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कार्डियक अरैस्ट क्या बला है ?🤔

कार्डियक अरैस्ट क्या बला है ?🤔

दिल को सप्लाई करने वाली नसों में सिकुड़न होने लगे तो मरीज को चलने/भारी काम करने से छाती में जकड़न होने लगती है (एंजाइना पेन),अगर दिल को सप्लाई करने वाली 3 नसों में से कोई भी नस, खून का थक्का बनने या अटकने से अचानक पूरी तरह बंद हो जाए तो इस नस का सप्लाई एरिया डेड होने लगता है एवं मरीज को छाती में दर्द,बेचैनी, घबराहट,पसीने आने लगते हैं जिसे 'हार्ट-अटैक' कहा जाता है। इसका पता मरीज के लक्षण, ईसीजी एवं खून की जांच (ट्रोपोनिन) से आसानी से लग जाता है ऐसे में जो नस बंद हुई है उसे तुरंत खून का थक्का घोलने वाले इंजेक्शन (सस्ते वाला स्ट्रैप्टोकाइनेज या महंगे वाला रिटिप्लेज अथवा टिनिकटिप्लेज) लगा कर या तार अथवा बैलून द्वारा खोलकर (एंजि्योग्राफी/ एंजियोप्लास्टी/स्टैंटिंग) उस नस में खून का दौरा पुनः चलाया जाता है। परंतु हार्टअटैक के दौरान नस बंद होने से हदय का वह भाग डैड होने लगता है एवं यह हार्ट की नियमित धड़कन को बहुत तेज या अनियमित कर (वीटी/वीफ) हार्ट का धड़कना बंद कर सकता है जिसे 'कार्डियक-अरैस्ट' कहा जाता है।

हार्ट-अटैक से मृत्यु कैसे ?

अचानक मरीज को हार्ट-अटैक पड़ने पर हार्ट के रुकने से होने वाली अप्रत्याशित मौत को सड्न कार्डियक डैथ (एससीडी) कहा जाता है। हार्टअटैक के दौरान एवं ज्यादातर शुरुआती घंटों में नस के बंद होने से हार्ट के डैमेज् हुए पार्ट द्वारा हार्ट की धड़कन का अनियमित होना (वीटी/वीएफ) ही ज्यादातर दिल के दौरे में मृत्यु का कारण होता है। नस में खून का दौरा पुनः स्थापित होने से यह खतरा खत्म या बहुत कम रह जाता है। कुछ मामलों में दिल की नस के शुरुआत से ही बंद होने पर हार्ट का बड़ा भाग डैमेज हो जाता है एवं मरीज का बीपी बहुत ज्यादा गिर जाता है ऐसे में मरीजों को बीपी बढ़ाने के इंजेक्शन (आईनोटौप्स) चलाने पडते हैं। कभी-कभी इमरजेंसी में बढी हुई अनियमित धड़कन (वीटी/वीफ) को बिजली का झटका (डीसी-शोक) देकर नियमित किया जाता है। कुछ मरीजों में दाएं तरफ की नस बंद होने से धड़कन कम भी हो जाती है जिसे 'हार्ट-ब्लॉक' कहते हैं ऐसे में कभी-कभी धड़कन बढ़ाने के लिए मशीन (टेंपरेरी-पेसमेकर) भी लगानी पड़ जाती है। अमूमन दाईं तरफ की नस बंद होने से होने वाले हार्टअटैक - बाँई तरफ की नस के बंद होने वाले हार्ट अटैक से कम खतरनाक होते हैं।

कार्डियक अरेस्ट किन कारणों से होता है ?

वैसे तो ज्यादातर कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से ही होते हैं परन्तु वास्तव में हार्ट का किसी भी वजह से रुक जाना कार्डिक- अरैस्ट कहलाता है। हार्ट-अटैक के बिना,अन्य कारणों जैसे खून में पोटेशियम का बढ़ना इत्यादि से दिल की अनियमित धड़कन (अरिदमिया), धडकन बहुत ज्यादा बढना (वीटी/वीएफ), धडकन घटना (हार्टब्लॉक-सीएचबी), दिल से निकलने वाली बड़ी खून की नली का फट जाना (अयोरटिक- डिसेक्शन),दिल की नस जो फेफड़ों को जाती है उसमें गाढ़े खून का थक्का जाकर अटक जाना (पल्मोनरी एंबॉलिज्म) इत्यादि से भी हॉर्ट अचानक रुक सकता है। कभी-कभी कुछ मरीजों में जिन्हें पहले एक या ज्यादा बार हार्ट- अटैक आ चुके होते हैं उनका हार्ट कमजोर होकर फैल जाता है एवं उसकी पंपिंग कम हो जाती है (कम इजेक्शन-फ्रेक्शन), ऐसे कमजोर हार्ट की धड़कन भी कभी-कभी अचानक अनियमित होकर (अरिदमिया-वीटी/वीएफ) हृदय- गति रोक सकती है(कार्डियक अरैस्ट)।






बचने के लिए क्या करें ?

हार्ट-अटैक होने के बाद दिल की कम पंपिंग वाले (लौ इजेक्शन फ्रेक्शन) मरीजों को दिल की धड़कन गडबड होने से रोकने के लिए खून पतला करने वाली दवाओं के साथ-साथ, मेटोप्रोलोल इत्यादि दवा लेनी चाहिये।

डाॅ अनुभव सिंघल (एम.डी. मेडिसिन-गोल्ड मेडल)

डीएम-काॅर्डियोलोजी, एसजीपीजीआई, लखनऊ

विभागाध्यक्ष, हृदयरोग, सुभारती मेडिकल काॅलेज, मेरठ


अगली बार सी.पी.आर. (कार्डियोपलमोनरी रिससिटेशन) क्या बला है?

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