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रीता बहुगुणा जोशी ने बाल विवाह निषेध पर जागरूकता अभियान का किया शुभारम्भ

रीता बहुगुणा जोशी ने बाल विवाह निषेध पर जागरूकता अभियान का किया शुभारम्भ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण, परिवार कल्याण मातृ-शिशु कल्याण मंत्री प्रो0 रीता बहुगुणा जोशी ने आज सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त करने हेतु एक जागरूकता अभियान का शुभारम्भ किया। यह जागरूकता अभियान महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वैच्छिक संस्था प्लान इण्डिया द्वारा चलाया जा रहा एक साझा अभियान है जो 24 जनवरी 2018 से प्रदेश के पांच जनपदों में चालीस दिन तक 07 मार्च 2018 तक चलाया जायेगा।
इस अवसर पर प्रो0 जोशी ने कहा कि बाल विवाह एक अपराध है और यह बालिकाओं के स्वस्थ जीवन के लिए एक अभिशाप भी है। भारत में अज्ञानतावश आज भी बड़ी संख्या में बच्चों का विवाह उनके बालिग होेने से पूर्व कर दिया जा रहा है और कानून की जानकारी न होने से लोग इस जुर्म में शामिल भी हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार बाल विवाह में शामिल होने वाले लोगों में महिलाओं और बच्चों को छोड़कर सभी पुरूष जुर्म के भागीदार हैं। उन्होंने कहा बालिकाओं के स्वास्थ्य के लिए यह आवश्यक है कि उनका विवाह वयस्क होने पर ही किया जाये इसलिए 24 जनवरी 2018 से राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर प्रदेश के पांच जनपदों अम्बेडकरनगर, लखनऊ, मिर्जापुर, भदोही और महराजगंज में सघन जागरूकता अभियान लांच कर दिया जायेगा। उन्होंने कहा प्रदेश में पहले से ही बाल विवाह निषेध पर गांव-गांव तक जानकारी दी जा रही है, यह अभियान उसी को विस्तार पूर्वक जानकारी देने, जन-जन तक इस पर बने कानून की पूर्ण जानकारी का प्रचार करके जागरूकता लाने के लिए चलाया जा रहा है।
ज्ञात हो कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की धारा 16 के अन्तर्गत बाल विवाह निषेध की जानकारी निषेध अधिकारी, पुलिस, चाइल्डलाइन, आशा ज्योति केन्द्र को दी जा सकती है। अधिनियम के अनुसार नाबालिग वर-बधु के पिता या संरक्षक, विवाह में शामिल सभी वयस्क पुरूष, विवाह को तय कराने वाले नेता, अधिकारी, संस्थान और समर्थक सजा के पात्र होंगे। चालीस दिन तक चलाये जा रहे इस जागरूकता अभियान में जन-जन तक ''बाल विवाह-अभी नही, कभी नही'' की टैग लाइन के साथ इसकी कानूनी जानकारी ग्रामीण स्तर पर प्रचारित की जायेगी।

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