राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल लोकतांत्रिक तरीक़ों से बटला हाऊस फ़िल्म की मुख़ालिफ़त जारी रखेंगी

राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल लोकतांत्रिक तरीक़ों से बटला हाऊस फ़िल्म की मुख़ालिफ़त जारी रखेंगी

आप सब जानते हैं कि बटला हाऊस नाम की एक फ़िल्म रिलीज़ होने वाली है जो कि जाहिरी तौर पर बटला हाऊस एनकाउंटर पर आधारित है और ट्रेलर देखने के बाद ये प्रतीत होता है कि पूरी फिल्म सच्चाई और हक़ीक़त से कोसों दूर झूठ और एकतरफा तथ्यों पर आधारित है जिससे कि ये पूरी संभावना है कि फ़िल्म से एक बार फिर मुस्लिम युवाओं की और खास तौर से पूरे आजमगढ़ जनपद की छवि धूमिल होगी और इस समय जबकि अभी बटला हाऊस एनकाउंटर का ट्रायल न्यायालय में चल ही रहा है तो ऐसे में ये फ़िल्म कहीं न कहीं उस ट्रायल पर भी असर डालेगी।


इन सब बातों के मद्दे नज़र इस फ़िल्म को रोका जाना निहायत ज़रूरी है। बहुत से साथियों की राय थी कि इस फ़िल्म का खुलकर सड़कों पर ट्रेलर जारी होने के बाद से ही विरोध किया जाए पर सड़कों पर शुरू से विरोध करने से फ़िल्म को मुफ्त की ही पब्लिसिटी मिलती जो कि फ़िल्म बनाने वाले खुद चाहते हैं।


इसीलिए क़ानूनी चारगोई अपनाते हुए राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस फ़िल्म को रोके जाने की मांग के साथ एक रिट दाखिल की है और सलमान खुर्शीद साहब जैसे बड़े वकीलों को पहली तारीख पर बहस हेतु खड़ा भी किया गया था, हमारी दरख्वास्त पर माननीय न्यायालय ने संज्ञान तो लिया परन्तु कोई फैसला नही दिया।


इसी सम्बन्ध में एक और रिट पेटिशन पीड़ित परिवार द्वारा दायर की गई है जिस पर सुनवाई आज 13 अगस्त को होनी है। हमारी कोशिश रहेगी कि इस फ़िल्म को कानूनी तौर पे रुकवाया जाए और अगर क़ानूनी राहत नही मिलती तो हम लोकतांत्रिक तरीक़ों से इस फ़िल्म का विरोध जारी रखेंगे।


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