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चुनावी रंग में कर्नाटक

चुनावी रंग में कर्नाटक

नई दिल्ली :दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में इस साल मई तक विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य विधानसभा की 224 सीटों में 113 विधायक जुटाकर सरकार बनायी जाएगी और भाजपा इस बार जोर शोर से इसी प्रयास में लगी है। मई 2013 में कांग्रेस ने 122 विधायक जुटाकर सरकार बना ली थी और सिद्धरमैया मुख्यमंत्री बनाये गये थे। इस बार सिद्धरमैया के नेतृत्व में ही कांग्रेस ने फिर से चुनावी समर जीतने का ताना बाना बुना है जबकि भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री वीएस येदियुरप्पा को आगे कर रखा है। भाजपा कोई भी मौका कांग्रेस के खिलाफ नहीं छोड़ रही है। राज्य में तीन राजनीतिक पार्टियां हैं। एक समय तो जनता दल (एस) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने राज्य की सत्ता पर एकाधिकार कर लिया था लेकिन अब भाजपा और कांग्रेस ही मुख्य मुकाबले में हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात का फार्मूला कर्नाटक में भी अपनाने का इरादा जताया है। वह 10 फरवरी से कर्नाटक का चार दिवसीय दौरा कर रहे हैं और इसकी शुरुआत हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्र के कोप्पल से करेंगे जहां जनसभा करने के बाद एक मंदिर में पूजा करने जाएंगे। राहुल गांधी का जो कार्यक्रम बनाया गया है उसके अनुसार कोप्पल में जनसभा के बाद वह हुलीगेम्मा मंदिर में पूजा के लिए जाएंगे। इसके बाद लिंगांयतों के प्रसिद्ध मठ सिद्धेश्वर मठ का दर्शन करेंगे। हुलीगेम्मा दुर्गा मां का मंदिर है और क्षेत्र में उसकी बहुत मान्यता है। इस मंदिर के प्रति क्षेत्रीय जनता का अटूट विश्वास है। राहुल गांधी ने गुजरात में भी सभी प्रसिद्ध मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन किया था और भाजपा ने इसे चुनावी रूप से खतरा समझकर राहुल के मंदिर दर्शन को दिखावा साबित करने का प्रयास किया था। इसी प्रकार राज्य में लिंगायत समुदाय की संख्या भी ज्यादा है और वोट बैंक की दृष्टि से वे महत्वपूर्ण समझे जाते हैं। गवि सिद्धेश्वर मठ लिंगायतों के विश्वास का बड़ा केन्द्र है। यहीं से पहाड़ी वाले रास्ते से शिव मंदिर जाया जाता है जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। दोनों ही स्थान लिंगायत समुदाय के आस्था केन्द्र हैं।
कांग्रेस की रणनीति है कि राज्य के लिंगायत समुदाय को अधिक से अधिक कांग्रेस से जोड़ा जाए। हालांकि इस क्षेत्र में लिंगायत के अलावा मुस्लिम और कुरुबा समुदाय के लोग भी रहते हैं लेकिन इन दोनों वर्गों पर कांग्रेस की अच्छी पकड़ है। मुख्यमंत्री सिद्ध रमैया पर मुस्लिमों की तुष्टिकरण का आरोप यूं ही नहीं लगाया जाता। उन्होंने राज्य में टीपू सुल्तान की जयंती और इसी तरह के कई कार्य मुस्लिम वर्ग को संतुष्ट करने के लिए किये हैं। भाजपा ने लिंगायतों को अलग धर्म की मान्यता देकर इनको अपना वोट बैंक बना लिया था। इस वोट बैंक को तोड़ने में जुटे मुख्यमंत्री सिद्ध रमैया को उम्मीद है कि अगर लिंगायतों का वोट हासिल करने में कांग्रेस सफल हो गयी तो हैदराबाद-कर्नाटक के साथ-साथ उत्तर कर्नाटक में भी कांग्रेस को फायदा होगा। राहुल गांधी का मठ और मंदिर में पहला कार्यक्रम रखना इसी रणनीति का हिस्सा है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा भी कांग्रेस की इस रणनीति को समझ गये हैं। इसीलिए श्री येदियुरप्पा ने राहुल गांधी की मंदिर और मठ यात्रा को दिखावे की राजनीति बताया है। श्री येदियुरप्पा चुटकी लेते हुए कहते हैं कि अब कांग्रेस को हिन्दुत्व के महत्व का अहसास हुआ है लेकिन उनकी इस दिखावटी आस्था से कोई फायदा नहीं होगा। भाजपा के अलावा संघ और विश्व हिन्दू परिषद भी अपना कार्य तेज कर रही है। दक्षिण कर्नाटक में विहिप ने हिन्दू मैरिज ब्यूरो, महिला सहायता केन्द्र खोल रखे हैं। विहिप की तरफ से चिकित्सा शिविर लगाये जाते हैं पीने के पानी का इंतजाम होता है। दक्षिण कर्नाटक में सातवीं कक्षा तक के 4 प्राइमरी स्कूल, दो हाईस्कूल ओर दो लड़कांे और लड़कियों के छात्रावास चलाये जा रहे हैं। इसी तरह संघ की तरफ से चिकित्सा, शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्य हो रहे हैं जिससे भाजपा का पक्ष मजबूत होता है।
