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मदरसों को सरकारी स्कूल का रूप

मदरसों को सरकारी स्कूल का रूप

असम। पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में सर्वानंद सोनोवाल की सरकार ने मदरसों को बंद करने का फैसला किया। राज्य में चल रहे सभी मदरसों को अब सरकारी स्कूलों में बदल दिया जाएगा। वहां के वित्तमंत्री हेमंत विस्वा सरमा राज्य के शिक्षा मंत्री का दायित्व भी संभाले हैं। हालांकि ये मदरसे भी सरकारी ही थे और सरकार से हर तरह से मदद मिलती थी लेकिन मदरसों में धार्मिक शिक्षा दी जा रही थी। मदरसों में अन्य विषय भी पढ़ाए जाते हैं लेकिन मुख्य रूप से अरबी भाषा और कुरआन की शिक्षा ही दी जाती है। वित्त मंत्री एवं शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा कहते हैं कि धार्मिक शिक्षा देना सरकार का काम नहीं है, इसलिए सरकार इन मदरसों को सरकारी स्कूल का नाम देगी और समान रूप से सभी विषय पढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य का ध्यान रखा जाएगा। सरमा ने राज्य में बढ़ते लव जेहाद के मामलों पर भी चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम लड़के फेसबुक पर अपना फर्जी एकाउंट बनाते हैं। वे अपना हिन्दू नाम रखकर किसी मंदिर से सेल्फी लेते हैं। इसके बाद उनका प्रयास होता है कि किसी हिन्दू लड़की से शादी कर ली जाए। शादी कर लेने के बाद सच्चाई सामने आती है। हेमंत विस्वा सरमा कहते हैं कि अब राज्य सरकार इस मामले में सख्ती बरतेगी। वे कहते हैं कि लवजिहाद के पीछे भी मदरसों की बड़ी भूमिका रहती है। इसलिए समस्या की जड़ पर प्रहार करना जरूरी है। लवजेहाद और मदरसों में धर्म की शिक्षा को लेकर कई अन्य राज्यों में भी सवाल उठ रहे हैं। असम में मदरसों को सरकारी स्कूल बनाकर सुधारा जा सका तो यह बहुत बड़ा शैक्षिक सुधार साबित हो सकता है।

कुछ लोग इसे राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं कि असम सरकार ने सरकारी मदरसों को बंद करने का फैसला क्यों किया है। वित्त और शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी मदरसों को स्कूल में बदल दिया जाएगा और कुछ मामलों में टीचर्स को सरकारी स्कूल में शिफ्ट करके मदरसा बंद किया जाएगा। मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हमने मदरसों को बंद कर दिया है क्योंकि धार्मिक शिक्षा देना हमारा काम नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य का ध्यान रखा जाएगा। इन मदरसों से अतिरिक्त धार्मिक विषयों के साथ-साथ अरबी को हटाकर सामान्य स्कूलों में बदल दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करेगी क्योंकि यह उनके उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता है। उन्होंने (कांग्रेस) धार्मिक पढ़ाई में सरकारी धन खर्च किया है। संस्कृत टोल्स भी बंद कर दिए गए हैं। यह केवल मदरसा नहीं है। सरकारी पैसों पर सिर्फ कुरान को नहीं पढ़ाया जा सकता है, अगर ऐसा होता है तो बाइबिल और गीता को भी पढ़ाना चाहिए। लव जिहाद पर मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कई मुस्लिम लड़के फेसबुक पर नकली अकाउंट बनाते हैं और हिंदू नाम लिखकर मंदिरों से अपनी तस्वीरें डालते हैं। फिर जब किसी हिंदू लड़की से शादी होती है। तब सच्चाई सामने आती है और साम्प्रदायिक झगड़े की नौबत आ जाती है। राज्य सरकार में वित्त और शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्वा ने यह फैसला बहुत सोच समझकर किया है।

हेमंत बिस्वा सरमा कहते हैं कि अगले पांच साल इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कोई भी शादी जबरदस्ती न हो। हम ऐसी किसी भी शादी के खिलाफ हैं जो धोखेबाजी से की गई हो। राज्य में करीब 600 से अधिक ऐसे मदरसे हैं जो पूरी तरह से सरकार द्वारा ही चलाए जाते हैं।

