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अमित शाह को अब दिखाना है कर्नाटक में जादू

अमित शाह को अब दिखाना है कर्नाटक में  जादू

इस साल देश के छोटे-बड़े लगभग एक दर्जन राज्यों में विधानसभा का चुनाव होना है। ये चुनाव 2019 के आम चुनाव की आधारशिला को और मजबूत करेंगे। भाजपा को अपने बड़े-बड़े राज्य तो बचाने ही हैं। इसके साथ पूर्वोत्तर के राज्यों में अपने अश्वमेध को आगे बढ़ाना होगा जो असम और मणिपुर में भाजपा की विजय पताका फहरा चुका है। पूर्वोत्तर के राज्यों में जहां त्रिपुरा भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, वहां वाममोर्चे के माणिक सरकार मजबूती से कब्जा जमाए है। दक्षिण भारत के कर्नाटक में भाजपा ने एक बार सरकार बनाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी थी लेकिन कांग्रेस ने उससे यह राज्य फिर छीन लिया। कांग्रेस के सिद्ध रमैया यहां धुर्वीकरण को अपने पक्ष में मजबूत कर रहे हैं और इसी धुर्वीकरण को भाजपा के पक्ष में करने के लिए अमित शाह से बड़ा कोई नेता नहीं है। वे मौजूदा समय में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश को जीतकर बिहार में जिस तरह से भाजपा की मिली जुली सरकार बनायी है, उससे उनकी राजनीतिक कुशलता का अनुमान लगाया जा सकता है। वे आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, इसके लिए कड़ी मेहनत भी की है।
अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के एक व्यापारी परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम अमित अनिल चन्द्र शाह है। उन्हांने अपनी स्कूली पढ़ाई मेहसाणा से की। इसके बाद बयोकेमिस्ट्री से स्नातक करने के लिए वे अहमदाबाद चले गये। उनके पिता का पाइप का बिजनेस था जिसे कुछ समय तक अमित शाह ने संभाला। इसके अलावा उन्हांने कोआपरेटिव बैंक में स्काक ब्रोकर के तौर पर भी काम किया लेकिन बचपन से ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित हो गये थे। धीरे-धीरे संघ की शाखाओं में जाते रहे और कालेज के दिनों में ही वह राजनीति में आये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह एक दूसरे को लगभग 25 वर्षों से जानते हैं। पहली बार दोनो की मुलाकात 1982 में अहमदाबाद में हुई थी। उस समय श्री नरेन्द्र मोदी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक हुआ करते थे। अमित शाह ने अपना राजनीतिक कॅरियर संघ की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू किया। वह 1986 में भाजपा में शामिल हो गये। इसके बाद अगले साल ही भाजपा की यूथ विंग भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक्टिविस्ट बन गये। वार्ड सेक्रेटरी जैसे पद भी संभाले। अमित शाह ने 1991 में लोकसभा चुनाव के दौरान लालकृष्ण आडवाणी के लिए गांधी नगर में चुनाव प्रचार अभियान चलाया था। इसके बाद 1995 में भाजपा ने गुजरात में पहली बार केशूभाई पटेल के नेतृत्व में सरकार बनायी। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने कांग्रेस को हराने के लिए एक साथ जन सम्पर्क किया था। उसी समय दोनों नेताओं की रणनीति बनी थी कि हर गांव में कांग्रेस के विरोधी प्रभावशाली व्यक्ति को तलाश कर भाजपा में शामिल करें। श्री अमित शाह की वही रणनीति आज भी चल रही है। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में नाम आने पर 25 जुलाई 2010 में अमित शाह को 90 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था। बताते हैं जेल में रहते हुए ही अमित शाह ने देश भर से कांग्रेस के खात्मे की प्रतिज्ञा की थी।
इसी प्रतिज्ञा को अमित शाह पूरा कर रहे हैं। अब उनकी नजर मेघालय और कर्नाटक पर है जहां कांग्रेस की सरकार है। दोनों राज्यों में इसी साल चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया समझते हैं कि अमित शाह अपने सभी फार्मूले यहां अपनाएंगे। इसी संदर्भ में सिद्धरमैया गत दिनों नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले थे और कहा कि भाजपा के पास ध्रुवीकरण के अलावा कोई एजेण्डा नहीं है। राहुल गांधी फरवरी में कर्नाटक के दौरे पर जाएंगे। उनका 10 से 12 फरवरी तक का दौरा तय हो चुका है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आस्कर फर्नांडीज ने कहा है कि कांग्रेस का चुनावी अभियान राज्य में विकास और शांति के माहौल पर आधरित होगा। हम लोगों को बताएंगे कि कांग्रेस ने क्या-क्या विकास कार्य किये हैं।
दूसरी तरफ भाजपा कर्नाटक में जीत दर्ज कर कांग्रेस मुक्त भारत का सपना पूरा करना चाहती है। भाजपा कर्नाटक की सियासी जंग को फतह करने के लिए पूरी ताकत के साथ उतर चुकी है। सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा की परिवर्तन यात्रा चल रही है। इसी महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कर्नाटक पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री परिवर्तन यात्रा के समापन के मौके पर बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। कर्नाटक में भाजपा और कांग्रेस के बीच हिन्दुत्व पर दांव-पेंच जारी हैं। हिन्दू नेताओं की हत्या के विरोध में भाजपा राज्य भर में प्रचार कर रही है और कांग्रेस सरकार पर पक्षपात का आरोप लगा रही है। वहीं, कांग्रेस कहती है कि भाजपा दक्षिणपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रही है। यहां पर अमित शाह को बड़ी भूमिका निभानी है।
गुजरात में राहुल गांधी का मंदिर दर्शन और जनेऊ दिखाना बहुत चर्चित रहा था। भाजपा कांग्रेस के हिन्दू प्रेम की धार को पूरी तरह से कुंठित करना चाहती है और यह काम श्री अमित शाह ही अच्छी तरह से कर सकते हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गये हैं। यह विवाद भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बयान से शुरू हुआ है और अमित शाह इसे अपने पक्ष में भुनाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि भाजपा, आरएसएस और बजरंग दल में आतंकवादी विचारधारा के लोग हैं और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव ने इस आग में घी डालने का काम कर दिया, गुंडू राव ने कहा कि भाजपा को आतंकवादी संगठन है।
भाजपा को चुनाव के नजदीक आते यह अच्छा मुद्दा मिल गया है। कर्नाटक में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार ने 11 जनवरी को ही बेंगलूरू के पुलिस कमिश्नर टी सुनील कुमार से मुलाकात करके कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग अपने बयान के जरिए लोगों के बीच नफरत फैला रहे हैं। रिपोर्ट में गुंडूराव के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि गुंडूराव ने बेंगलुरू में कहा कि भाजपा आतंकवादी संस्था होती जा रही है ये लोग खुलेआम कहते हैं कि संविधान बदल देंगे। लोगों को मारते हैं और कहते हैं कि पाकिस्तान जाइए। भाजपा का आरोप है कि इस प्रकार से नफरत फैलाकर अशांति पैदा करके कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अपराध कर रहे हैं। अमित शाह ने इस मुद्दे को परिवर्तन यात्रा में भी उठाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा है। अभी अमित शाह के तरकश से पूरे तीर नहीं निकले हैं और चुनाव तक वे कांग्रेस को पूरी तरह पंगु बना देना चाहते हैं।


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