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एसएसपी अभिषेक यादव का अल्टीमेटम,बर्दाश्त नहीं होगी गुंडई

एसएसपी अभिषेक यादव का अल्टीमेटम,बर्दाश्त नहीं होगी गुंडई

मुज़फ्फरनगर जनपद के नवागान्तुक एसएसपी अभिषेक यादव 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। आईपीएस अधिकारी अभिषक यादव ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का पद सम्भालते ही आज पहली प्रेसवार्ता में स्पष्ट किया कि जनपद में गुंडई ओर संगठित अपराध बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन करने पूर्व आयकर विभाग में आयकर निरीक्षक के रूप में लगभग चार माह तक अपनी सेवाएं दी थी। आईपीएस अफसर अभिषेक यादव का स्पष्ट मानना है कि अगर आराम से बैठकर नौकरी करनी होती तो और तमाम विभाग हैं। पुलिस में हूं और अपराधियों से लड़ने की जिम्मेदारी मिली है। अगर हम इन्हें नहीं रोकेंगे तो कौन रोकने आएगा। आईपीएस में चयन होने के बाद उन्होंने आयकर निरीक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया था।

आगरा के एसपी जीआरपी पद से स्थानान्तरित

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ के निवासी अभिषेक यादव ने वर्ष 2008 में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की परीक्षा पास की थी। फिल्में देखना, किताबें पढ़ना उनका मुख्य शौक है, वे लिटरेरी सोसाइटी के मुख्य समन्वयक भी रह चुके हैं। इनके पिता का नाम एमएस यादव है। आगरा के एसपी जीआरपी पद से स्थानान्तरित होकर जनपद में बतौर एसएसपी आये अभिषेक यादव ने अग्रेंजी माध्यम से शिक्षा प्राप्त की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फरवरी 2009 से जून 2009 तक लगभग पांच माह एसोसिएट साॅफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में एऑन हैवीट् कम्पनी में कार्य किया, इसके बाद व इलाहाबाद बैंक में बतौर प्रोबेशन अधिकारी जुलाई 2009 से जून 2010 तक लगभग एक वर्ष कार्य किया। इसके बाद अभिषेक यादव इंकहार्ट स्टूडियो के संस्थापक निदेशक (फाउण्डर डायरेक्टर) भी रहे।

आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल की खनन माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को बतौर प्रशिक्षु आईपीएस अभिषेक यादव ने आगे बढ़ाया

एसएसपी अभिषेक यादव ने दिसम्बर 2012 से जून 2014 तक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय एकेडमी एडमिनिस्ट्रेशन से बतौर आईपीएस प्रोबेशनर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे पूर्व के.के. पाॅल के पैनल ने उनका साक्षात्कार लिया था, उनके 4 सदस्यीय साक्षात्कार पैनल में दो पुरूष व दो महिलाएं विषय विशेषज्ञ शामिल थी। उन्हें पहली नियुक्ति बतौर एएसपी बुलन्दशहर में नियुक्ति प्राप्त हुई। इसके बाद वे जनवरी 2016 से दिसम्बर 2016 तक नोएडा में एसपी देहात के पद पर तैनात रहे। ग्रेटर नोएडा में तैनाती के वक्त अभिषेक यादव काफी लोकप्रिय हुए थे। आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल की खनन माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाई को बतौर प्रशिक्षु आईपीएस अभिषेक यादव ने आगे बढ़ाया था। इन्होंने अपने हौंसले से बड़ी कामयाबी हासिल की थी। ट्रेनी आईपीएस अफसर अभिषेक यादव डंपर में बैठकर माफियाओं के करीब पहुंच गए थे और तीन लोगों को दबोच भी लिया था। इस दौरान अवैध खनन करने वालों की तरफ से पुलिस पर फायिरग भी की गई थी। उन्होंने 10 डंपर और एक पोपलेन मशीन को जब्त किया था।

थानों में खाने-खिलाने की संस्कृति अब नहीं चलेगी

इसके बाद वे मुरादाबाद में दिसम्बर 2016 से मार्च 2017 तक एसपी सिटी रहे। उन्हें स्वतंत्र रूप में जनपद मऊ की कमान अप्रैल 2017 में सौंपी गयी, जहां वे लगभग ढ़ाई वर्ष तक एसपी के पद पर तैनात रहे। सूत्रों की मानें तो मऊ में बतौर एसपी का पद सम्भालते ही उन्होंने थानेदारों को बुलाकर साफ कर दिया कि थानों में खाने-खिलाने की संस्कृति अब नहीं चलेगी। कोई रिपोर्ट दर्ज करने के एवज में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की शिकायत मिली तो थानेदार व मुंशी के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा था कि अस्सी प्रतिशत लोग अपनी शिकायत लेकर थानों में पहुंचते हैं। जनता को इंसाफ थाने की दहलीज पर ही मिलना चाहिए। इसमें कोई कोताही क्षम्य नहीं होगी। उन्हांेने कहा था कि उन्हें पता है सिम कार्ड खोने व पासपोर्ट बनाने में पुलिस पैसे मांगती है। अभिषेक यादव ने थानेदारों को इसे बंद करने का सीधा हुक्म दिया गया था। उन्होंने कहा था कि वे निर्देश कम देते हैं और अनुपालन पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

मऊ में एसपी रहते हुए थानेदारों को सप्ताह में एक दिन छुट्टी लेने का फरमान जारी किया था

बतौर पुलिस अधिकारी उनके व्यवहार में केवल सख्ती ही नहीं दिखती, वरन उनके व्यक्तित्व में मानवीयता भी झलकती है। उन्होंने में मऊ में एसपी रहते हुए थानेदारों को सप्ताह में एक दिन छुट्टी लेने का फरमान जारी कर दिया था। उनका मानना है कि छुट्टी लेकर व परिवार में समय देकर ही थानेदारों को ऊर्जावान और सक्रिय रखा जा सकता है। जब वे सक्रिय रहेंगे तभी अपराध और अपराधियों पर नकेल कसी जा सकेगी।

शिक्षा क्षेत्र एक स्वतंत्र थिंक टैंक है जो शिक्षा नीति में पारंपरिक सोच को चुनौती देता है

शिक्षा के सम्बन्ध में युवा आईपीएस अफसर अभिषेक यादव का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र एक स्वतंत्र थिंक टैंक है जो शिक्षा नीति में पारंपरिक सोच को चुनौती देता है। हम एक गैर-लाभकारी, गैर-सहयोगी संगठन हैं, जो शिक्षा नीति में मापनीय प्रभाव को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो मौजूदा सुधार पहलों में सुधार करके और हमारे देश की सबसे अधिक दबाव वाली शिक्षा समस्याओं के लिए नए, नए समाधान विकसित करके है।

एक पुलिस अधिकारी के रूप में अभिषेक यादव कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हैं। इनमें सनसनीखेज और जघन्य अपराध से लेकर सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था तक की समस्याएं शामिल हैं। जबकि वे व्यक्तिगत रूप से कानून और व्यवस्था की समस्याओं को सबसे चुनौतीपूर्ण मानते हैं।

पत्रकारवार्ता के दौरान एसपी सिटी सतपाल अंतिल, सीओ सिटी हरीश भदौरिया, सीओ मंडी योगेन्द्र सिंह, सीओ खतौली आशीष प्रताप सिंह समेत जनपद के सभी थानों के थानाध्यक्ष आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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