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मुजफ्फरनगर के बाद अब 'कासगंज' के सहारे जीतना चाहती है भाजपा : अजित सिंह

मुजफ्फरनगर के बाद अब कासगंज के सहारे जीतना चाहती है भाजपा : अजित सिंह

अजित सिंह बोले-79वां जन्मदिन मनाकर बूढ़ा मानने लगा था, मुजफ्फरनगर आकर फिर जवान हुआ

मेरी इच्छा-समाज में घुले साम्प्रदायिकता के जहर को पीकर 'नीलकंठ' बन जाऊं

मुजफ्फरनगर : राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष चौ. अजित सिंह ने जनपद में अपने प्रवास के दूसरे दिन भी हिन्दू मुस्लिम साम्प्रदायिक गठजोड़ को मजबूती देने के लिए डाक बंगले पर दरबार सजाये रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका पहला मकसद भाजपा को जड़ से उखाड़ फेंकना है। मुजफ्फरनगर दंगों ने भाजपा की जड़ को पूरे भारत में मजबूती देने का काम किया, इसलिए वो यहीं से इसकी जड़ों में मठ्ठा डालने का काम करेेंगे और जब तक इस जिले में सामाजिक गठबन्धन ठीक होने व साम्प्रदायवाद का खात्मा होने का विश्वास उनको नहीं होगा, तब तक वो लगातार यहां आते रहेंगे।