इस राजनीतिक खींचतान के बावजूद राहुल गांधी को कांग्रेस आस्था के मामले में आगे बढ़ा रही है। राहुल गांधी मठ और मंदिर के साथ ही 12 फरवरी को कुलबुर्गी (गुलबर्गा) के ख्वाजा बंदे नवाज की दरगाह में भी जाकर सिर नवाएंगे। राहुल गांधी कर्नाटक में किसी समुदाय को छोड़ना नहीं चाहते हैं। इसलिए वीर शेव्वा पंथ के आस्था केन्द्र अनुभव मंटप्प भी जाएंगे। यह आस्था के केन्द्र विदर में स्थित है। इतिहास के अनुसार 12वीं सदी में संत बसवण्णा ने यहीं से एक ऐसे समाज की नींव डालने की कोशिश की थी जिसमंे जाति की जगह मानव मूल्यों को महत्व दिया जाए। कांग्रेस के चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष डीके शिवकुमार का कहना है कि विपक्षी दल भाजपा बिना मतलब के मुद्दे उठाती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अगर सम्पर्क यात्रा के दौरान किसी मंदिर, मठ अथवा दरगाह, गुरुद्वारा, मजार पर जाते हैं तो इसमें अनुचित क्या है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी वर्गों, जातियों, धर्म-समुदाय को साथ लेकर चलना चाहती है।
कर्नाटक में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच करो या मरो जैसा चुनाव चल रहा है। भाजपा नेता और राज्य में नेता विपक्ष जगदीश शेट्टार कहते हैं कि राहुल गांधी ने गुजरात में भी तो जनेऊ पहन-पहन कर मंदिरों में जाकर तिलक लगवाया था लेकिन उसका नतीजा क्या निकला। गुजरात में भाजपा ने सरकार बना ली। इसी तरह कर्नाटक में भी भाजपा सरकार बनाएगी। राज्य में जनता दल (एस) का प्रभाव भले ही कम हो लेकिन इस बार उसने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से समझौता कर लिया है। बसपा का यहां आधार मजबूत नहीं है लेकिन दलित वोट अन्य पार्टियों के काट सकती है। जनता दल (एस) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी विभिन्न वर्गों में पार्टी का आधार मजबूत कर रहे हैं। गत 7 फरवरी को श्री देवेगौड़ा बेंगलुरु एडवोकेट एसोसिएशन के धरने में शािमल होने पहुंचे। कर्नाटक हाईकोर्ट में जजों के खाली पदों को भरे न जाने के विरोध में यह धरना दिया गया। कर्नाटक में जजों के लिए 62 स्थान हैं और मौजूदा समय में सिर्फ 24 काम कर रहे हैं। जाहिर है कि इससे मुकदमे निपटाने में विलम्ब हो रहा है। बेगलुरु की प्रधान शाखा में 16 जज और कुलबुर्गी बेंच में 8 जज हैं। मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने धरने पर बैठे वकीलों से मुलाकात की और आश्वासन दिया कि वे इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
इस बीच भाजपा ने कांग्रेस आईटी सेल की संयोजक दिव्या स्पंदना उर्फ राम्या को शिकंजे में कस दिया है। सुश्री राम्या पहले पीएम मोदी के टीओपी शब्द की उल्टी व्याख्या में आलोचना का शिकार हुई थीं अब भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार ने बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सुनील कुमार से मिलकर एक अन्य मुकदमा दर्ज कराया है। दिव्या का एक वीडयो दिखाया जा रहा जिसमें वे पार्टी के लोगों को एक से अधिक एकाउंट खोलने के लिए कहती सुनी जा रही हैं। भाजपा नेता का कहना है कि कांग्रेस की आईटीसेल संयोजक लोगों को गलत काम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। फर्जी एकाउंट खोलना आईटी एक्ट का उल्लंघन है। इन सभी मामलों को चुनाव की दृष्टि से देखा जा रहा है।

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