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DM ने मनाया पोंगल का पर्व, दी शुभकामनाएं

DM ने मनाया पोंगल का पर्व, दी शुभकामनाएं

मुजफ्फरनगर। जनपद में मकर संक्रांति की धूम के बीच जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. की कोठी पर एक अलग ही नजारा था। जिलाधिकारी की कोठी पर पोंगल का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। परम्परागत रूप से लकड़ियां जलाकर हांडियों में भोजन पकाया गया। केले के पत्तों पर ही लड्डू व अन्य प्रसाद रखकर रीति-रिवाज के साथ जिलाधिकारी ने पोंगल का पर्व मनाया।


उत्तर भारत में सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन उड़द की दाल की खिचड़ी, मूंगफली, रेवड़ी आदि का दान देने की परम्परा है। वहीं गुजरात में इस पर्व को उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। दक्षिण भारत में इस पर्व को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व की तुलना नवान्न से की जा सकती है, जो कि फसल की कटाई का उत्सव होता है। पोंगल का तमिल में अर्थ उफान या विप्लव होता है। पारम्परिक रूप से यह सम्पन्नता को समर्पित त्यौहार है, जिसमें समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप तथा खेतिहर मवेशियों की आराधना की जाती है। इस पर्व का इतिहास कम से कम 1000 साल पुराना है तथा इसे तमिलनाडु के अलावा देश के अन्य भागों, श्रीलंका, मलेशिया, मॉरिशस, अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर तथा अन्य कई स्थानों पर रहने वाले तमिलों द्वारा उत्साह से मनाया जाता है।


दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का स्वागत कुछ अलग ही अंदाज में किया जाता है। सूर्य को अन्न-धन का दाता मान कर चार दिनों तक उत्सव मानाया जाता है और उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की जाती है। विषय की गहराई में जाकर देखें तो यह त्यौहार कृषि एवं फसल से सम्बन्धित देवताओं को समर्पित है।

इस त्यौहार का नाम पोंगल इसलिए है, क्योंकि इस दिन सूर्य देव को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है वह पगल कहलता है। तमिल भाषा में पोंगल का एक अन्य अर्थ निकलता है- अच्छी तरह उबालना। दोनों ही रूप में देखा जाए तो यह बात निकल कर आती है कि अच्छी तरह उबाल कर सूर्य देवता को प्रसाद भोग लगाना। पोंगल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह तमिल महीने की पहली तारीख को आरम्भ होता है।


इसी कड़ी में जिलाधिकारी सेल्वाकुमारी जे. के आवास पर पोंगल का पर्व पारिवारिक परम्परा के अनुसार हर्षोल्लास से मनाया गया। लकड़ियां जलाकर उन पर माटी से बनी हांडी रखी गई और उसमें मिष्ठान्न बनाया गया। गन्नों को भी परम्परा के साथ रखकर पूजा-अर्चना की गई। थालियों पर केले के पत्ते रखकर उन पर हांडी में बना मिष्ठान, फल व अन्य खाद्य वस्तुएं रखकर सूर्य देव की उपासना कर उन्हें भोग लगाया गया। डीएम ने पोंगल का पर्व मनाते हुए फोटो ट्वीटर पर ट्वीट की हैं। इसके साथ ही शुभकामनाएं भी दी हैं कि पोंगल का पर्व सभी के जीवन में खुशियां लेकर आये।

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