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मुजफ्फरनगर में अल नूर एक्सपोर्ट मीट प्लांट पर सील

मुजफ्फरनगर में अल नूर एक्सपोर्ट मीट प्लांट पर सील

मुजफ्फरनगर : उत्तर प्रदेश के संवेदनशील जनपद माने जाने वाले मुजफ्फरनगर में सोमवार को प्रशासन की एक कार्यवाही ने हलचल मचा दी। सूबे में सत्ता परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक अमले के निशाने पर रहने वाली अल नूर एक्सपोर्ट मीट प्लांट फैक्ट्री पर प्रशासनिक अफसरों के दल ने छापामार कार्यवाही करते हुए मानक पूरे नहीं होने पर सील लगा दी। अल नूर मीट प्लांट भारत के दस सबसे बड़े 'बूचड़खानों' में शुमार है, जो अफ्रीकी देशों, संयुक्त अरब अमीरात सहित 35 देशों में बीफ की सप्लाई करती है। प्रतिदिन 600 जानवरों को काटने की क्षमता इस फैक्ट्री में है। इसके मालिक अजय सूद और सुनील सूद का भारतीय राजनीति में ऊंचा रसूख माना जाता है। सत्ता परिवर्तन के करीब एक साल बाद अल नूर एक्सपोर्ट पर प्रशासनिक सील लगने से सियासी हलचल भी मच गयी।
सूत्रों के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर मानक के अनुरूप व्यवस्था नहीं पाये जाने पर जिला प्रशासन ने सिखेडा थाना क्षेत्र के शेरनगर गांव में जानसठ रोड पर स्थित अल नूर एक्सपोर्ट मीट प्लांट को आज सील कर दिया।
जिलाधिकारी राजीव शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश का अनुपालन करते हुए अलनूर मीट संयंत्र को सील कर दिया गया है। गौरतलब है कि गत दिनों एनजीटी और प्रदूषण विभाग की एक टीम मुजफ्फरनगर के दौरे पर आई थी। टीम ने अपनी जांच पड़ताल में पाया था कि अलनूर मीट प्लांट प्रदूषण और एनजीटी के मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। रिपोर्ट के बाद शासन से आदेश मिलने पर जिला प्रशासन ने कार्यवाही करते हुए उक्त फैक्ट्री को सील कर दिया। सोमवार को तहसीलदार सदर रंजीत सिंह और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डाॅ. दिनेश पाण्डे तथा अन्य अधिकारियों व पुलिस फोर्स के साथ अल नूर एक्सपोर्ट मीट प्लांट पर पहुंचे और सिलिंग की कार्यवाही की। यहां प्लांट के मैनेजर रिटायर्ड कर्नल आनन्द सैनी को टीम ने कार्यवाही की जानकारी दी। जब आनन्द सैनी से 'खोजी न्यूज' के समाचार सम्पादक दिलशाद मलिक ने फोन पर कार्यवाही के सम्बंध में जानकारी लेनी चाही तो वो किसी भी कार्यवाही से इंकार करते रहे। उनका कहना था कि फैक्ट्री में प्रशासनिक या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई टीम नहीं पहुंची और न ही सील लगाई गयी है। दूसरा सवाल करने पर वो बिफर पड़े और झुंझलाहट में फोन काट दिया। उनकी झुंझलाहट साफ इशारा कर रही थी कि 'दाल में कुछ काला है'।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विवेक राॅय से जब बात की गयी तो उन्होंने बताया कि वो मीटिंग के सिलसिले में लखनऊ में है। अल नूर एक्सपोर्ट मीट प्लांट को लेकर एनजीटी व विभागीय दल ने पिछले दिनों दौरा किया था, जिसके सम्बंध में शासन को रिपोर्ट भेज दी गयी थी। आज कुछ कार्यवाही होने की जानकारी उनको मिली है। विभागीय अधिकारी दिनेश पाण्डे टीम में शामिल रहे।
भारत का चौथा सबसे बड़ा बूचड़खाना है अल नूर एक्सपोर्ट
