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उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक बाजार : औद्योगिक विकास मंत्री

लखनऊः उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना से थाईलैण्ड की उपमंत्री वाणिज्य, शूतिमा बनीअप्राफासरा के नेतृत्व में नौ सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल ने भेंट की। शूतिमा ने मुलाकात के दौरान कहा कि थाईलैण्ड के उद्यमी और निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश करने के इच्छुक हैं।

औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने प्रतिनिधि मण्डल को अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक बाजार है। यहां उद्यम स्थापना के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार ने उद्यमियों को हर सम्भव सहयोग देने की व्यवस्था की है। उनकी समस्याओं का निदान प्रभावी तौर पर करने का प्राविधान किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने औद्योगिक, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, आईटी, खाद्य एवं प्रसंस्करण सहित कई नीतियां प्रचलित की हैं, जिनका निवेशक लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने प्रतिनिधि मण्डल को अवगत कराया कि प्रदेश सरकार द्वारा हालही में देश के विभिन्न क्षेत्रों में रोड-शो का आयोजन किया गया। जिसके बेहतर परिणाम सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में अगले माह ऐतिहासिक दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश एवं विदेश के निवेशकों एवं उद्यमियों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने थाई प्रतिनिधि मण्डल से भी इसमें हिस्सा लेने का अनुरोध किया।
औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश होने के कारण यहां खाद्य प्रसंस्करण की ईकाइयां स्थापित करने की व्यापक सम्भावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण नीति जारी की है, जो पूरी तरह व्यवहारिक और आकर्षक है। प्रदेश में उपलब्ध कृषि उत्पादों का बेहतर ढंग से उपयोग खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां स्थापित की जा सकती हैं। इससे रोजगार के व्यापक अवसर सृजित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षित मानव संसाधन भी काफी बड़ी संख्या में उपलब्ध है। इसके साथ ही व्यवसायियों के लिए एक बड़ा बाजार भी है।
औद्योगिक विकास मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बौद्ध सर्किट को पर्यटन के रूप में विकसित किया है। सरकार ने इस सर्किट के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। बौद्ध धर्म के मानने वाले धर्मावलम्बी उत्तर प्रदेश के बौद्ध क्षेत्रों का सुचारू रूप से भ्रमण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की संस्कृति अत्यंत ही समृद्ध है। उन्होंने अगले वर्ष होने वाले कुंभ मेंले के ऐतिहासिक भव्य आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि इसमें करीब 3 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की सम्भावना है। उन्होंने थाई प्रतिनिधि मण्डल को भी आमंत्रित करते हुए कहा कि वे देखें कि इतने विशाल कुंभ मेले का आयोजन कितने सफल एवं सुव्यवस्थित ढंग से राज्य सरकार करती है। इसी प्रकार हर वर्ष माघ माह में माघ मेले का भी आयोजन किया जाता है। इसमें भी प्रदेश, देश और विदेश के श्रद्धालू भारी संख्या में भाग लेते हैं।
शूतिमा ने कहा कि थाईलैंड विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देने और विशेषकर पूर्वी आर्थिक गलियारों या ईईसी में, जो कि अगली पीढ़ी के मोटर वाहन, स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, भोजन जैसे लक्षित उद्योग विकास पर केंद्रित है, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देने और आसियान में उत्पादन और वितरण केंद्र बनने के लिए भी तैयार है। भविष्य के लिए, जैव रसायन, विमानन, और लॉजिस्टीज और डिजिटल कनेक्टिविटी को थाईलैण्ड ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापारिक चैनल को विशेषकर कृषि उत्पाद जैसे प्राकृतिक रबर और पाम तेल, ऑटो पार्ट्स, मशीनों, एयर कंडीशनर, मेडिकल सप्लाई तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए सहयोग देने की इच्छा जताई हैं।
उप वाणिज्य मंत्री ने बताया कि आईटी और सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन के क्षेत्र में भी उनका देश सहयोग करने के साथ ही उद्यौगिक क्षेत्र की विभिन्न नवीनत्म अत्याधुनिक टेक्नालाॅजी को भी साझा करने में रूचि दिखाई। उन्होंने कहा कि थाईलैण्ड और भारत आपसी सामन्जस्य स्थापित कर नई कार्य संस्कृति से जुड़ना चाहता है। इसी लिए थाईलैण्ड के उद्योगपति भारत के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने का मन बना रहे हैं। इसके साथ ही थाईलैंड भारत के साथ अर्थशास्त्र कनेक्टिविटी बनाने की भी इच्छा रखता है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक विकास आलोक सिन्हा, सचिव अलखनंदा दयाल, सचिव संतोष यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथ थाई प्रतिनिधि मण्डल में वाणिज्य मंत्रालय के सलाहकार, विदेशी व्यापार विभाग के उप महानिदेशक, वाणिज्य अधिकारी तथा र्कोआडिनेटर सहित अन्य थाई वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी मौजूद थे।

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