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सरकार फेफडे़ के कैंसर से ग्रसित गरीबों के उपचार हेतु पूर्ण सहयोग करेगी

सरकार फेफडे़ के कैंसर से ग्रसित गरीबों के उपचार हेतु पूर्ण सहयोग करेगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डाॅ दिनेश शर्मा ने दो दिवसीय लंग कैंसर की राष्ट्रीय संगोष्ठी का केजीएमयू, लखनऊ में शुभारम्भ करते हुये कहा कि सरकार फेफडे़ के कैंसर से ग्रसित गरीबों के उपचार हेतु पूर्ण सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन-आरोग्य तथा उज्जवला योजना फेफड़े के कैंसर से ग्रसित रोगियों के उपचार एवं बचाव में सहायक सिद्ध हो रही हैं।





इस अवसर पर डॉ शर्मा ने संगोष्ठी के पदाधिकारियों को आश्वस्त करते हुये कहा कि यदि तम्बाकू के प्रतिबन्ध का कोई प्रस्ताव आप प्रस्तुत करें तो वह प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मांग को अवश्य अग्रसारित करेंगें। साथ ही प्रयास करेंगे कि इस मांग पर कोई सकारात्मक निर्णय भारत सरकार के स्तर से कराया जा सके। उप मुख्यमंत्री आज किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटफिक कनवेंशन सेंटर में फेफड़े के कैंसर की 10वीं दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारम्भ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुये।







संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में आयोजन सचिव एवं रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि इस संगोष्ठी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह संगोष्ठी तम्बाकू, धूम्रपान, प्लास्टिक रहित आयोजित की जा रही है। इसमें प्रतिभागियों को प्लास्टिक रहित बैज प्रदान किये गये तथा संगोष्ठी का विषय स्टाॅप स्मोकिंग, रिड्यूज एयर पाॅल्यूशन, प्रिवेन्ट लंग कैंसर (धूम्रपान बन्द करें, वायु प्रदूषण कम करें, फेफड़े के कैंसर से बचाव करें) है।






डॉ सूर्यकान्त की पुस्तक "एन अपडेट ऑन लंग कैंसर"का किया गया विमोचन

इस अवसर पर डॉ सूर्यकान्त द्वारा लिखित पुस्तक "एन अपडेट ऑन लंग कैंसर" का विमोचन भी किया गया। डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि फेफड़े के कैंसर दुनिया में पुरूषो में सबसे ज्यादा होते है तथा भारत में भी पुरूषो में यह दूसरे नम्बर का कैंसर है। डॉ सूर्यकान्त ने कहा 80 प्रतिशत से ज्यादा कैंसर के रोगी अंतिम अवस्था में ही सही उपचार प्राप्त कर पाते है, इसका प्रमुख कारण यह है कि फेफड़े के कैंसर के लक्षण टीबी रोग से मिलते जुलते है। इण्डियन सोसाइटी फाॅर स्टडी ऑफ लंग कैंसर के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिगम्बर बेहरा ने उद्घाटन सत्र में बताया कि बीड़ी, सिगरेट का सेवन फेफड़ो के कैंसर का प्रमुख कारण है।

इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुये बताया कि लगभग 40 वर्ष पहले फेफड़े के कैंसर का उपचार लगभग न के बराबर होता था किन्तु चिकित्सा जगत की प्रगति के साथ अब फेफड़े के कैंसर का उपचार संभव है तथा यदि रोगी प्रारम्भिक अवस्था में ही उपचार शुरू कर दे तो वह लगभग 5 वर्ष या उस से भी अधिक जीवित रह सकता है। डॉ भट्ट ने फेफड़े के कैंसर के इतिहास की विस्तृत जानकारी दी।

इस संगोष्ठी में 250 से अधिक चिकित्सक, वैज्ञानिक एवं शोधार्थी प्रतिभाग कर रहें हैं। इसमें राष्ट्रीय विशेषज्ञो के साथ-साथ सार्क देशों (नेपाल व बंग्लादेश) के प्रतिनिधि भी प्रतिभाग कर रहें है। संगोष्ठी के वैज्ञानिक सत्रों में डा0 राजेन्द्र प्रसाद (लखनऊ), डॉ सुस्मिता राय चैधरी (कोलकाता), डॉ आर के दीवान (दिल्ली), डॉ अजीजुर्ररहमान, (ढाका, बंगलादेश), डॉ रिचा गुप्ता (वेल्लौर, तमिलनाडू) एवंपीजीआई, चंडीगढ़ से डॉ राकेश कपूर, डॉ अमनजीत बल, डॉ नवनीत सिंह ने फेफडे़ के कैंसर पर अपना व्याख्यान दिया।

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