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बैंकों की सेहत सुधार रही आरबीआई

बैंकों की सेहत सुधार रही आरबीआई

हमारे शरीर में जिस तरह बीमारियां पैदा हो जाती हैं, उसी तरह संस्थाओं में भी रोग लग जाता है। बीमारियों का इलाज करना जरूरी होता है। यदि इसमें कोताही बरती गयी तो बीमारियां जानलेवा तक हो जाती हैं। हमारे देश की अर्थव्यवस्था में बैंकों को एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में देखा जाता है और इनकी अपनी कार्यप्रणाली में भी उसी तरह की अनियमितता आ जाती है जैसी हमारे खान-पान और रहन-सहन में होती है। नतीजे में मिलती है बीमारी।
बैंकों का कारोबार मुख्य रूप से कर्ज अर्थात् ऋण का होता है। इसके ब्याज से उनकी कमायी होती है। यही ऋण कभी-कभी ऐसे लोगों को दे दिया जाता है जो ब्याज तो दूर की बात मूलधन भी डकार जाते हैं। इसे बैंक का डिफाल्ट लोन कहते हैं। रिजर्व बैंक आफ इण्डिया (आरबीआई) ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि डिफाल्ट लोन का मामला 180 दिन में हर हालत में सुलझा दिया जाए आरबीआई ने यह भी कहा है कि डिफाल्ट लोन को किस तरह सुलझाया जाएगा, इसके लिए नये नियम बनाये गये हैं। डिफाल्ट लोन बैंकों की बीमारी का एक कारण बन गया है और इसका इलाज न किया गया तो इससे बैंक खोखली हो जाएंगी।
रिजर्व बैंक ने डिफॉल्ट लोन को किस तरह निपटाया जाएगा इसके नए नियम जारी किए हैं। इस कारण इस तरह के लोन को निपटाने के सभी पुराने तरीकों को खत्म कर दिया गया है। बैंक ने फंसे हुए कर्ज के निपटान के लिए दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत आज एक संशोधित रूपरेखा पेश की। नए दिशानिर्देशों में खराब लोन की जल्द शिनाख्त करने और उसकी सूचना देने से संबंधित स्पष्ट रूपरेखा है। आरबीआई ने अपनी अधिसूचना में कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता-2016 के क्रियान्वयन को देखते हुए नयी रूपरेखा पेश करने का फैसला किया गया।
केंद्रीय बैंक ने बैंकों से कहा है कि अगर वो नए नियमों का उल्लघंन करते हैं तो उनको भारी पेनल्टी का सामना कर पड़ सकता है। रिजर्व बैंक के इस कदम से लोन रिस्ट्रक्चरिंग की स्कीम जैसे कॉर्पोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग, सस्टेनेबल स्ट्रक्चरिंग स्ट्रेस एसेट, स्ट्रैटेजिक डेट रिस्ट्रक्चरिंग जैसे तरीके खत्म हो जाएंगे। खराब कर्ज को ज्वाइंट लेंडर फोरम के जरिए सुलझाने के सिस्टम को भी बंद कर दिया गया है। रिजर्व बैंक ने डिफॉल्ट की रिपोर्टिंग को भी तिमाही से मासिक कर दिया है। 5 करोड़ रुपए से ज्यादा लोन वाले के डिफॉल्ट को हर हफ्ते बताना होगा। अब बैंकों को बड़े डिफॉल्ट को सुलझाना जरुरी होगा। अगर 180 दिन के भीतर कोई समाधान नहीं निकलता है तो ऐसे लोन अकाउंट को बैंकरप्सी कोर्ट में भेजा जाएगा। 2 हजार करोड़ रुपए से ऊपर के डिफॉल्ट को 1 मार्च से 180 दिन के भीतर सुलझाना होगा। इस तारीख के बाद के डिफॉल्ट को जिस दिन से डिफॉल्ट हुआ है उस दिन से सुलझाना होगा।

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