पेरिस समझौते को विश्व द्वारा सच्ची भावना से स्वीकार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी

पेरिस समझौते को विश्व द्वारा सच्ची भावना से स्वीकार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी

नई दिल्ली । इस वर्ष 2 से 13 दिसंबर के बीच जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रुपरेखा (यूएनएफसीसी) के लिए पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी-25) की तैयारी हेतु बेसिक देशों ने ब्राजील के साओ पाउलो में 14 से 16 अगस्त तक जलवायु परिवर्तन पर अपनी 28 वीं मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की।







भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया। उन्होंने कहा कि बेसिक देशों का एक साथ आना और एक साथ विचार रखना संयुक्त राष्ट्र संघ की वार्ता का एक महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने जोर देकर कहा कि"ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन के पास दुनिया के भौगोलिक क्षेत्र का एक तिहाई हिस्सा और दुनिया की आबादी का लगभग 40% हिस्सा है और जब हम एकजुट होकर एक स्वर में बोलते हैं तो यह हमारे दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।" उन्होंने कहा कि पेरिस समझौते को विश्व द्वारा सच्ची भावना से स्वीकार कराने में बेसिक देशों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।



प्रकाश जावड़ेकर ने यह भी कहा कि बेसिक देश एकजुट रहेंगे और एक सुर में बोलेंगे तथा आज जारी संयुक्त बयान में उन सभी मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है जो आज प्रासंगिक हैं और दुनिया को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन और चिली में पार्टियों के अगले सम्मेलन (सीओपी 25) पर संयुक्त राष्ट्र के सत्र की पूर्व संध्या पर बेसिक देश क्या कह रहे हैं।


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