मदरसों में कई अनियमितताएं हैं। दक्षिण पूर्व दिल्ली में दारूल-उल-उलूम उस्मानिया मदरसा चलाने वाले अब्दुल हफीज ने दावा किया कि वहां मौजूद बच्चों की असल संख्या को पुलिस से छुपाकर रखा गया है। हफीज ने कहा- "पुलिस" को कोई भनक नहीं है। उन्होंने कबूल किया कि बच्चों की संख्या सिर्फ 2 से 3 बतायी गयी, असल में मदरसे के अंदर दर्जन के करीब बच्चे भरे हुए हैं। दिल्ली के साथ ही लगते मदनपुर खादर एक्सटेंशन में इसाहुल मुमिनीन मदरसा में छोटी सी जगह में 18 बच्चे हैं। यहां सोशल डिस्टेंसिंग या सैनेटाइजेशन किसे कहते हैं, किसी को नहीं पता। मदरसा प्रमुख मोहम्मद जाबिर कासमी का दावा है कि पुलिस को घूस देकर यहां बच्चों की असल संख्या की जानकारी बाहर नहीं आने दी जाती। कासमी ने कहा, "अभी 18 बच्चे यहां हैं। 6 से 7 बच्चों को और पड़ोस में छुपा कर रखा गया है। पुलिस बच्चों को यहां से ले जाकर टेस्ट करा सकती थी।

मदरसा ऑपरेटर ने कबूल किया कि वो निजामुद्दीन जमात में कई बार जा चुका है। बता दें कि निजामुद्दीन जमात से ही देश भर में कोविड-19 के कई कलस्टर्स बने थे।

उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा भी उन इलाकों में शामिल हैं जिन्हें लॉकडाउन के दौरान सख्त निगरानी जोन्स में रखा गया है। यहां जामिया मोहम्मदिया हलदोनी मदरसे को खचाखच भरा देखा गया। मदरसा ऑपरेटर मुफ्ती मोहम्मद शाईक कुरेशी के मुताबिक बच्चो को सुरक्षित जगह ले जाने में सरकार की मदद नहीं ली गई। कुरैशी ने कहा, "ऐसा करते तो बहुत सी दिक्कतें पेश आतीं। हमने देखा कि किस तरह लौटने वाले प्रवासियों के लिए मेडिकल चेकअप और 15 दिन (14 दिन) के आइसोलेशन में रहना जरूरी था। ये लोग बिहार से हैं। ये गरीब इलाकों से आते हैं। उनके बच्चे वहां के साथ-साथ यहां भी महफूज हैं। अभी तक अल्लाह की मेहरबानी से यहां कोई दिक्कत नहीं है।"

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के नाम पर ww-upbme-org नाम की फर्जी वेबसाइट बनाने का मामला भी सामने आया है जिसके आरोपी को यूपी एसटीएफ ने देश की राजधानी दिल्ली के जामिया नगर से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक आरोपी काफी शातिर दिमाग का था। आरोपी के जरिए उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के नाम पर www-upbme-org फर्जी वेबसाइट बनाकर बैकएंड पर कोडिंग की गई थी। जिससे आरोपी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की वेबसाइट समझ कर वेबसाइट पर विजिट करने वाले यूजर के जरिए लिंक को क्लिक करने पर YouTube पर बनाये गए Ishanllb नामक चैनल को सब्सक्राइब करवाता था।

वरिष्ठ सहायक, मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से थाना हजरतगंज में दर्ज मामले के तहत आरोपी पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और सूचना प्रोद्यौगिकी अधिनियम 2008 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की कार्रवाई में सामने आया कि वर्तमान में madarsaboard-upsdc-gov-in उत्तर प्रदेश सरकार का अधिकृत पोर्टल है लेकिन www-upbme-org नामक फर्जी वेबसाइट उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के नाम से चल रही थी। इस फर्जी वेबसाइट में मदरसे की आधिकारिक वेबसाइट से कई सूचनाओं को डाउनलोड कर अपलोड की गई थी। यूपी एसटीएफ के जरिए इस मामले में दिल्ली से मो. ईशा राही नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक बैंक स्टेटमेंट से पता चला है कि ईशा के बैंक खाते में अप्रैल 2018 से अब तक कुल 69 लाख रुपये आये है।

इस प्रकार मदरसों के नाम पर गलत काम किये जा रहे हैं। असम सरकार ने मदरसों को बंद कर उन्हंे सरकारी स्कूल मंे तब्दील कर अच्छा काम किया है। (अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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