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हरियाणवी आईपीएस छोरो को क्राईम कैपिटल की कमान

हरियाणवी आईपीएस छोरो को  क्राईम कैपिटल की कमान

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के बार्डर से लगा हरियाणा स्टेेट। खड़ी बोली से पहचाने जाने वाले इस प्रदेश के दो नौजवान आईपीएस क्राइम कैपिटल से मशहूर मुजफ्फरनगर जनपद में तैनात है। दोनो आईपीएस अफसरों के बैच में तीन साल का फासला है, मतलब अभिषेक यादव का बैच 2012 है तो सतपाल अंतिल 2015 बैच के नौजवान आईपीएस अफसर है। इन दोनो की उम्र में लगभग 13 महीनों का गेप है, यानी एसएसपी अभिषेक यादव की जन्म तिथि 5 सितम्बर 1987 है तो वहीं एसपी सिटी सतपाल अंतिल 9 अगस्त 1986 को हरियाणा की सरजमीं पर जन्में थे अगर बात इन दोनो हरियाणवी आईपीएस छोरो के मूल निवास की दूरी की जाये तो उसमें भी लगभग मात्र 50 किलोमीटर का फासला है उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद की सीमा से सटे सोनीपत तो नोएडा और मथुरा जनपद के बार्डर से लगे गुरूग्राम जनपद के निवासी ये दोनो आईपीएस उत्तर प्रदेश के अपराधियों एंव उनके अपराध के तरीको से भलीभांति वाकिफ है हरियाणा की सीधी और खड़ी बोली बोलने वाले दोनो अफसरों से मुजफ्फरनगर की जनता उम्मीद लगा रही है कि दीपक कुमार, बबलू कुमार, जैसे आईपीएस अफसर जिन्होनें मुजफ्फरनगर में गुड पुलिसिंग की तथा अनंत देव तिवारी और सुधीर कुमार सिंह के एनकाउन्टर दर एनकाउन्टर के बल पर क्राईम कैपिटल का कलंक मुजफ्फरनगर के माथे से मिटाने के सफल प्रयास को ये दोनो हरियाणवी आईपीएस जारी रखेगें, एक आईपीएस पांच महीने पहले से एसपी सिटी के रूप में अपराधियों को टारगेट कर उन्हे हवालात की हवा खिला रहे है, तो दूसरे आईपीएस को मुजफ्फरनगर के कप्तान की कमान सौंप कर उत्तर प्रदेश शासन ने अपराध नियंत्रण का लक्ष्य दिया है। आईये जानते है कौन है ये आईपीएस अफसर................................................ खोजी न्यूज की स्पेशल रिपोर्ट

