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भाजपा सरकार राज्य में अपराध नियंत्रण से सम्बन्धित कानूनों को ताक पर रखकर नए नए जनविरोधी कानूनों के जरिए जनतंत्र का गला घोंटने पर उतारू

भाजपा सरकार राज्य में अपराध नियंत्रण से सम्बन्धित कानूनों को ताक पर रखकर नए नए जनविरोधी कानूनों के जरिए जनतंत्र का गला घोंटने पर उतारू

लखनऊ : विधान भवन सचिवालय में आज यूपीकोका 2017 बिल पर प्रवर समिति की बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन के साथ बलराम यादव, नरेश उत्तम पटेल, राजेंद्र चौधरी, राम सुन्दरदास निषाद तथा शशांक यादव ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य में अपराध नियंत्रण से सम्बन्धित कानूनों को ताक पर रखकर नए नए जनविरोधी कानूनों के जरिए जनतंत्र का गला घोंटने पर उतारू है। इससे संवैधानिक मूल्यों की हत्या भी होगी। इस बिल में प्रयुक्त भ्रामक शब्दों का दुरूपयोग किसी भी जनांदोलन के विरूद्ध लाया जा सकता है।

समाजवादी पार्टी की तरफ से प्रवर समिति में यूपीकोका बिल पर 14 संशोधन पेश किए गए। बाद में प्रेस कांफ्रेंस में समाजवादी नेताओं ने बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधान परिषद में यूपीकोका बिल का जोरदार विरोध किया था। इन्होंने आशंका जताई थी कि इस बिल से पुलिस से जनता को परेशान करने और खासतौर से विपक्षी राजनैतिक दलों का मोहरा बनाने का हथियार बनेगा। इसके बाद विधान परिषद में यह बिल पारित नहीं हो सका था।
समाजवादी नेताओं ने कहा कि आंदोलनरत आँगनवाड़ी कार्यकत्री, शिक्षामित्र, अनुदेशक, बेरोजगार नौजवान, किसान, अल्पसंख्यक, दलित, प्रेस, महिलाएं, और कमजोर वर्ग ही इसका शिकार होंगे। जिस मकोका कानून की नकल पर यह बिल लाया गया है उसमें 60 हजार से ज्यादा लोग दसों साल से जेल में बंद हैं और सजा एक प्रतिशत को भी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इस बिल से भ्रमित करने वाली बहुत सी बातें प्राकृतिक न्याय के विरूद्ध है। इसके दुरूपयोग की पूर्ण सम्भावना है। इससे ऐसे प्राविधान हैं जिनसे तानाशाह देश भी शर्मिंदा हो जाएंगे।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि यूपीकोका बिल प्रषासन व पुलिस को स्वेच्छाचारी बना देगा। इसकी धारा 27 में सभी संवैधानिक मूल अधिकारों व न्यायिक सिद्धांतों की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि इस यूपीकोका बिल के तमाम प्राविधान उ0प्र0 गिरोह बंद अधिनियम 1986 में है। भाजपा सरकार ने ऐन्टी रोमियों स्क्वायड, ऐन्टी भूमाफिया आदि तमाम नए कानून भी बनाये हैं। इसके बावजूद भाजपा यूपीकोका बिल लाने की हठधर्मिता पर अड़ी है। इसमें धारा 3(1) ख में सरकार को उखाड़ फेंकने जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिसका विधिक भाषा में कोई अर्थ नहीं है।
समाजवादी नेताओं ने यह भी कहा है कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण ही बेरोजगारी में वृद्धि हो रही है। पुलिस भर्ती के परिणामों को लागू न करना रागद्वेष से प्रेरित है।

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