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बजट के जरिए बेपटरी हुई रेल व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश

बजट के जरिए  बेपटरी हुई रेल व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश


नई दिल्ली :बजट के जरिए सरकार ने बेपटरी हुई रेल व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की है। उदय होते नवभारत के सपने को साकार करने के लिये सरकार ने भारतीय रेलवे में सुरक्षा को मजबूत करने, यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने और लम्बित विकास योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से गति प्रदान करने पर बल दिया है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2018-19 के लिये प्रस्तुत आम बजट, जिसमें गत वित्तीय वर्ष से ही रेल बजट को भी समाहित किया जा चुका है, के लिये समुचित बजटीय प्रावधान किये हैं। उन्होंने नए वितीय वर्ष के लिये बजट आवंटन में पांच फीसदी की बढोत्तरी करके उसे 1 लाख 48 हजार 528 करोड़ रुपए करने की घोषणा की है। दरअसल, आम बजट में रेल बजट को मिलाए जाने से लोगों के मन में जो दुविधाएं थीं, उसे समाप्त करने की पूरी कोशिश मोदी सरकार ने की है। लिहाजा, अब यह स्पष्ट हो गया है कि बजट के दूसरे नए स्वरूप में रेलवे में कतिपय चमत्कार किये हैं जिससे रेलवे के पुनर्निर्माण और उसकी यात्री सुविधाओं की पुरानी स्थिति की जड़ता को तोड़ने में भारी कामयाबी भी मिली है। निःसंदेह, मोदी सरकार इसके लिये बधाई की पात्र है क्योंकि रेलवे की सेहत को गठबंधन सरकारों के दौर की राजनैतिक लोकलुभावन घोषणाओं से जो निरन्तर क्षति पहुंच रही थी, उस पर मौजूदा सरकार ने लगभग विराम लगा दिया।
बेशक, सरकार ने नए वित्तवर्ष में रेलवे के लिये जो 1, 48, 528 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जाने का प्रावधान किया है, वह अब तक का सबसे बड़ा बजटीय आवंटन है। इससे वह रेलवे में सुरक्षा सर्वप्रथम नीति को लागू करने में सफल रहेगी। उसने विभिन्न स्तरीय सुरक्षा सुधारों पर बल देते हुए पूरी भारतीय रेल के सभी रेलवे स्टेशनों पर तथा सभी रेलगाड़ियों में वाईफाई और सीसीटीवी की सुविधा प्रदान करने का दृढ़ निश्चय किया और इसके लिये समुचित बजटीय प्रावधान भी, ताकि डिजिटल सुरक्षा सोच को बढ़ावा मिल सके और निर्बाध रूप से उस पर अमल भी सुनिश्चित किया जा सके। गौर करने वाली बात है कि सरकार ने समूचे रेल नेटवर्क को ब्रॉडगेज में परिवर्तित करने की अप्रत्याशित घोषणा की है, जिस पर रेल बजट का बड़ा हिस्सा खर्च किया जाएगा, ताकि रेल यात्रा सुगम और निरापद रह सके। इसके तहत 5000 किलोमीटर पुरानी रेल लाइन में किये जा रहे गेज परिवर्तन अभियान को गति प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, 3600 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण का कार्य करने का भी लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही साथ, पूरे देश के 600 प्रमुख रेलवे स्टेशनों को पुनः विकसित करके उन्हें आधुनिक बनाया जाएगा।
