तीन तलाक़ बिल सरकार की हठधर्मिता और ना समझी का सबूत : गौहर सिद्दीकी

तीन तलाक़ बिल सरकार की हठधर्मिता और ना समझी का सबूत : गौहर सिद्दीकी

मुजफ्फरनगरराज्यसभा में तीन तल़ाक बिल पारित होने पर जिला मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध समाज सेवी और सेक्यूलर फ्रंट के अध्यक्ष गौहर सिद्दीकी ने अपनी प्रतिक्रिया एक शेर से की


" बिगड़ती है जब ज़ालिम की नीयत
नही काम आती है दलील-ओ- हुज़्ज़त "



मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध समाज सेवी और सेक्यूलर फ्रंट के अध्यक्ष गौहर सिद्दीकी ने आगे मीडिया को मुखातिब होकर कहा तीन तलाक़ बिल सरकार की हठधर्मिता और ना समझी का सबूत है की इस्लाम के बारे में अज्ञानता तथा इस बिल के विरोध में खड़ी पार्टीयो और विश्वास घातियों के कारण राज्य सभा मे भी लाख सरकार को आईना दिखाने के बाद भी यह पास हो गया इसके सरकार ने हर हथकंडे अपनाये तथा यह इतिहास में सविधान की मान्यतों व एक वर्ग की आस्थाओं पर कुठाराघात है।




जबरदस्ती थोपकर दोहरा मापदण्ड अपनाया


सरकार जल्दी में है समझी ही नही की सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक सिटिंग में तीन तलाक़ अमान्य है तो फिर यह क्या नज़रिया है की आप किसको बिना अपराध के ही जेल भेजने की तैयारी कर रहे है बिल में आप एक वर्ग को शामिल किए बिना कैसे ऐसे कानून को थोप सकते हैजिसमे कोई अपराध ही ना घटित हो एक सिटिंग में तीन तलाक़ जिसको खुद इस्लाम मना करता है तो क्यो आप इसे जबरदस्ती थोपकर दोहरा मापदण्ड अपनाये है कि एक तरफ एक साल की सज़ा दूसरी तरफ तीन साल की सज़ा करके अपराध पर धार्मिक चश्मे चढ़ाए है। क्या आप ऐसे ही एक वर्ग का विश्वास जीतना चाहते है बन्द कीजिये मुस्लिम महिलाओं को बदनाम करना क्या आप पहलू खान, तबरेज़ अकबर के परिवार की महिलाओं को राहत देकर उनको न्याय दे सकते हो ?

नही असल मकसद कुछ और है आप पैरोकार हो शहीद हेमन्त करकरे को आतंकी बताने वालों के? आप महिला सशक्तिकरण की बात करते है लेकिन उन्नाव रेप कांड पर खामोशी है आपके मंत्री रेप कांड कर दोषियों के फेवर धरने देगे आपके सांसद रेप के दोषियों से जेल में मिलेंगे और बात महिला सशक्तिकरण की न्याय की ।


आप महिला सशक्तिकरण की बात करते है लेकिन उन्नाव रेप कांड पर खामोशी है



सरकार तीन तल़ाक बिल पर पुनर्विचार करे और इसकी विसंगतियों को दूर करे


हम मांग करते है की संविधान से खिलवाड़ बन्द हो इस बिल पर सरकार पुनर्विचार करे इसकी विसंगतियों को दूर करे और बिल में नया संशोधन लाये हमें मिली इस बिल पर देश के एक वर्ग को विश्वास में ले साथ ही सँविधानिक मान्यताओ के अधिकारों में व मज़हबी आस्थो में दखल देना बंद करे।


यह देश सबका है

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