भारत में बीफ का कारोबार करने के लिए अपेडा (एग्रीकल्चरल एण्ड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथाॅरिटी) द्वारा मीट प्लांट का लाइसेंस जारी किया जाता है। साल 1992 में अल नूर एक्सपोर्ट मीट प्लांट सिखेडा थाना क्षेत्र के गांव शेरनगर में जानसठ रोड पर स्थापित किया गया। इस कंपनी के मालिक पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट अजय सूद और साइंस बैचलर सूनील सूद हैं। सिखेडा प्लांट का कारोबार मैनेजर रिटायर्ड कर्नल आनन्द सैनी देखते हैं। अफ्रीकी देशों, संयुक्त अरब अमीरात सहित विश्व के 35 देशों में अल नूर एक्सपोर्ट बीफ की सप्लाई करती है। अल नूर एक्सपोर्ट देश की चौथा सबसे बड़ा मीट एक्सपोर्ट इण्डस्ट्रीज है। अपेडा द्वारा कंपनी को इसके लिए ब्रान्ज अवार्ड देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।
फैक्ट्री मालिकों और अफसरों को भेजा गया था नोटिस
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षेत्र में चल रही फैक्ट्रियों से दूषित पानी व प्रदूषण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में नोटिस देकर फैक्ट्री मालिकों से जवाब मांगा था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विवेक राॅय ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण संघर्ष समिति निराना के महासचिव प्रवेश पाल ने डीएम को शिकायती पत्र भेजकर क्षेत्र में स्थित फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी व प्रदूषण फैलने से आंख खराब होने, प्रदूषित जल पीने के कारण कैंसर जैसी बीमारियों से लोगों की अकाल मौत होने की शिकायत की थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने गुलशन पोलिओल्स, त्रिवेणी ऐलको केमिकल, सिद्धेश्वरी, केके डुप्लेक्स, महालक्षमी, अलनूर एक्सपोर्ट, सीएमओ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला कृषि अधिकारी और अधिशासी अभियंता जल निगम को नोटिस देकर फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी व प्रदूषण के बोर मेें जवाब मांगा था।
24 मार्च 2017 को अल नूर एक्सपोर्ट पर लगा था छापा
यूपी में सत्ता परिवर्तन के साथ ही 24 मार्च 2017 को प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट मौ. नईम के नेतृत्व में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, श्रम विभाग, जिला पंचायत, परिवहन विभाग, फूड विभाग समेत कई विभागों के अधिकारियों ने मीट प्लांट का निरीक्षण किया था। इस जांच में कोई खामी नहीं मिली थी और नियम कानून के तहत काम चलता मिला था। उस दिन पशुओं का कटान बंद था। प्लांट में एक दो जगह फर्श टूटा था। कटान बंद होने के कारण अधिकारियों को यह पता नहीं चल पाया कि एक वाहन में कितने पशु आते हैं। उक्त प्लांट में रोजाना 600 बड़े पशुओं को काटने की अनुमति है और 78 मीट्रिक टन मांस रोजाना एक्सपोर्ट होता है। टीम ने प्लांट से नमूने लेकर जांच के लिये भेज दिये थे। इस कार्यवाही में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता आरके सिंह, खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी विनीत कुमार, चीफ राहुल सिंह, कर्म सिंह, विकास, सीओ नई मंडी मणीलाल पाटीदार व इंस्पेक्टर सिखेड़ा सतीश चंद त्यागी आदि मौजूद रहे थे।
गहरे गड्डे में जमा किया जाता है खून
पशु कटान के बाद निकलने वाले खून को करीब 40 फीट गहरे गड्ढ़े में जमा किया जाता है। प्लांट के प्रबंधक आनंद सैनी ने बताया कि गड्ढे में जमा हुए खून से लाल पाउडर समेत कई चीजें तैयार की जाती हैं। पशुओं की हड्डी भी विभिन्न कामों में ली जाती है। अल नूर एक्सपोर्ट के मालिकों का सियासी रसूख इतना गहरा है कि टीम ने जब प्लांट में प्रवेश किया तो पशुओं का कटान बंद था और कर्मचारियों ने सफाई इस तरह कर रखी थी कि मानो काफी समय से प्लांट में पशु कटान बंद हो। सूत्रों की मानें तो टीम के पहुंचने से घंटों पूर्व ही प्लांट में प्रशासनिक अधिकारी आने की सूचना मिल गई थी। इसके चलते कटान बंद कर दिया गया था।

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