आईपीएस अजय कुमार की पाठशाला का असर , नारी सुरक्षा में अव्वल शामली

आईपीएस अजय कुमार की पाठशाला का असर , नारी सुरक्षा में अव्वल शामली

शामली। युवा और जोशीले आईपीएस अफसर अजय कुमार ने जनपद में पुलिस अधीक्षक का चार्ज लेते ही जोश के साथ होश से काम लेते हुए पहले अपराध के कारणों की तह में जाकर उनके खात्मे की रणनीति पर जैसे ही काम करना शुरू किया, वैसे ही उसके सकारात्मक रिजल्ट आना शुरू हो गये और अजय कुमार के लिए जनपदवासियों के मन में आज ''आप जैसा कोई न आया और न आयेगा'' की धारणा घर कर गयी है। महिलाओं के प्रति अपराधों की बात करें तो उनके चार्ज लेने के बाद से चेनस्नेचिंग की वारदात आश्चर्यजनक रूप से थम गयी और उनके आठ माह के उनके कार्यकाल में एक भी चेनस्नेचिंग की वारदात का न होना युवा अफसर की परिपक्व रणनीति का ही कमाल कहा जा सकता है। सेन्ट आर सी स्कूल की अध्यापिका पूनम सरोहा कहती है कि आईपीएस अजय कुमार बहुत अच्छा वर्क कर रहे है लेडी सुरक्षा के लिये भी, बुजर्गो के लिये भी, भक्तों के लिये भी। लेडीज किसी समय भी आ-जा सकती है, पहले गली से बाहर नही निकल पाते थे, सड़क पर जाते थे तो कुछ ना कुछ घटित हो ही जाता था। अब हालात में सुधार हुआ है।




इसमें महिला सशक्तिकरण के लिए चलाये गये उनके अभियान का भी बडा योगदान है। वे अब तक महिला सशक्तिकरण के तहत 40 कार्यशालाएं आयोजित कर 36000 छात्राओं को मोटिवेट कर चुके हैं, जो अपने आपमें एक रिकार्ड है। अपराध और अपराधियों के खिलाफ पुलिस अधीक्षक अजय कुमार के अभियान की बात करें तो उन्होंने महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की तह में जाकर पाया कि महिलाओं के प्रति अपराधों में महिलाओं का जागरूक न होना ही सबसे बडा कारण है। इसके लिए उन्होंने महिलाओं को जागरूक करने का बीड़ा उठाया और अब तक महिला सशक्तिकरण के लिए लगभग 40 कार्यशालाएं आयोजित कर चुके हैं। जानकारों की मानें तो पुलिस अधीक्षक ने महिला सशक्तिकरण के लिए बालिका सुरक्षा सप्ताह के तहत प्रत्येक सप्ताह एक कार्यशाला आयेाजित करने का नियम बना रखा है। इसके तहत वे स्वयं और उनकी टीम बालिका स्कूलों में जाकर कार्यशाला आयोजित करते हैं, जिसमें वे बालिकाओं को आत्मरक्षा के लिए तैयार करते हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक भी करते हैं। डेन्टल डाॅक्टर व अपराजिता टीम की सदस्या दिव्या शर्मा बताती है कि जितनी बार भी वे पुलिस अधीक्षक अजय कुमार से मिली है उतनी बार उनका माॅटीवेशन स्पीच बहुत अच्छा है। उन्होनें गर्ल्स को बहुत अच्छे से माॅटीवेट किया है और उन्हें वुमेन हेल्प लाईन व सेल्फ डिफेन्स का महत्व समझाया है, गर्ल्स को समझ भी आ रहा है कि अब पुलिस उनके साथ है।