आईपीएस अभिषेक यादव



मुजफ्फरनगर एसएसपी अभिषेक यादव 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन करने पूर्व आयकर विभाग में आयकर निरीक्षक के रूप में लगभग चार माह तक अपनी सेवाएं दी थी। आईपीएस में चयन होने के बाद उन्होंने आयकर निरीक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया था। आईपीएस अफसर अभिषेक यादव का स्पष्ट मानना है कि अगर आराम से बैठकर नौकरी करनी होती तो और तमाम विभाग हैं। पुलिस में हूं और अपराधियों से लड़ने की जिम्मेदारी मिली है। अगर हम इन्हें नहीं रोकेंगे तो कौन रोकने आएगा। हरियाणा के महेन्द्रगढ़ के निवासी अभिषेक यादव ने वर्ष 2008 में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की परीक्षा पास की थी। फिल्में देखना, किताबें पढ़ना उनका मुख्य शौक है, वे लिटरेरी सोसाइटी के मुख्य समन्वयक भी रह चुके हैं। इनके पिता का नाम एमएस यादव है। आगरा के एसपी जीआरपी पद से स्थानान्तरित होकर जनपद में बतौर एसएसपी आये अभिषेक यादव ने अग्रेंजी माध्यम से शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फरवरी 2009 से जून 2009 तक लगभग पांच माह एसोसिएट साॅफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में एऑन हैवीट् कम्पनी में कार्य किया, इसके बाद व इलाहाबाद बैंक में बतौर प्रोबेशन अधिकारी जुलाई 2009 से जून 2010 तक लगभग एक वर्ष कार्य किया। इसके बाद अभिषेक यादव इंकहार्ट स्टूडियो के संस्थापक निदेशक (फाउण्डर डायरेक्टर) भी रहे। एसएसपी अभिषेक यादव ने दिसम्बर 2012 से जून 2014 तक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय एकेडमी एडमिनिस्ट्रेशन से बतौर आईपीएस प्रोबेशनर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे पूर्व के.के. पाॅल के पैनल ने उनका साक्षात्कार लिया था, उनके 4 सदस्यीय साक्षात्कार पैनल में दो पुरूष व दो महिलाएं विषय विशेषज्ञ शामिल थी। उन्हें पहली नियुक्ति बतौर एएसपी बुलन्दशहर में नियुक्ति प्राप्त हुई। इसके बाद वे जनवरी 2016 से दिसम्बर 2016 तक नोएडा में एसपी देहात के पद पर तैनात रहे। ग्रेटर नोएडा में तैनाती के वक्त अभिषेक यादव काफी लोकप्रिय हुए थे। आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल की खनन माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को बतौर प्रशिक्षु आईपीएस अभिषेक यादव ने आगे बढ़ाया था। इन्होंने अपने हौंसले से बड़ी कामयाबी हासिल की थी। ट्रेनी आईपीएस अफसर अभिषेक यादव डंपर में बैठकर माफियाओं के करीब पहुंच गए थे और तीन लोगों को दबोच भी लिया था। इस दौरान अवैध खनन करने वालों की तरफ से पुलिस पर फायरिंग भी की गई थी। उन्होंने 10 डंपर और एक पोपलेन मशीन को जब्त किया था।



इसके बाद वे मुरादाबाद में दिसम्बर 2016 से मार्च 2017 तक एसपी सिटी रहे। उन्हें स्वतंत्र रूप में जनपद मऊ की कमान अप्रैल 2017 में सौंपी गयी, जहां वे लगभग ढ़ाई वर्ष तक एसपी के पद पर तैनात रहे। सूत्रों की मानें तो मऊ में बतौर एसपी का पद सम्भालते ही उन्होंने थानेदारों को बुलाकर साफ कर दिया कि थानों में खाने-खिलाने की संस्कृति अब नहीं चलेगी। कोई रिपोर्ट दर्ज करने के एवज में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की शिकायत मिली तो थानेदार व मुंशी के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा था कि अस्सी प्रतिशत लोग अपनी शिकायत लेकर थानों में पहुंचते हैं। जनता को इंसाफ थाने की दहलीज पर ही मिलना चाहिए। इसमें कोई कोताही क्षम्य नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता है सिम कार्ड खोने व पासपोर्ट बनाने में पुलिस पैसे मांगती है। अभिषेक यादव ने थानेदारों को इसे बंद करने का सीधा हुक्म दिया गया था। उन्होंने कहा था कि वे निर्देश कम देते हैं और अनुपालन पर ज्यादा ध्यान देते हैं। मऊ में एसपी रहते हुए थानेदारों को सप्ताह में एक दिन छुट्टी लेने का फरमान जारी किया था बतौर पुलिस अधिकारी उनके व्यवहार में केवल सख्ती ही नहीं दिखती, वरन उनके व्यक्तित्व में मानवीयता भी झलकती है। एक पुलिस अधिकारी के रूप में अभिषेक यादव कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हैं। इनमें सनसनीखेज और जघन्य अपराध से लेकर सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था तक की समस्याएं शामिल हैं। जबकि वे व्यक्तिगत रूप से कानून और व्यवस्था की समस्याओं को सबसे चुनौतीपूर्ण मानते हैं।