इसके अलावा, सरकार ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लोकल रेल का भी दायरा बढ़ाने की घोषणा की है। वह मुंबई में 90 किलोमीटर की पटरी का विस्तार करेगी। देश के रेलवे स्टेशनों पर नए एस्केलेटर भी लगाए जाएंगे। वित्तमंत्री ने कहा कि माल ढुलाई के मद्देनजर 12 हजार नए वैगन खरीदे जा रहे हैं। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए 3160 कोच और 700 इंजन भी खरीदे जा रहे हैं। इस साल 700 नए रेल इंजन और 5160 नए कोच तैयार भी किए जाएंगे। स्टेशनों पर एस्केलेटर्स बनाने की भी योजना है। सरकार ने घोषणा की कि 40000 करोड़ रुपये एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे। दो टूक कहा जाए तो सरकार ने रेल नेटवर्क और उसकी जरूरतों के लिहाज से उम्मीद के मुताबिक ही बजट पेश किया, जिसमें रेल सुरक्षा और उसके बुनियादी ढांचे को दुरूस्त करने पर जोर दिया गया है। याद दिला दें कि केंद्र सरकार ने अपने बजट में 2017-18 के लिए रेल नेटवर्क को और मजबूत करने के साथ रेल यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष पहल की तस्वीर पेश की थी। करीब दो हजार करोड़ रुपये का सुरक्षा कोष, नई पटरियां बिछाने और स्टेशनों के पुनर्विकास और उनका आधुनिकीकरण करने पर जोर दिया गया था।
रेल दुर्घटनाओं या फिर पटरियों से उतरने की कई घटनाओं के बाद एक लाख करोड़ रूपये के सुरक्षा कोष का अलग से प्रावधान करना रेल सुरक्षा के हित में माना गया था लेकिन इस बात से लगभग सभी वाकिफ हैं कि घटनाएं थमी नहीं, जिससे लोग हमेशा सशंकित रहते हैं। उम्मीद है कि सरकार के ताजा बजट से लोगों की आशंकाएं दूर होंगी। इस बात में कोई दो राय नहीं कि लोगों की नजर आम बजट के साथ-साथ रेल बजट पर भी थी और वो कतिपय चुनावी लॉलीपॉप का इंतजार कर रहे थे, लेकिन वित मंत्री ने संतुलित बजट पेश करके रेल सहित सभी को साधने की कोशिश की और कतिपय राजनैतिक लोकप्रियता के लिये वित्तीय हानि उठाने की परंपरा को तोड़ दिया। दरअसल सरकार इस बात से वाकिफ है कि पूरे देश की नजरें रेलवे के लिए किये जाने वाले बजटीय प्रावधान पर रहेंगी, क्योंकि विभिन्न रेल दुर्घटनाएं, जिसमें सैकड़ों रेल यात्रियों ने अपनी जाने गवाईं, में से अधिकतर घटनाएं पटरियों के चटकने या फिर उससे उतरने को लेकर हुईं। इसीलिये पूरे रेल नेटवर्क की पटरियों का आधुनिकरण व उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की ताजा पहल की गई है जिससे लोग भी आशान्वित और उत्साहित हैं।
आपको याद होगा कि एक बार रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सीधे प्रधानमंत्री को एक करोड़ उन्नीस लाख रूपए का विशेष कोष स्थापित करने के लिए खत लिखा था जिसे पिछले बजट में शामिल किया गया था और इसी के दम पर रेलवे सुधार के लिये कई संतुलित योजनाएं लागू करने की घोषणाएं भी की गई हैं, लेकिन हुआ क्या? न तो रेलवे परिचालन सुधरा, न ही दुर्घटनाएं थमीं। इसलिये सरकार के नए बजटीय सोच और उपाय कुछ उम्मीद तो बंधाते ही हैं। दरअसल, सरकार के समक्ष नए भारत के निर्माण के लिये रेलवे की नकारात्मक छवि को सुधारने की कठिन घड़ी है, जिससे मुकाबले के लिये वह तत्पर प्रतीत होती है। बेशक, आम बजट में रेल के लिये जो घोषणाएं हुई हैं, वह कब तक अमल में आएंगी, देखने वाली बात होगी। याद दिलाते चलें कि पिछले साल की कई ऐसी योजनाएं हैं जो आज तक पूर्णरूपेण लागू नहीं हो पाई हैं और महज कागजों में ही सिमटी रह गई हैं, जिसमें कई नई लाइनें बिछाना, देश भर में लाइनों का दोहरीकरण और विद्युतीकरण करना आदि शामिल है। उम्मीद है कि सरकार इसे चुनावी वर्ष में पूरे कर लेगी, या फिर जनाक्रोश झेलने और विपक्षी उलाहने सहने के लिये भी तैयार रहेगी। कांग्रेस के नेतृत्व में गोलबंद हो रहे विपक्ष की चाहत भी यही है।

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