दुकान भी सरेन्डर करने की तैयारी करने लगे हैं, जबकि पहले गांव की राजनीति का केन्द्र सस्ते गल्ले की दुकान ही होती थी और हर ग्राम प्रधान अपने नजदीकी को उक्त दुकान आंवटित कराने का प्रयास करते थे।

जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय ने प्रशासन में भी पारदर्शिता अपनाते हुए भ्रष्टाचार पर बडा वार किया हैं। इसके तहत उन्होंने विगत दिनों विकास विभाग में लगभग दर्जन भर स्थानान्तरण लाटरी सिस्टम अपनाकर पूरी पारदर्शिता से कराये थे। जिलाधिकारी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय आवास योजना के तहत बनाये जा रहे मकानों की निर्मार्ण सामग्री को खुद मौके पर जाकर परखा, इतना ही नहीं उन्होंने दीवारों को भी खुद हथौडे बजाकर देखा था और निर्माण एजेंसी को मानक के अनुरूप निर्माण नहीं कराने पर कठोर कार्यवाही की चेतावनी भी दी थी।

बीमा कम्पनी ओरियन्टल इन्श्योरेश कम्पनी के विरूद्व कठोर कार्यवाही

अब ताजा प्रकरण में जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय ने मुख्यमंत्री किसान सर्वहित बीमा योजना के 72 दावों का भुगतान नहीं करने पर बीमा कम्पनी ओरियन्टल इन्श्योरेश कम्पनी के विरूद्व कठोर निर्णय लेते हुए कम्पनी के बैंक खाते सीज करने व कमेटी द्वारा स्वीकृत 72 दावों की धनराशि 3 करोड 60 लाख की वसूली भी बीमा कम्पनी से करने के निर्देश दिये।

बता दें कि मुख्यमंत्री किसान सर्वहित बीमा योजना के अन्तर्गत किसान की आकस्मिक मृत्यु होने पर 5 लाख तक का बीमा मृतक के आश्रितों को मिलता है। जानकारों के अनुसार बीमा कम्पनी केवल अपना प्रीमियम लेेने में तो रूचि रखती है, लेकिन लाभार्थी को उसका क्लेम देने में आनाकानी करते हुए कई प्रकार की आपत्ति लगाकर दावा निरस्त कर देती है, जबकि दावों के निस्तारण के लिए कमेटी व जिलाधिकारी का निर्णय अन्तिम होता है। जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत दावों का भुगतान किये जाना कम्पनी के लिए बाध्यकारी होता है, परन्तु अब तक इन्श्योरेंश कम्पनी अपनी मनमर्जी पर उतारू थी।

जिलाधिकारी ने बताया जांचोपरान्त यह तथ्य सामने आया कि 72 दावों में कम्पनी द्वारा अभी तक मृतक आश्रितों को भुगतान नही किया गया है, जबकि कमेटी द्वारा दावों को स्वीकृत किया जा चुका था। उन्होंने बताया स्वीकृत दावों की धनराशि 3 करोड 60 लाख है। जिलाधिकारी ने बीमा कम्पनी ओरियंटल इन्श्योरेंश पर कडी कार्यवाही करते हुए बीमा कम्पनी के बंैक खाते सीज करने के साथ 3 करोड 60 लाख की वसूली भी सम्बन्धित बीमा कम्पनी से किये जाने के निर्देश दिये है। जिलाधिकारी की इस कार्यवाही से बीमा कम्पनी मे हड़कम्प मचा हुआ है। जिलाधिकारी ने बताया कि बीमा कम्पनी को ब्लैकलिस्ट कराने की कार्यवाही भी की जायेगी। जिलाधिकारी अजय शंकर पाण्डेय ने कहा है कि बीमा कम्पनी द्वारा किया जा रहा किसानों का उत्पीडन बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

अजय शंकर पाण्डेय मुजफ्फरनगर में एक जनपद, एक उत्पाद योजना के तहत पहली बार तीन दिवसीय गुड़ महोत्सव आयोजित कराकर गन्ना किसानों, गुड़ उत्पादकों से लेकर सरकार तक की प्रशंसा बटोर चुके हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि अजय शंकर पाण्डेय गाजियाबाद में किस तरह से अपना रूतबा कैसे बुलन्द कर पाते हैं।

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