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उत्तर प्रदेश : कानून-व्यवस्था व किसान

उत्तर प्रदेश : कानून-व्यवस्था व किसान

भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान वादा भी किया था कि न रहेगा भ्रष्टाचार न रहेगा गुण्डाराज। इसका मतलब था कि कानून व्यवस्था को हर स्तर से सुधारा जाएगा। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं होता जितना कहने में लगता है। पुलिस-प्रशासन को अपनी संस्कृति को बदलने के लिए तैयार कर लेना आसान नहीं। अराजकता को राजनीतिक प्रश्रय मिलने लगता है तब यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। इसलिए भाजपा की सरकार बनने पर जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो नौकरशाही में एकाएक तो परिवर्तन आया लेकिन बाद में सब कुछ वैसा ही होने लगा, जैसे पहले हो रहा था। अब दूसरे साल में बजट सत्र शुरू होने से पूर्व राज्यपाल ने सरकार की योजनाओं को अभिभाषण के माध्यम से प्रस्तुत किया तो लग रहा है कि इस बार कानून-व्यवस्था को उच्च प्राथमिकता पर लिया जाएगा। इसी तरह किसानों के लिए भाजपा ने कर्ज माफी की घोषणा करने के साथ ही कृषि विकास का वादा किया था। अब तो इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक बड़ा वादा भी जुड़ गया है कि 2022 तक किसानों की आमदनी दो गुनी कर दी जाएगी। इसलिए मुख्यमंत्री योगी की सरकार ने किसानों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा। राज्यपाल के अभिभाषण से यही संकेत मिलता है। बजट सत्र से पहले राज्यपाल के स्वागत की अच्छी परम्परा पड़ी लेकिन विपक्षी दलों ने अभिभाषण के समय भी शोरगुल की परम्परा नहीं छोड़ी, इसे अच्छा नहीं कहा जा सकता।
राज्यपाल रामनाईक दिल्ली में संसद के प्रोटोकाल के समान राजभवन में गारद की सलामी लेने के बाद विधानसभाध्यक्ष और मुख्यमंत्री के साथ विधान भवन पहुंचे जहां उन्हें फिर सलामी दी गयी। यह परम्परा शुरू करने की बात राज्यपाल ने अखिलेश यादव सरकार से भी की थी लेकिन उस समय शुरू नहीं हो पायी। भाजपा की सरकार ने यह अच्छी परम्परा शुरू की है लेकिन विपक्षी दलों को विश्वास में लेनेे में सफलता नहीं मिल पायी। बजट सत्र से पहले विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक भी इसी उद्देश्य से की गयी थी लेकिन समाजवादी पार्टी के सदस्य लाल टोपी लगाकर यह संकेत दे रहे थे कि वे हंगामा करेंगे। सदन शुरू होने से पहले सपा सदस्यों ने विधान भवन में स्थित चैधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरना भी दिया और सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की। इससे राज्यपाल के प्रोटोकाल की छवि थोड़ी फीकी पड़ी। इन सबके बावजूद राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में सरकार की बजट संबंधी जिन योजनाओं पर प्रकाश डाला, उससे लगता है कि सरकार कानून-व्यवस्था और किसानों को टाप प्रायरटी पर ले रही है।
राज्यपाल रामनाईक ने अभिभाषण में बताया कि कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार कई नये प्रयोग कर रही है। अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है। उन्हें मुठभेड़ में पकड़ने की कोशिश होती है और इसी के चलते इस सरकार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा अपराधी एनकाउंटर में मारे भी गये हैं। राज्यपाल ने बताया कि पुलिस बल में महिलाओ का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अलग से महिला बटालियन बनाने का सरकार ने संकल्प लिया है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही सरकार एक महिला बटालियन बना देगी। राज्यपाल ने सरकार की तरफ से आश्वासन दिया कि मेरी सरकार गुंडो, माफियाओं व अराजक तत्वों को प्रभावी ढंग से न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाकर कानून का शासन स्थापित करेगी। इस संकल्प को मूर्ति रूप प्रदान करने के लिए थानों की कार्य प्रणाली में बदलाव लाया जाएगा। थानों में किसी भी फरियादी की शिकायत पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई होगी। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं।
