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अमित शाह का युवा उद्घोष और मिशन-2019

अमित शाह का युवा उद्घोष और मिशन-2019

इसमें कोई संदेह नहीं कि युवा अपने समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उनसे आगे की पीढ़ी ने अच्छा-बुरा जो भी किया, कर चुकी है तो उस पर मीन-मेख निकालने से समय ही बर्बाद होगा। उनका मार्ग दर्शन तो लिया जा सकता है क्योंकि अनुभव व्यावहारिक ज्ञान पर ही आश्रित रहता है। युवाओं को इस अनुभव का लाभ उठाना चाहिए। इसके अलावा युवाओं से छोटी उम्र की जो पीढ़ी है, वह युवाओं की तरफ ही देखती है। उनकी गतिविधियों से उसे प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार सबसे बड़ा दायित्व युवा पीढ़ी पर है और भारत में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने गत दिनों उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में युवा उद्घोष कार्यक्रम के जरिए मिशन-2019 की शुरुआत की। उनके साथ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे जो स्वयं युवा हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहते हैं। भाजपा पूरे देश में युवा उद्घोष कार्यक्रम चला रही है जिसका मकसद युवाओं को सामाजिक क्षेत्र में बढ़ चढ़कर भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।
अमित शाह ने गत 20 जनवरी को काशी विद्यापीठ मैदान में भाजपा की ओर से आयोजित युवा उद्घोष कार्यक्रम में युवाओं का आह्वान किया कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा के साथ जुड़ें और देश के विकास में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक पार्टी ही नहीं, एक विचारधारा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का निर्माण तेजी से हो रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। जाति और धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों के दिन अब लद गये हैं। श्री शाह ने उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की और कहा कि कानून-व्यवस्था के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नम्बर पर आ गया है। यह प्रदेश 2022 तक शीर्ष राज्यों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश बदल रहा है। मुद्रा बैंक, स्किल डेवलपमेंट और स्टार्ट अप योजना के जरिए युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर खोले जा रहे हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं कि अमित शाह ने युवा उद्घोष में राजनीतिक पक्ष को प्रमुखता दी है और अपनी पार्टी से जुड़ने के लिए युवाओं से आग्रह भी किया है। यह उनका राजनीतिक धर्म भी है क्योंकि पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते भाजपा को मजबूत बनाना उनका दायित्व है। पार्टी की मजबूती के लिए युवाओं की सहभागिता जरूरी है। उत्तर प्रदेश में युवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उदाहरण सबके सामने है और कई अन्य युवा नेताओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। युवाओं को सिर्फ सक्रिय राजनीति से जोड़ना ही पर्याप्त नहीं होगा। इस बात को योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट भी किया है। उन्होंने कहा कि यूपी के युवाओं मंे बड़ी ऊर्जा है। इस ऊर्जा का उपयोग अब यूपी में ही होगा- ऐसी व्यवस्था सरकार करने जा रही है। सरकार ने नौकरियों का पिटारा खोल दिया है। सरकार आने वाले दिनों में लाखो युवाओं को नोकरी देगी। मुख्यमंत्री योगी ने आंकड़ों के साथ बताया कि किस विभाग में कितने पद खाली हैं, जिनके लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रशिक्षित 1.40 लाख युवाओं को नौकरी दी जा चुकी है। इसके तहत 6 लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण हुआ था जिनमे साढ़े चार लाख युवाओं का प्रशिक्षण चल रहा है। इसी प्रकार शिक्षा विभाग में एक लाख 37 हजार शिक्षकों के रिक्त पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पुलिस विभाग में भी एक लाख 62 हजार पद रिक्त हैं। इनमे पांच हजार पुलिस इंस्पेक्टर और 40 हजार सिपाहियों की भर्ती भी शीघ्र की जाएगी।