आईपीएस सतपाल अंतिल

मुजफ्फरनगर में दूसरे हरियाणवी आईपीएस सतपाल अंतिल। वर्ष 2015 बैच के अधिकारी सतपाल अंतिल मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले है। आईपीएस सतपाल ने साइकोलाॅजी विषय में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की है। अंडरट्रेनिंग के दौरान उनकी आजमगढ़ में तैनाती रही। सतपाल अंतिल 26 दिसंबर 2017 को मेरठ में तैनात हुए थे। मेरठ में आईपीएस सतपाल अंतिल को केंट सीओ के साथ सीओ क्राइम और सीओ लाइन भी बनाया गया था। इस दौरान सतपाल अंतिल और उनकी टीम ने कई बड़ी घटनाओं पर काम किया और कई अपराधियों को धर दबौचा।



मेरठ में पोस्टिंग के दौरान आईपीएस सतपाल अंतिल ने गंगा नगर के कारोबारी को हनीट्रैंप में फंसाकर हत्या करने वाली वारदात का खुलासा किया था। गंगा नगर के कारोबारी राजेश अहलूवालिया का उनकी पत्नी ने अपनी सहेली के माध्यम से अपहरण कराकर हत्या कराई थी। इसके साथ साथ मेरठ के टीपी नगर थाने के पास कुछ बदमाशों ने व्यापारी हनी सपरा की गोली मारकर हत्या के बाद लूटपाट की थी। इस दौरान बदमाशों के गोली अपने ही साथी को भी लगी थी। बदमाश घायल साथी की मौत के बाद लाश को अस्पताल में फंेककर फरार हो गए थे। लालकुर्ती पुलिस ने बदमाश की मौत को एक्सीडेन्ट बता दिया था मगर आईपीएस सतपाल अंतिल को शक हुआ और वह जांच करने मोर्चरी पहुंच गए। उन्होने जब बदमाश की लाश देखी तो उसके सिर में गोली लगी थी। इसके बाद पूरे केस का खुलासा हुआ था।

मुजफ्फरनगर में सतपाल अंतिल फरवरी 2019 में एसपी सिटी के रूप में तैनात किये गये थे। अपनी पोस्टिग के बाद से ही सतपाल अंतिल ने अपराध एंव अपराधियों के खिलाफ काम करना षुरू कर दिया था। उन्होनें जहां कई बदमाषों को मुठभेड़ में पुलिस की बुलेट से घायल कराकर बडे़घर को रवाना कराया वहीं कई हत्या एंव लूट की घटनाओं, जिनका लगता था कि ये कभी वर्कआउट नही हो पायेगी, उनका खुलासा करने में सतपाल अंतिल ने विषेश भूमिका निभाई। क्राईम कंट्रोल पर महारथ रखने वाले आईपीएस सतपाल अंतिल ने नई मण्ड़ी थाना इलाके में अधिवक्ता के घर हुई लूट की घटना के खुलासे के लिए कई दिन तक नई मण्ड़ी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पर काम किया उन्हीं की मेहनत का नतीजा था कि इस लूट का खुलासा हो पाया। इसी तरह खतौली थाना क्षेत्र में गंग नहर पटरी से एक कार नहर में समा गयी थी। जिसमें तीन लोग की मौत हो गयी थी। इस घटना को सब रोड़ एक्सीडेन्ट समझ रहे थे, लेकिन ये सतपाल अंतिल ही थे जो इस घटना को एक्सीडेन्ट नही बल्कि एक साजिष मान रहे थे। फिर क्या था धुन के पक्के अफसर सतपाल अंतिल ने इस घटना पर काम करना षुरू किया और नतीजा एक मर्डर मिस्ट्री के रूप में सामने आया सतपाल अंतिल ने प्री प्लान किये गये इस हत्या कांड का खुलासा कर सबको हैरत में डाल दिया था। सतपाल अंतिल ने झूठा मुकदमा लिखाने वाले कई लोगों को जेल भेज कर पब्लिक में यह संदेष भी दे दिया कि मुजफ्फरनगर में फर्जी मुकदमों का दौर खत्म होने वाला है।

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