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पराली बनी पोषक तत्व

पराली बनी पोषक तत्व

नई दिल्ली। भारत कृषि प्रधान देश हैं। वैज्ञानिक युग में खेती-किसानी का ढंग भी बदला है। इसमें कुछ सुधार की जरूरत भी पड़ रही है। आधुनिक मशीनों से अब फसलों की कटाई-मड़ाई हो जाती है। इससे खेत में फसलों के अवशेष (पराली) खड़ी रह जाती थी। इस पराली को जला दिया जाता था। इससे प्रदूषण फैलता था। दिल्ली ने तो इसका सबसे ज्यादा कुप्रभाव झेला है। सांस लेना दूभर हो जाता था। लाॅकडाउन के समय काफी सुधार हुआ था लेकिन लम्बे समय तक लाॅकडाउन नहीं किया जा सकता। अनलाॅक का समय शुरू हुआ तो दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण बढ़ने लगा। अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने इस प्रदूषण से निपटने का अच्छा तरीका निकाला है। उन्होंने पराली पर छिड़कने वाला केमिकल तैयार करवाया। इसके छिड़काव से प्रदूषण फैलाने वाली पराली अब पेषक तत्व बनने वाली है। किसानों को इस प्रक्रिया से अपने-अपने खेतों के पराली को खाद में बदलने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए।

दिल्ली में नरेला के हिरनकी गांव में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान(पूसा इंस्टीट्यूट) द्वारा तैयार बायो डिकम्पोजर का छिड़काव शुरू हुआ। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने पूसा इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के साथ बायो डिकम्पोजर के छिड़काव की शुरुआत की। हिरनकी गांव के 1 हेक्टेयर (ढाई एकड़) धान के खेत में 500 लीटर बायो डिकम्पोजर का छिड़काव किया गया। एक हेक्टेयर खेत मे में छिड़काव के लिए 25 लीटर बायो डिकम्पोजर के साथ 475 लीटर पानी मिलाया जाता है। दिल्ली में अबतक डेढ़ हजार एकड़ पर छिड़काव के लिए किसानों की अनुमति मिल गयी है। इस मौके पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पराली जलाने की समस्या से निजात पाने के लिए पूसा इंस्टिट्यूट ने घोल बनाने का तरीका निकाला है। आज से 10 दिन पहले ये प्रक्रिया शुरू हुई थी। आज घोल बनकर तैयार हो गया है। दिल्ली में लगभग 700-800 हेक्टेयर जमीन है, जहां नॉन बासमती धान उगाई जाती है। वहां पराली होती है, जिसे कई बार जलाना पड़ता था। अब ये घोल छिड़का जाएगा और 20-25 दिन के अंदर ये सारी पराली खाद में तब्दील हो जाएगी। सारा इंतजाम हो गया है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि इसका फायदा होगा। अभी तक किसान पराली को जलाया करते थे, जलाने से जमीन में जो उपयोगी बैक्टेरिया होते थे, वो भी मर जाया करते थे। अब इनको खाद भी कम इस्तेमाल करनी होगी और जमीन की उर्वरता बढ़ेगी और पैदावार भी बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे चिंता इस बात की है कि आस-पास के राज्यों में फिर से पराली जलाने का काम शुरू हो गया है, जिसकी वजह से धुआं धीरे-धीरे दिल्ली पहुंचने लगा है। पिछले 10 महीने से दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण में थे, लेकिन अब फिर पॉल्युशन बढ़ने लगा है। मुझे चिंता दिल्ली के लोगों की है, पंजाब और हरियाणा के लोगों की है। पराली को खाद में बदलने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने 20 रूपए की कीमत वाली 4 कैप्सूल का एक पैकेट तैयार किया है। प्रधान वैज्ञानिक युद्धवीर सिंह ने बताया कि 4 कैप्सूल से छिड़काव के लिए 25 लीटर घोल बनाया जा सकता है और 1 हेक्टेयर में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। सबसे पहले 5 लीटर पानी में 100 ग्राम गुड़ उबालना है और ठंडा होने के बाद घोल में 50 ग्राम बेसन मिलाकर कैप्सूल घोलना है।

इसके बाद घोल को 10 दिन तक एक अंधेरे कमरे में रखना होगा, जिसके बाद पराली पर छिड़काव के लिए पदार्थ तैयार हो जाता है। इस घोल को जब पराली पर छिड़का जाता है तो 15 से 20 दिन के अंदर पराली गलनी शुरू हो जाती है और किसान अगली फसल की बुवाई आसानी से कर सकता है। आगे चलकर यह पराली पूरी तरह गलकर खाद में बदल जाती है और खेती में फायदा देती है। अनुसंधान के वैज्ञानिकों के मुताबिक, किसी भी कटाई के बाद ही छिड़काव किया जा सकता है। इस कैप्सूल से हर तरह की फसल की पराली खाद में बदल जाती है और अगली फसल में कोई दिक्कत भी नहीं आती है। कैप्सूल बनाने वाले वैज्ञानिकों ने पर्याप्त कैप्सूल के स्टॉक होने का दावा किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पराली जलाने से मिट्टी के पौषक तत्व भी जल जाते हैं और इसका असर फसल पर होता है। युद्धवीर सिंह ने कहा कि ये कैप्सूल भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा बनाया गया है। ये कैप्सूल 5 जीवाणुओं से मिलाकर बनाया गया है, जो खाद बनाने की रफ्तार को तेज करता है।

अनलाॅक पीरियड में दिल्ली की हवा की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडैक्स) 332 तक चला गया है। स्थानीय लोगों की मानें तो आंखों में जलन होने लगी है। अनुमान है कि दिल्ली की हवा अभी और खराब स्थिति में पहुंच सकती है।

गत 12 अक्टूबर की सुबह 10 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडैक्स 240 पर था। इससे पहले रविवार और शनिवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) क्रमशः 216 और 221 था। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि दिल्ली की हवा दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक सुबह दिल्ली-एनसीआर में पीएम-10 का स्तर 332 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा जो इस मौसम में अब तक का अधिकतम है। भारत में पीएम-10 का स्तर जब 100 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से कम रहता है तो उसे सुरक्षित माना जाता है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता 29 जून के बाद से पहली बार 07 अक्टूबर 2020 को खराब हुई थी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तब 24 घंटे के दौरान एक्यूआई 215 दर्ज की थी।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार की निष्क्रियता का नुकसान पूरे देश को प्रभावित कर रहा है। उनका कहना है कि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार कई प्रयास कर रही है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आखिरी के 3 महीने होते हैं, तब सबका कंसर्न जागता है। दिल्ली सरकार लगातार काम कर रही है कि दिल्ली के पॉल्युशन को कैसे कम किया जाए। पॉल्युशन और पराली सिर्फ दिल्ली की समस्या नहीं है, ये पूरे उत्तर भारत की समस्या है। बहरहाल, दिल्ली सरकार का प्रयास सराहनीय है। ((अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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