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केन्द्र सरकार ने अपना कागजी बजट पेश कर बड़े-बड़े वादों की झोली खोल दी है जो पूरी तरह खोखली है

केन्द्र सरकार ने अपना कागजी बजट पेश कर बड़े-बड़े वादों की झोली खोल दी है जो पूरी तरह खोखली है

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी एवं प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने अपना कागजी बजट पेश कर बड़े-बड़े वादों की झोली खोल दी है जो पूरी तरह खोखली है। लोकसभा चुनाव सिर पर देखकर और किसानों, कामगारों तथा नौजवानों में बढ़ते असंतोष को भांपकर भाजपा की केन्द्र सरकार ने अपने नए वादों की जो झड़ी लगाई है वह कोई नई बात नहीं। भाजपाईयों को झांसा देने में महारथ है। चार साल जब किसान मरता रहा, सरकार सोती रही। बेरोजगार नौजवान सड़क पर भटकते रहे।

दिल्ली में बैठकर किसानों, नौजवानों के बारे में बातें बनाना फैशन के सिवाय कुछ नहीं।

केन्द्र की बजट से वास्तव में यदि किसी को खुशी हुई है तो वह उत्तर प्रदेश की सरकार है। केंद्रीय बजट की अच्छी खासी रकम तो राज्य सरकार को यह 'माले मुफ्त' जैसा लगता है क्योंकि उसे कुछ काम तो करना नहीं है। पहले भी जो पैसा मिला उसका उपयोग राज्य सरकार ने कहां किया कभी बताया नहीं ? राज्य सरकार काम नहीं करती है काम के विज्ञापनों पर जनता की गाढ़ी कमाई लुटाकर वाहवाही लूटने में यकीन रखती है। वैसे भी भाजपा की नीयत काम की नहीं।
किसानों की बड़ी बातें करने वाली भाजपा ने डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है। किसानों के लिए सिंचाई में इनकी जरूरत का कोई ख्याल ही नहीं किया है।
अखिलेश यादव ने समाजवादी सरकार में मुफ्त सिंचाई की व्यवस्था की थी। सन् 2022 तक किसान की आय दुगनी करने का ठोस प्रारूप सामने नहीं आया है। फसल के लाभकारी मूल्य में 50 प्रतिशत अतिरिक्त लागत उत्पादन के साथ ही परिवार के सदस्यों का पारिश्रमिक जोड़कर किसान का भुगतान सुनिश्चित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
भाजपा सरकार कृषि उत्पाद के लिए बाजार की व्यवस्था दूर की कौड़ी है। यह धोखा किसानों को परेशान किए है। अखिलेश यादव ने समाजवादी सरकार में कृषि, दूध, सब्जी और अन्य उत्पाद मंडियों की स्थापना की दिशा में पहल की थी। किसान दुर्घटना बीमा योजना भी समाजवादी सरकार ने शुरू की थी।
अखिलेश यादव की किसानों को लेकर यह चिंता हमेशा रही है कि किसानों के उत्पाद की लूट बंद होनी चाहिए। वे चाहते हैं कि किसानों के सभी उत्पाद चाहे आलू, धान, गन्ना या सब्जी-फल हों, सीधे उसके खेत से उठाकर मंड़ी तक लाने की व्यवस्था सरकार करें। अभी सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य की सूचियों में सिर्फ 6 फसलें ही रखी गई हैं। जरूरत इस बात की है कि रबी-खरीफ एवं जायद की उन तमाम जिन्सों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य की परिधि में रखा जाय जिसे कड़ी मेहनत से किसान उत्पादित करता है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बारे में आधी अधूरी जानकारी ही नीतियों के बारे में प्रकट होती है जिससे निर्णय बाधित होते हैं। कृषि विकास दर विगत तीन वर्ष में आधी रह गयी है फिर भी भाजपा बिना आधार के किसान हित का दावा करती है?
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने कहा है कि चार साल तक कर्ज में डूबे रहे किसान आत्म हत्याएं करते रहे, केन्द्र की भाजपा सरकार को उन पर रहम नहीं आया। अब जब सिर पर लोकसभा चुनाव आ गए हैं और भाजपा की सांस उखड़ती दिख रही है तो कल पेश हुए बजट में किसान, नौजवान के नाम पर दरिया बहाने का नाटक किया गया है। इस बजट से किसी वर्ग का कोई भला होने वाला नहीं। मोदी जी के वादों की काठ की हांडी अब दुबारा चढ़ने वाली नहीं है।
सच तो यह है कि इस केंद्रीय बजट से आम नागरिक की जिंदगी और दूभर हो जाएगी। घरेलू बजट चैपट हो जाएगा और मध्य वर्ग मंहगाई की चक्की में बुरी तरह पिस जाएगा। अपनी नीति और नीयत के अनुसार प्रधानमंत्री जी बड़े-बड़ी प्रलोभनों से बहकावे में लोगों को लाने में अब सफल नहीं होंगे। लोग उनकी चालों से भलीभांति वाकिफ हो गए हैं। राजस्थान और पश्चिमी बंगाल में जनता ने उपचुनावों में उन्हें सबक भी दे दिया हैं।

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