शायद यह युवा और जोशीले अफसर की परिपक्व सोच का ही कमाल है कि उनके 8 माह के कार्यकाल में अब तक एक भी चेनस्नेचिंग की वारदात नहीं हुई है। इसके साथ ही पहले जहां आठ माह में औसतन 28 रेप होते थे, अब घटकर उनकी संख्या केवल सात पर ही सीमित हो गयी है। इसके साथ ही पहले जहां आठ माह में औसतन 12 महिलाओं की हत्या हो जाती थी, लेकिन अब उनके आठ माह के कार्यकाल में केवल एक ही बालिका की हत्या का मामला सामने आया है, जिसका उन्होंने सूझबूझ के साथ खुलासा कर दिया था और उसमें पाया गया था कि बाप ने ही किन्हीं कारणों से अपनी बेटी की हत्या कर दी थी। सोशल वर्कर और मोटीवेटर मृदुला जैन कहती है कि आईपीएस अजय कुमार पांडेय इज द बेस्ट पर्सन वे आगे कहती है कि मेरे पास शब्द नही है उनकी प्रंशसा में मै और जितना कहूं वह कम है। स्कूल में लडकियों को वे जिस तरह से मोटी वेट करते है, वह माइंड ब्लोइंग है। उनकी बोलने की क्षमता और तरीका बेहतरीन है।




समाजसेवी बीना अग्रवाल का एसपी अजय कुमार के बारे में कहना है कि उनका प्रस्तुतिकरण गजब का है। अब तक जनपद में जितने भी पुलिस अधीक्षक आये हैं, महिला सशक्तिकरण के सम्बन्ध में इतना कार्य किसी ने नहीं किया, जितना एसपी अजय कुमार ने किया है।

पुलिस अधीक्षक अजय कुमार का मानना है कि अगर बालिकाएं जागरूक होंगी तो उनके प्रति होने वाले अपराधों में स्वयं ही कमी आ जायेगी। उन्होंने खोजी न्यूज को बताया कि महिला सशक्तिकरण के तहत बालिका जागरूकता सप्ताह का आयोजन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि वे बालिकाओं को जागरूक करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक बार अगर बालिका अपनी सुरक्षा और अधिकार के प्रति जागरूक हो गयी तो पुलिस का आधा काम खुद ही कम हो जायेगा और महिलाओं के प्रति जिन अपराधों में अब तक केवल कमी ही आयी है, वे पूरी तरह से समाप्त हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि यदि वे ऐसा कर पाये तो समझेंगे कि उनका शामली का कार्यकाल सफल रहा है। बालिका सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा अपनायी गयी रणनीति का खुलासा करते हुए पुलिस अधीक्षक अजय कुमार ने बताया कि बालिकाओं की सुरक्षा के लिए उन्होंने ऐसी व्यवस्था कर रखी है कि अगर बालिकाएं अपने प्रति जागरूक हैं तो शोहदे बालिकाओं के साथ छेड़खानी करना तो दूर उनकी ओर देख भी नहीं सकते हैं, क्योंकि उन्होंने स्कूल टाईम में सुबह छः बजे से दोपहर एक बजे तक स्कूल के आसपास 100 डायल व अन्य पुलिस बल की व्यवस्था कर रखी है। इसके साथ ही कोचिंग अथवा अन्य ऐसे चौराहों या पार्क आदि के आसपास जहां छेडछाड की वारदात सम्भावित हो सकती हैं, पर भी पुलिस की प्रभावी व्यवस्था कर रखी है। एक महिला (शिक्षक, अधिवक्ता, चिकित्सक, दुकानदार) के अनुसार पुलिस अधीक्षक भले ही युवा और जोशीले तो हैं ही, साथ ही उनकी कार्यशैली व अपराध और अपराधियों के प्रति अपनायी गयी रणनीति परिपक्व व अनुभवी अफसरों को भी मात देने वाली है। उनकी मानें तो आईपीएस अजय कुमार जैसा अफसर अभी तक न तो शामली में नहीं आया था, जिसने महिलाओं के प्रति अपराध को शून्य की दहलीज पर लाकर रख दिया है।

2011 से ऐच्छिक ब्यूरो की सदस्या के रूप में काम कर रही दीपशिखा चौधरी कहती है कि अब तक जितने भी एसपी आये आईपीएस अजय कुमार पांडेय सबसे बेहतर है । वो कहती है कि अजय कुमार इतने ज्यादा आशावादी है कि जब भी आप उनसे मिलेगें आपको पाॅजिटिव ऊर्जा मिलेगी, उनकी स्पीच इतनी अच्छी है कि वे हर बात बहुत ध्यान से सुनते है, समझते है और परेशानी का निस्तारण भी करते है।






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