बेरोजगारी की समस्या पूरे देश में है और इसको लेकर युवाओं में आक्रोश भी है। युवा मानते हैं कि इसके लिए सरकार उदासीन रहती है। इसीलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को नौकरी और रोजगार देने पर विशेष जोर दिया है और कई स्तर पर इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। लखनऊ मंे उद्यमियों का सम्मेलन भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी है। उद्यमी पूंजीनिवेश करके उद्योग लगाएंगे तो लोगों को रोजगार भी मिलेगा। सरकारी स्तर पर प्रयास हो रहे हैं, उनके बारे में योगी ने बताया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से एक लाख 25 हजार युवाओं को विभिन्न विभागों में सरकारी नौकरियां दी जाएंगी। इस हिसाब से अगले तीन साल में साढ़े पांच लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी और गैर सरकारी क्षेत्र में भी लगभग इतने ही युवाओं को नौकरी मिल सकेगी। स्वरोजगार से भी लाखों युवाओं को रोजी-रोटी का साधन मिला है। प्रदेश मंे बेरोजगारी का आलम यह है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय सफाईकर्मी के 100 पदों पर भर्ती के लिए 20 हजार आवेदन आये थे और इनमंे कुछ अभ्यर्थी पोस्ट गे्रेजुएट शिक्षा प्राप्त थे। दो वर्ष पहले भारत में 12 करोड़ युवा बेरोजगार थे और अब 15 करोड़ से ऊपर हो चुके होंगे। युवा तबके में बढ़ती बेरोजगारी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
उत्तर प्रदेश की करीब 21 करोड़ की आबादी में एक करोड़ 32 लाख युवा बेरोजगार हैं। दो साल पहले ही इस प्रकार के आंकड़े मिले थे। उस समय प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी। सफाईकर्मी के लिए जब पीएचडी और एमबीए डिग्रीधारी आवेदन कर रहे थे तो युवाओं की मानसिक कुंठा का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए युवाओं को तनाव से निकालने की जरूरत है। कितने ही युवाओं में आरक्षण को लेकर भी तनाव है। उन्हें लगता है कि उनकी प्रतिभा के साथ भेदभाव किया जाता है। इसी प्रकार नौकरी में भ्रष्टाचार से भी युवा तनाव में हैं। उनका पिछला अनुभव यही रहा है कि सरकारी नौकरी बगैर रिश्वत के नहीं मिलती है। भाजपा की अब केन्द्र के अलावा 19 राज्यों में भी सरकार है। उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है और अमित शाह ने वाराणसी में युवा जय घोष किया है तो युवाओं के मन से सरकारी नौकरी में रिश्वत का तनाव पूरी तरह खत्म करना पड़ेगा। इस प्रकार युवा भले ही भाजपा के सदस्य न बनें लेकिन वे जहां भी काम करेंगे, भाजपा का ही समर्थन करेंगे।
राजनीति के अलावा भी युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम जय प्रकाश नारायण के युवा आंदोलन की याद करते हैं जिन्होंने आपातकाल के समय कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन किया था लेकिन सामाजिक कुरीतियों को बदलने मंे भी युवा ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर में अभी युवाओं ने नदी पर मानव श्रृंखला बनाकर बाल विवाह और दहेज उन्मूलन का संकल्प लिया है। सामाजिक कुप्रथा दहेज और बाल विवाह के खिलाफ पूरे बिहार मंे जागरूकता पैदा करने के लिए युवाओं ने सबसे लम्बी मानव श्रृंखला बनायी। ठंड की परवाह किये बगैर करोड़ों की संख्या में युवाओं ने दहेज प्रथा और बाल विवाह प्रथा के उन्मूलन का संकल्प लिया। बिहार में पिछले वर्ष 21 जनवरी को भी शराबबंदी और नशाबंदी के विरोध मंे 12147 किमी. की मानव श्रृंखला बनायी गयी थी जिसमंे तीन करोड़ 11 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। युवाओं को रचनात्मक कार्य देने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सरकार की है। उनमे अपार शक्ति है और उसका सदुपयोग नहीं होगा तो तनाव और कुंठा के चलते वही शक्ति विध्वंस में लग जाती है। इसलिए अमित शाह और उनकी पार्टी भाजपा को यह ध्यान रखना होगा कि युवा जयघोष तब तक पूरा नहीं होगा जब तक युवाओं के लिए समुचित कार्य नहीं मिलेगा। युवा रोजगार करें, खेती करें या सरकारी-गैर सरकारी नौकरी, तभी वे देश और समाज को ऊपर उठा सकेंगे।

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