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शादी अनुदान योजना के तहत विवाह करने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड लिया जाना आवश्यक है : ओम प्रकाश राजभर

शादी अनुदान योजना के तहत विवाह करने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड लिया जाना आवश्यक है : ओम प्रकाश राजभर

लखनऊ: पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित पूर्व दशम एवं दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति योजना तथा ओ-लेवल एवं ट्रिपल-सी योजनाओं के तहत लाभान्वित होने वाले छात्र/छात्राओं के परीक्षा परिणाम एवं गुणवत्ता में सुधार के लिए आधार बेस बायोमैट्रिक अटेन्डेन्स को शीघ्र लागू किया जाएगा, ताकि इसके तहत लाभान्वित होने वाले छात्र/छात्राओं के शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाया जा सके। साथ ही प्रदेश सरकार की मंशानुसार प्रदेश के समस्त दीन दयाल उपाध्याय ग्रामों में संबंधित जिलाधिकारी के माध्यम से पात्र दिव्यांगों को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जाए।
पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आज यहां विधान भवन स्थित तिलक हाॅल में ये बात विभागीय कार्यों की समीक्षा के दौरान कही। उन्होंने पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपदों में होने वाली ब्लाक स्तरीय, मासिक बैठकों में प्रतिभाग कर विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी ग्रामीण जनता को उपलब्ध कराये तथा इसका लाभ पात्रों तक पहुंचाने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण किया जाए तथा क्रियान्वयन में आने वाले बाधाओं एवं कमियों को दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शादी अनुदान योजना के तहत विवाह करने वाले व्यक्ति का आधार कार्ड लिया जाना आवश्यक है ताकि उसकी आयु प्रमाणित हो सके।उन्होंने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता के संबंध में एक प्रस्ताव बनाकर कर शासन को प्रस्तुत किया जाए।
बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रमुख सचिव, महेश कुमार गुप्ता ने कहा कि आगरा, मुरादाबाद, चित्रकूट, अम्बेडकर नगर, मेरठ एवं महाराजगंज में कृत्रिम अंगों एवं सहायक उपकरणों के वितरण के लिए आगामी फरवरी में मेगा शिविर लगाए जाएं ताकि अधिक से अधिक दिव्यागजनों को लाभान्ति किया जा सके। मात्र पैसा खर्च करना उद्देश्य नहीं होता बल्कि उस पैसे से अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करना होता है।
महेश गुप्ता ने इस बैठक में आमंत्रित विशेष सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उमेश कुमार से कहा कि जिन नई दिव्यांगता श्रेणियों को शामिल किया गया हो उसके लिए गाइडलाइन तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि यूनिट डिसऐबिलिटी सर्टिफिकेट की राष्ट्रीय मान्यता को देखते हुए यह जरुरी हो गया है कि प्रदेश के दिव्यांगजनों को भी इस प्रकार के प्रमाण पत्र दिए जाएं। इस कार्य के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को ही अधिकार है। उन्होंने ये भी कहा कि दिव्यांगों की आर्थाेपेडिक शल्य चिकित्सा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए और इसके लिए चिकित्सकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाए।
प्रमुख सचिव ने कहा कि जिन मण्डलों में अभी तक बचपन-डे केयर सेन्टर संचालित नहीं हुए हैं वहां इन केन्द्रों का संचालन आगामी अप्रैल से शुरु किया जाए। वर्तमान में ये केन्द्र लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, आगरा, सहारनपुर, झांसी, बरेली एवं गौतमबुद्ध नगर मण्डलों में संचालित हैं।
बैठक में दिव्यांगजन सशक्तीकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभागों के मुख्यालय, मण्डल तथा जिला स्तर के अधिकारी मौजूद थे।

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