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मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् में पूर्व सभासद कर रहे 'ठेकेदारी'

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् में पूर्व सभासद कर रहे ठेकेदारी

मुजफ्फरनगर : बिहार, मध्य प्रदेश, यूपी सहित कई राज्य ऐसे हैं, जहां सरकारी ठेकों में माफियागदी हावी है, रंगदारी, अपहरण और लूट छोड़कर आर्थिक अपराध में लगे गिरोह के लिए ये रास्ता 'हींग लगे ने फिटकरी रंग चोखा' जैसी कहावत को चरितार्थ करने वाला साबित हो रहा है। नगर निगमों में जहां बड़े पैमाने पर ठेकों में राजनीति और अपराध की जुगलबंदी हम देख चुके है, लेकिन छोटे शहरों में निकायों में भी ऐसे ही कुछ गठजोड़ पारदर्शी व्यवस्था को निगल कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। इन दिनों मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रही है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप शहर को एलईडी लाइटों से जगमग करने और बिजली बिल का खर्च कम करने के लिए पालिका प्रशासन ने 10 हजार एलईडी लाइटों का टैंडर पारदर्शी व्यवस्था में रिकार्ड बिलो रेट पर कराया तो पालिका में गठजोड़ बनाकर अनैतिक तौर तरीकों से आर्थिक लाभ अर्जित करने वाले कुछ दबंग पूर्व सभासदों के पेट में दर्द होने के साथ ही हाजमा खराब हो गया। इस टैंडर में पालिका प्रशासन ने अपनी सूझबूझ से साढ़े पांच करोड़ रुपये से ज्यादा बचाये, लेकिन पालिका को चूना लगाकर कमीशन के रूप में करोड़ों की बंदरबांट करने की साजिश कामयाब नहीं होने पर इन 'ठेकेदारों' ने फर्जी शिकायतें कराकर पालिका प्रशासन की घेराबन्दी शुरू कर दी है।