बुधवार को मेरठ रोड स्थित लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले पर अपने प्रवास के दूसरे दिन मीडिया से रूबरू हुए छोटे चौधरी ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राजस्थान उपचुनाव से एक सियासी हवा चली है, जो मिशन 2019 तक असर दिखायेगी। नगरीय निकाय चुनाव की बात करें तो शामली और मुजफ्फरनगर में ही, जहां भाजपा को मजबूती मिली बुरी तरह पराजय मिली है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र में उनकी सरकार को चार साल हो रहे हैं। जनता यह जान चुकी है कि देश का पीएम जो बोलता है, वो करता नहीं है। जो योजनाएं इनके द्वारा घोषित की गयी, उनको मूर्तरूप देने की कोई भावना इनकी है ही नहीं। आम बजट में जो कुछ भी प्रस्ताव किये गये, वो सभी चुनावी प्रोपेगंडा मात्र है। ये मोदी सरकार का चुनावी बजट रहा, जिससे किसी को कोई बड़ी राहत मिलने वाली नहीं है। नोटबंदी के बाद जीएसटी ने देश में रोजगार खत्म कर दिये हैं। हर साल लाखों करोड़ों युवा बेरोजगार हो रहे हैं। रोजगार देने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री युवाओं को पकौडा कारोबार की सलाह दे रहे हैं। पकौडा बाजार देश में सदियों से रहा है, इसमें भाजपा का योगदान कहां से आ गया। इनके पास विकास के नाम पर कुछ भी बताने को नहीं है, न कोई वादा पूरा किया गया है। यही कारण है कि 2019 में भाजपा 'कासगंज' कराकर चुनाव जीतने की तैयारी में जुटी है। इनके पास दंगा कराने के अलावा कुछ नहीं है। कासगंज को सुनियोजित साजिश बताते हुए अजित सिंह ने कहा कि तिरंगे के साथ भगवा झण्डे का कोई मेल नहीं है, वहां मुस्लिम तिरंगा लहराना चाहते थे, जिनको जबरन रोका गया। मैं यहां रालोद के पुराने सामाजिक गठबन्धन को जीवित करने आया हूं, मैं 2013 के बाद भी मुजफ्फरनगर आता रहा, लेकिन अब यहां के लोग समझने लगे हैं कि 2013 में जो कुछ हुआ वो गलत था, उसका नुकसान सभी को भुगतना पड़ा। अब ऐसे लोग अपने पुराने घर रालोद में वापसी चाहते हैं। दंगों में शामिल रहे लोगों को भी अपनी गलती समझ आ रही है, वो कह रहे हैं कि इस गलती ने हमें बर्बाद कर दिया। भाजपा की सरकार ने देश को बर्बादी पर ला दिया है। आज पीएम मोदी ऐसा प्रचार कर रहे है कि मानो भारत की पहले विश्व में कोई इज्जत ही नहीं थी। छोटे चौधरी ने कहा कि भाजपा मुजफ्फरनगर से पूरे भारत में मजबूत हुई, कवाल कांड ने जो जड़ जमाई, उसको मुजफ्फरनगर से उखाड़ने के लिए मैं यहां आया हूं। भाजपा से तौबा करते हुए कहा कि रालोद को सियासी मंच पर भाजपा से परहेज से भी बड़ा परहेज हो गया है। जब तक मुझे विश्वास नहीं होगा कि यहां पर सामाजिक गठबन्धन ठीक होने लगे हैं, साम्प्रदायवाद खत्म हो रहा है, तब तक मैं मुजफ्फरनगर आता रहूंगा। मेरे यहां आने से चुनाव लड़ने के इरादे का कोई सरोकार नहीं है। लोस चुनाव लड़ने को अभी सीट तय नहीं की है।
मोदी ने की नीतियों ने किसानों को बर्बाद कर दिया
रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने देश के किसानों को बर्बाद करके रख दिया है। चुनाव में भाजपा ने स्वामीनाथन रिपोर्ट और लागत का 150 गुना मूल्य किसानों को दिलाने की बात कही थी, लेकिन आज किसानों को एमएसपी भी नहीं मिल पा रहा है। एक पीआईएल की सुनवाई के दौरान हाल ही में केन्द्र सरकार ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर साफ कर दिया है कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की उसकी कोई मंशा ही नहीं है। कृषि के क्षेत्र में लागत तय करने का मापदंड ए2, एफएल और सी2 है। इसी के आधार पर भाजपा ने 150 गुना मूल्य किसानों को देने की बात कही थी, लेकिन ए2 व एफएल के आधार पर ये दिया गया, ये तो पिछले कई दशकों से रबी फसलों पर लागू है और पूर्व की सरकारों में किसानों को मिला है। भाजपा को इसमें सी2 फिक्स एसेस को जोड़कर लागत तय कर मूल्य दिलाना चाहिए। 2016 में गेंहू की बम्पर फसल भारत में होती देखकर केन्द्र सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी 30 प्रतिशत से घटाकर 0 प्रतिशत कर दी। इस साल चीनी की पैदावार अच्छी होने पर भी 30 लाख टन चीनी बाहर से मंगा ली, ऐसे में किसानों को बेहतर फसल मूल्य कहां से मिल पायेगा। 50 करोड़ किसानों के हेल्थ इंश्योरेंस कराने की बात वित्त मंत्री ने बजट में कही है, इसके लिए 50 हजार करोड़ का बजट चाहिए, लेकिन प्रावधान 2 हजार करोड़ का किया गया है, ये मजाक हो रहा है। ये सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित है। पीएम मोदी का सच के साथ कोई लेना देना नहीं है। ऐसे में इनके पास राम मन्दिर को ही हवा देना बचा है। हमारा मानना है कि कोई सरकार इस मुद्दे को तय नहीं कर सकती, सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देगा सभी को स्वीकार्य होगा।
इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष डा. मसूद अहमद, पश्चिमी प्रदेश अध्यक्ष डा. अनिल त्यागी, प्रवक्ता सुनील रोहटा, पूर्व सांसद अमीर आलम खां, पूर्व मंत्री चौधरी योगराज सिंह, धर्मवीर बालियान, पूर्व विधायक शाहनवाज राना, राजपाल बालियान, जिलाध्यक्ष अजीत राठी, सुधीर भारतीय, अभिषेक चौधरी , रणधावा मलिक, अशोक बालियान, कंवरपाल फौजी, कृष्णपाल राठी, हर्ष राठी, पराग चैधरी, मोहित कुमार, गुलाम मौहम्मद जौला सहित सैंकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मेरी इच्छा-समाज में घुले साम्प्रदायिकता के जहर को पीकर 'नीलकंठ' बन जाऊं
मुजफ्फरनगर। अपना दो दिवसीय प्रवास खत्म करके रालोद के मुखिया अजित सिंह एक ऐसी बहस को जन्म दे गये, जो मिशन 2019 के परिणाम आने तक सियासी हलकों के साथ ही सामाजिक जमातों के बीच भी समुद्र की लहरों की भांति रह-रहकर उठती नजर आयेगी। डाक बंगले पर मीडिया के सामने छोटे चौधरी 2013 के कवाल कांड के बाद मुजफ्फरनगर दंगों से हुई सामाजिक क्षति को लेकर भावुक भी नजर आये। उन्होंने जोशीले अंदाज में कहा कि वो अपनी उम्र का 80वां साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मजबूती के लिए समर्पित करेंगे। उनके इन अल्फाजों से यही इच्छा जाहिर हुई कि समाज में घुले साम्प्रदायिकता के जहर को घूंट-घूंटकर पीकर वो 'नीलकंठ' बनना चाहते हैं। 79वें जन्मदिवस पर वो खुद को बूढ़ा महसूस कर रहे थे, लेकिन मुजफ्फरनगर आकर जवान हो गये हैं।
हमने यहां सरकारों से टिकैत और हरेन्द्र को बचाया :
चौधरी अजित सिंह ने कहा कि मुजफ्फरनगर में हमने भी बहुत पंचायत की, यहां हमने सरकारों से टिकैत को बचाया, हरेन्द्र मलिक को बचाया और बागपत में एक मुस्लिम युवक पर जब एनएसए की कार्यवाही की गयी तो उसके लिए वहां पंचायत कर रात 11 बजे तक धरना दिया और सरकारों के फैसले बदलवाये हैं, लेकिन साल 2013 में भाजपा ने एक पंचायत कर जनता में जो गुस्सा सरकार के प्रति था, उसको मुस्लिमों की ओर परिवर्तित कराने का काम किया। ये दंगा गुस्से की देन था और सरकार की कमी से यह विकराल हुआ।
सामाजिक संगठनों के नेताओं ने की छोटे चौधरी से मुलाकात :
दंगों के बाद जाट और मुस्लिम के बीच बनी दूरियों को पाटने आये अजित सिंह से बुधवार को जमियत उलमा ए हिन्द के नेता डा. जमालुदीन कासमी, मौलाना हाफिज फुरकान असअदी, मौलाना ताहिर कासमी, मौलाना मूसा कासमी, शमीम कस्सार व मौ. इकराम के अलावा सामाजिक संगठनों से अजमलुर्रहमान, आसिफ राही, गौहर सिद्दीकी, नसीम बघरा और मौलाना गुलजार, गुलाम मौहम्मद जौला, मौबीन जौला आदि ने मुलाकात की। जमियत नेताओं ने अजित सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मुसलमान हमेशा से सामाजिक सद्भाव को आगे ले जाने के लिए तत्पर रहा है, हम तैयार हैं लेकिन पहला कदम आपको ही बढ़ाना होगा। जमियत पदाधिकारियों ने अजित सिंह के सामने यह शर्त रखी कि वो पहले जमियत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के साथ मंच साझा करें, तब हम आगे बढ़ेंगे। इस पर अजित सिंह ने कहा कि महमूद मदनी तो हमारे आदमी हैं, हमें इसमें कोई गुरेज नहीं। इस पर जमियत के लोगों ने फिर दोहराया कि महमूद मदनी से आपके क्या ताल्लुकात हैं हमें सरोकार नहीं, हम चाहते हैं कि आप मौलाना अरशद मदनी को दावत दें और मुलाकात करें।
यूपी का विपक्ष आज रालोद से चाहता है गठबन्धनः 2019 में भाजपा के खिलाफ गठबन्धन के सवाल पर छोटे चौधरी ने कहा कि यूपी में गठबन्धन हम भी चाहते हैं, ये कैसे होगा, इसमें कौन होंगे यह अभी भविष्य के गर्भ में है। भाजपा चार साल से सत्ता में है, हिन्दुत्व के नाम पर उसका एक बड़ा वोट बैंक आज खडा है। यूपी देश का बड़ा राज्य है और 80 सीट यहां से आती हैं, ऐसे में सभी पार्टी यहां पर गठबन्धन चाहेंगी। हम सीटों के बंटवारे को लेकर गठबन्धन पर झगड़ा नहीं करेंगे। भाजपा को हराना हमारा पहला मकसद है। कैराना लोकसभा सीट पर पार्टी के रुख पर उन्होंने कहा कि अभी फैसला नहीं है। लेकिन सरकार को कुछ रुकना चाहिए था और गोरखपुर व फूलपुर सीटों के साथ कैराना को शामिल करना था।

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