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उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के अन्तर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को गति प्रदान करते हुए इन उद्योगो को प्रोत्साहित किया जाये: जिलाधिकारी

उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के अन्तर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को गति प्रदान करते हुए इन उद्योगो को प्रोत्साहित किया जाये: जिलाधिकारी

मुजफ्फरनगर: जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी ने कहा कि उद्यमियों से चर्चा एवं सुझाव प्राप्त करके ही नयी औद्योगिक नीति बनायी गयी है। उन्हेाने कहा कि उद्यमी नयी औद्यागिक नीति 2017 का अध्ययन करले कि वो किस प्रकार इसका लाभ उठा सकते है। उन्होने कहा कि उनके जो भी प्रश्न है उनका समाधान भी कार्यशाला मंे उपस्थित पूर्व संयुक्त आयुक्त उद्योग एवं जीएमआईडीसी से कराये। उन्होने कहा कि दो बडे औद्योगिक आस्थान खोलने की योजना है और उसके लिए 500-500 एकल भूमि का एरिया चिन्हित भी कर लिया गया है। उन्होने कहा कि मेरठ की तर्ज पर आईटी पार्क जनपद में भी बनाया जा सकता है। उन्होने तीस लाख से नीचे की परचेजिंग जैम पोर्टल के माध्यम से करने तथा जैम पोर्टल पर उद्यमियों को रजिस्ट्रेशन कराने का मशविरा भी दिया।
उन्होने कहा कि उद्यमियो की मदद के लिए और उन्हें कुशल कार्य कर उपलब्ध कराने के लिए कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत प्रशिक्षित, प्रशिक्षु उपलब्ध है। उन्होने कहा कि उद्यमी हमें अपने आवश्यकता बताये कि उन्हें किस टेªड में कितने प्रशिक्षित कार्मिक चाहिए। उन्होने कहा कि नये उद्यमियों के लिए भी अनेको येाजनाएं है। उन्होने बताया कि पीएमईजीपी योजना में 25 लाख रूपयंे तक का ऋण दिया जा रहा है। उन्होने मुजफरनगर के औद्योगिक इतिहास पर किताब लिखे जाने के भी निर्देश जीएमडीआईसी को दिये। जिलाधिकारी ने कहा कि आज यहां चैम्बर आॅफ कामर्स एण्ड इण्ड्रस्टी हाॅल औद्योगिक आस्थान में नयी औ़द्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के सम्बन्ध में आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होने कहा कि उद्यमियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करायी जा रही है और सुरक्षा का माहौल दिया गया है। उन्होने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रेडीमेंट गारमेंट के काफी उद्योग है उन्हे एकत्रित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होने बताया कि तीन माह में कानून व्यवस्था की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है। उन्होने बताया कि प्लाईवुड हब के रूप में विकसित करने के रूप में उन्होने जीएमडीआईसी को निर्देश दिये है कि इस सम्बन्ध में भी व्यापारियों से चर्चा करे। जिलाधिकारी नेे कहा कि उ0प्र0 सरकार द्वारा उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 लागू की गयी है। उन्होने बताया कि इस नीति के अनुक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को गति प्रदान करते हुए इन उद्योगो को प्रोत्साहित करने एव इस क्षेत्र में अधिक से अधिक रोजगार सृजित किये जाने तथा प्रदेश में पूंजी निवेश को आकर्षित करने हेतु उ0प्र0 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम प्रोत्साहन नीति 2017 बनायी गयी है। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का महत्वपूर्ण योगदान है। यह क्षेत्र पूंजी निवेश, उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से उत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम ईकाइयांें की संख्या की दृष्टि से (लगभग 46 लाख 8 प्रतिशत) उ0प्र0 का देश में प्रथम स्थान है तथा रोजगार प्रदान करने में इस क्षेत्र का कृषि क्षेत्र के बाद दूसरा स्थान है। इस क्षेत्र का प्रदेश में होने वाले निर्यात में भी महत्वपूर्ण येागदान है। हस्तशिल्प, प्रसंस्कृत खा़द्य उत्पाद, इंजीनियंरिंग गुड्स, कारपेट, रेडीमेड गारमेंट्स के निर्यात मंे उ0प्र0 निरंतर अग्रणी रहा है। देश के समस्त निर्यात में उ0प्र0 की हिस्सेदारी 4.73 प्रतिशत है। प्रदेश में उद्यमिता, स्वरोजगार एवं रोजगार प्रदान करने तथा औद्योगिक विकास एवं प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि में इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान को दृष्टिगत रखते हुए सरकार द्वारा इस क्षेत्र की इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन देने हेतु नीति को क्रियान्वित करने का निश्चय किया गया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की अधिकाधिक नवीन इकाइयों की स्थापना के लिए उ0प्र0 की पूंजी निवेश के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक क्षेत्र के रूप में स्थापना, परिणामस्वरूप 15 प्रतिशत वार्षिक विकास दर है। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में विद्यमान उद्योग विभाग के औद्योगिक आस्थान एवं विभिन्न एवं औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के औद्योगिक क्षेत्रो में रिक्त भूमि के तथा बंद हेा गई इकाईयों की भूमि के इच्छुक उद्यमियों को आवंटन के लिए पूर्ण पारदर्शी व्यवस्था का सृजन किया जायेगा। जिलाधिकारी ने बताया कि उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2017 के अनुरूप प्रदेश में स्थापित हेाने वाले नये सूक्ष्म एवं लघु उद्योगो के लिए भी आवश्यक विभिन्न स्वीकृतियों, अनापत्तियों तथा सहमतियों हेतु स्वतः प्रमाणन की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य में अधिकतम निवेश आकर्षित करने एवं अन्य प्रदेशों के सापेक्ष प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाये रखने के लिए उ0प्र0 सरकार कुछ नियम एवं शर्ताे के अधीन छूट अनुदान एवं वित्तीय सुविधाएं प्रदान करेगी। उन्होने बताया कि विशेषज्ञों को तैयार किये गये प्रोजेक्ट रिपोर्ट के सापेक्ष उनका वित्त पोषण होने की दशा में ऋण राशि के 2 प्रतिशत के शुल्क अथवा वास्तविक, जो कम हो अधिकतक 1 लाख रूपयें सामान्य और 1.50 लाख महिला अथवा अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियो हेमु भुगतान विभाग द्वारा वहन किया जायेगा। जिलाधिकारी ने बताया कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगो के एिल 2 करोड तक के कोलेटरल फ्री ऋण हेतु बैंकों द्वारा क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फाॅर स्माल इंटरप्राइजेज के लिए जाने वाले वन टाइम गारण्टी फीस तथा वार्षिक सेवा शुल्क का भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा बजट प्राविधान कराते हुए वहन किया जायेगा। इस अवसर पर पूर्व संयुक्त आयुक्त उद्योग, जीएमडीआईसी एवं उद्योग एसोसिएशन के पदाधिकारी गण तथा बडी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।

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