नगरपालिका परिषद् में पथ प्रकाश व्यवस्था के लिए 10 हजार 40 वाट की नई एलईडी लाइटों की खरीद के मामले में पालिका प्रशासन द्वारा अथक प्रयासों के बाद किये गये सकारात्मक बदलाव को पालिका के ही कुछ 'ठेकेदार' हजम नहीं कर पा रहे हैं। ठेकों में सीधा हस्तक्षेप रखने वाले तीन पूर्व सभासदों ने गठजोड़ कर ऐसा मकड़जाल बुना कि इस खरीद में करीब चार करोड़ रुपये की बचत कराने में सफल रहे पालिका प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिये गये, जबकि ये लाॅबी खुद अपने चहेते एक ऐसे ठेकेदार को ठेका दिलाने का दबाव बना रही थी, जो डिफाल्टर है और जल्द ही ब्लैकलिस्ट करने की कार्यवाही चल रही है। इस मामले में ईओ ने कहा कि किसी भी डिफाल्टर डीलर को कोई टैंडर नहीं दिया गया है, शिकायत में जो तथ्य दिये गये हैं, उनका जवाब दे दिया जायेगा।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में पथ प्रकाश के लिए बिजली के बिल का खर्च कम कराने के लिए एलईडी लाइटों को लगवाने का आदेश जारी किया। इस व्यवस्था के तहत नगरपालिका परिषद् मुजफ्फरनगर की सीमा के अन्तर्गत करीब 15800 प्रकाश बिन्दुओं को एलईडी लाइटों से परिवर्तित करने की कार्यवाही शुरू कर दी गयी। इसी कड़ी में पालिका प्रशासन ने 18 नवम्बर को 40 वाट की 10 हजार नई एलईडी लाइटों की खरीद के लिए टैंडर आमंत्रित किये। इसमें 8000 रुपये प्रति लाइट की दर से टैंडर डाले गये। लाइटों की कीमत अधिक मानते हुए ईओ विकास सैन ने पारदर्शी व्यवस्था कायम कर एक्सईएन हाइडिल, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी और पालिका अफसरों की कमेटी बनाकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करायी तो बंसल ट्रैडिंग कम्पनी को टैंडर स्वीकृत किया गया। बता दें कि इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का असर यह रहा कि 8 करोड़ रुपये की ये दस हजार लाइटें पालिका प्रशासन को 2.37 करोड़ रुपये में मिलने का रास्ता साफ हुआ। यहीं से पालिका में आर्थिक अपराध में लिप्त रहकर ठेकों में सीधा हस्तक्षेप करने वाले पूर्व सभासदों का गैंग सक्रिय हो गया। ईओ के प्रयास से 8000 की एलईडी लाइट, प्रतिस्पर्धा के बाद कंपनी 2370 रुपये में देने को तैयार हो गयी। इस तरह से इस टैंडर में पालिका प्रशासन 5.63 करोड़ रुपये बचाने में सफल होता नजर आया। इसी सकारात्मक बदलाव ने कुछ 'ठेकेदारों' के पेट में दर्द कर दिया। इसी को लेकर गांधीनगर निवासी संजय कुमार नामक व्यक्ति ने इसमें डिफाल्टर को टैंडर देने के आरोप लगाते हुए शासन व प्रशासन में शिकायत कर हंगामा मचा दिया। इसके पीछे पालिका के तीन पूर्व सभासदों का नाम सामने आ रहा है। इसमें एक सभासद पालिका में ठेकेदारी भी करता है। जबकि एक सभासद की पत्नी वर्तमान बोर्ड में सभासद है।
सूत्रों के अनुसार इन लोगों ने पालिका प्रशासन पर दबाव बनाया कि शानू नामक ठेकेदार को पथ प्रकाश के लिए नई लाइटों का ठेका स्वीकृत किया जाये। शानू टैंडर में लाइटों की कीमत घटाने को भी तैयार नहीं था, जिस कारण उसका टैंडर स्वीकार नहीं किया गया। अब इन तीनों पूर्व सभासदों ने पालिका कार्यालय के ही कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर घेराबन्दी की योजना तैयार की, जिस कड़ी में ये शिकायत की गयी।
ईओ विकास सैन का कहना है कि पथ प्रकाश के लिए नई लाइटों की खरीद का ठेका अभी नहीं दिया गया है। केवल टैंडर स्वीकृत हुआ है। वर्क आॅर्डर जारी नहीं हुआ। जिस कंपनी को टैंडर मिला, वो डिफाल्टर नहीं है। शिकायकर्ता की शिकायत पर जांच कराई जायेगी, जो तथ्य हैं उनको सामने लाया जायेगा। उनका कहना है कि हमने टैंडर बिलो कराया और 8 हजार की लाइट 2370 रुपये में तय की है।
बता दें कि शिकायत में साल 2012-13 में खतौली में संगम ट्रैडर्स कंपनी के द्वारा 200 सोडियम लाइटों के लिए ठेका लिया गया था, इसमें वित्तीय अनियमितता में ठेका लेने वाले मधुसूदन के खिलाफ डीएम के आदेश पर जांच हुई थी, जिसमें कथित तौर पर आरोप साबित हुए। अब मधुसूदन की ओर से बंसल ट्रैडिंग कंपनी के नाम से टैंडर लेने की बात कही गयी है। मधुसूदन ने बताया कि इस टैंडर में उनका कोई लेना देना नहीं है, जिस कंपनी ने टैंडर डाला है, उसके 5-6 डीलर मुजफ्फरनगर में हैं, कंपनी अपनी शर्तों पर किस डीलर को टैंडर में कार्य करने का जिम्मा देगी, उनको नहीं पता है। उनका नाम बिना वजह इसमें घसीटा जा रहा है। मेरी कोई सहमति इस टैंडर में दर्ज नहीं है।
राजस्व का नुकसान किसी कीमत पर नहीं होने देंगे
नगरपालिका परिषद् मुजफ्फरनगर के वार्ड सख्या 17 से सभासद राजीव कुमार शर्मा का कहना है कि पालिका प्रशासन ने एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और पारदर्शी व्यवस्था कराकर सकारात्मक संदेश देने के के लिए दस हजार एलईडी लाइटों की खरीद की प्रक्रिया शुरू की। इसमें 8 हजार की लाइट 2370 में पालिका को मिलने का टैंडर हेलोनिक्स कंपनी के नाम स्वीकृत हुआ। जो आरोप लगा रहे हैं, उनको पता हीं नहीं कि पालिका प्रशासन ने कंपनी के साथ टैंडर किया है, ना कि किसी डीलर क साथ। डीलर डिफाल्टर हो सकता है, कंपनी डिफाल्टर नहीं है। इस टैंडर से पालिका को साढ़े पांच करोड़ की बचत हो रही है, लेकिन ये लोग पालिका कोष को चूना लगाकर अपना घर भरना चाहते हैं। हम किसी भी कीमत पर पालिका को राजस्व की हानि नहीं होने देंगे। इनको मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा। ये लोग अपना स्वार्थ पूरा नहीं होने पर विवाद पैदा कर रहे हैं। जिस कंपनी को टैंडर हुआ है, वो डिलफाल्टर नहीं है। डीलर डिफाल्टर हो सकता है, उसका टैंडर से कोई लेना देना नहीं है। राजीव ने कहा कि वो किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। पालिका प्रशासन की इस सकारात्मक पहल में हम साथ हैं।
अपने चहेते डिफाल्टर ठेकेदार को ठेका दिलाना चाहते हैं पूर्व सभासद
नगरपालिका परिषद् मुजफ्फरनगर में तीन पूर्व सभासद, जिनमें से कुछ का भाजपा से भी ताल्लुक है, दस हजार लाइटों के इस ठेके को अपने चहेते ठेकेदार शानू को दिलाना चाहते थे, जो डिफाल्टर है। सूत्रों के अनुसार शानू ने पूर्व में पालिका के द्वारा कबाड़ नीलामी में हिस्सा लेकर छह लाख रुपये में कबाड़ खरीदा था। एक लाख रुपये जमानत राशि के रूप में जमा कराये गये। इसके बाद पैसा जमा नहीं कराया गया। शानू को नोटिस दिये गये, लेकिन पैसा जमा नहीं कराने पर ईओ विकास सैन ने उसकी जमानत राशि के एक लाख रुपये जब्त करा दिये। अब शानू को ब्लेकलिस्ट करने की तैयारी पालिका प्रशासन कर रहा है।

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