इसी प्रकार राज्यपाल के अभिभाषण में किसानों को भी सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गयी है। सरकार ने पिछले वर्ष अपने वादे को पूरा करते हुए किसानों का कर्ज माफ किया और उसके लिए धन की व्यवस्था करने में थोड़ी परेशानी भी हुई थी लेकिन इस बार इसके लिए थोड़े धन की ही जरूरत पड़ेगी। सरकार ने किसानों को सिंचाई सुविधा भरपूर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री कृषि सिंचाई फंड बनाने की तैयारी कर ली है। राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में इसका जिक्र किया। राज्यपाल ने बताया कि इसके लिए धनराशि प्रदान करायी जाएगी। बुंदेलखण्ड के सूखा प्रभावित इलाकों में विभिन्न सिंचाई परियोजनाएं पूरी होंगी। राज्यपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री सिंचाई परियोजना की तर्ज पर बनायी जा रही इस योजना से किसानों की सिंचाई समस्या का हल संभव होगा। इसके अलावा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और कृषि उत्पादों की बर्बादी को रोकने के लिए मंडियों में प्रसंस्करण संयंत्र लगाये जायेंगे। किसानों को उन्नत खेती करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। कृषि के साथ पशुपालन और अन्य ग्रामीण उद्योग स्थापित करके किसानों की आमदनी को बढ़ाया जाएगा। सरकार का पूरा प्रयास होगा कि 2022 तक प्रदेश के किसानों की आमदनी दो गुनी हो जाए।
इस बार के राज्यपाल अभिभाषण की एक विशेषता यह थी कि सरकार की नीतियों को बहुत ही संक्षेप में प्रस्तुत किया गया। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ से इस संबंध में चर्चा की थी। राज्यपाल का लम्बा अभिभाषण विपक्ष के शोरगुल के बीच पढ़ना मुश्किल हो जाता था और ज्यादातर यही होता कि राज्यपाल पहले और अंतिम वाक्य को पढ़कर कर्तव्य की इति श्री कर लेते लेकिन इस बार मुख्यमंत्री श्री योगी ने राज्यपाल की सलाह को गंभीरता से लिया और राज्यपाल का अभिभाषण छोटा कर दिया गया। पिछली बार राज्यपाल का अभिभाषण 101 पेज का था लेकिन इस बार उसे 38 पेज तक सीमित रखा गया और राज्यपाल रामनाईक ने पूरा अभिभाषण पढ़ा।
राज्यपाल का अभिभाषण विपक्ष के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। इस पर विपक्ष के सदस्य चर्चा करते हैं। इसके अलावा सबसे मुख्य बात सदन की मर्यादा की होती है। विपक्षी सदस्यों विशेषकर समाजवादी पार्टी ने जमकर शोरगुल किया और सदन की मर्यादा को तार-तार करते हुए राज्यपाल पर कागज के हवाई जहाज और गोले बनाकर फेंके। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष को डराने की भाषा बोलती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की वादा खिलाफी से टूटे किसान, बेरोजगार नौजवान और आम इंसान को हक दिलाने के लिए हमारी पार्टी संघर्ष करती रहेगी। इसी प्रकार बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने कहा कि हमारी पार्टी हमेशा लोकतांत्रिक और मर्यादित ढंग से विरोध करती है लेकिन अगर सरकार विपक्ष की बात नहीं सुनेगी तो आम आदमी की बात, आवाज कौन उठायेगा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने भी कहा कि बहुमत के मद में भाजपा सरकार जनता की आवाज दबा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की हल्लाबोल शैली उनकी हताशा और निराशा का ही परिणाम है जिसे सरकार को दूर करना चाहिए।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया के बाद भी सदन में जिस तरह से सपा के लोगों के व्यवहार किया उसे उचित नहीं कहा जा सकता। उन्हें अब राज्यपाल के अभिभाषण में उठाये गये तथ्यों पर अपनी सारगर्मित राय देनी होगी और सदन की गरिमा को बनाये रखने का दायित्व जितना सत्ता पक्ष का है उतना ही विपक्ष का भी है इसलिए सदन की गरिमा को कायम रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। वह सरकार की आलोचना भी करे तो इस बात का ध्यान जरूर रखा जाए। जनता के हित में आवाज उठाना उनका तभी सार्थक हो सकेगा।

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