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दिल का रखें विशेष ध्यान

दिल का रखें विशेष ध्यान

नई दिल्ली। लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियां घेर रही हैं। तनाव, खान-पान पर ध्यान न देना, शराब, धूम्रमान के सेवन के कारणों के चलते हृदय संबंधी बीमारियां लोगों को घेर रही है। अव्यवस्थित दिनचर्या के कारण ये बीमारियां किसी भी उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। चाहे युवा हो या बुजुर्ग अब किसी भी आयु वर्ग में ये बीमारियां घर कर रही हैं।

दिल की बातें दिल ही जाने, दिल तो पागल है, दिल दीवाना है, कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, बदतमीज दिल, शीशा हो या दिल टूट जाता है, पल पल दिल के पास, यह दिल न होता बेचारा, दिल का रिश्ता बड़ा ही प्यारा है, दिल का हाल सुने दिल वाला, यह दिल है कि मानता नहीं। इस दिल को लेकर न बाॅलीवुड में न जाने कितने ही गाने लिखे गए हैं और अनगिनत फिल्में बनीं, लेकिन क्या इस दिल की हम उतनी फिक्र करते हैं जितना इस दिल को फिल्मों व गानों में नाजुक बताया जाता है। यह तो सभी लोग जानते होंगे कि इस दिल के बिना हम नहीं है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इसकी उतनी ही परवाह करनी चाहिए जितना यह दिल किसी को दे देने के बाद करते हैं। 29 सितंबर को 'विश्व हृदय दिवस' मनाया गया। इस दिन का उद्देश्य लोगों को हृदयरोग के बारे में जागरूक करना है। हृदयरोग के मरीजों की संख्या दुनियाभर में लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना काल में जहां कई लोग संक्रमित होकर अपनी जान गवां चुके हैं वहीं हजारों संक्रमित ठीक होकर घर भी जा चुके हैं लेकिन मरने वाले मरीजों में हार्ट अटैक की समस्या काफी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की वजह से दिल की मांसपेसियों में सूजन आ जाती है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

दुनिया में लाखों लोग ऐसे हैं जो हार्ट की बीमारियों से जूझ रहें हैं। भारत में हर पांचवा व्यक्ति दिल का मरीज है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल की बीमारी की वजह से हर साल लगभग 17.9 मिलियन लोगों की मौत हो जाती है। यह वैश्विक मृत्यु दर का 31 फीसदी हिस्सा है। वल्र्ड हार्ट डे 2020 के लिए थीम है 'यूज हार्ट टू बीट कार्डियोवस्कुलर डिजीज'। हृदय का कार्य सभी अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए पूरे शरीर में रक्त पंप करना है, और जब यह इस तरह से काम करने में विफल रहता है, तो इसे हृदय की विफलता के रूप में जाना जाता है। लोगों को दिल की बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। विश्व हृदय दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2000 में की गई थी। तब यह तय किया गया था कि हर साल सितंबर माह के अंतिम रविवार को विश्व हृदय दिवस मनाया जाएगा, लेकिन 2014 में इसके लिए 29 सितंबर की तारीख तय कर दी गई।

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियां घेर रही हैं। तनाव, खान-पान पर ध्यान न देना, शराब, धूम्रमान के चलते हृदय संबंधी बीमारियां लोगों को घेर रही है। अव्यवस्थित दिनचर्या के कारण ये बीमारियां किसी भी उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। चाहे युवा हो या बुजुर्ग अब किसी भी आयु वर्ग में ये बीमारियां घर कर रही हैं। 35 से ज्यादा उम्र के युवाओं में भी इनएक्टिव लाइफस्टाइल और खाने की खराब आदतों के कारण दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ रहा है। पिछले 5 साल में दिल की समस्याओं से पीड़ित लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इनमें से अधिकांश 30-50 साल आयु वर्ग के पुरुष और महिलाएं हैं। अमेरिका के एक रिसर्च जरनल में छपे लेख के मुताबिक 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी हुई। इसमें से तकरीबन 2.3 करोड़ लोगों की उम्र 40 साल से कम है। यानी 40 फीसदी हार्ट के मरीजों की उम्र 40 साल से कम है। भारत के लिए ये आंकड़े अपने आप में चैंकाने वाले हैं। जानकार बताते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में ये आंकड़े सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं। साल 2016 में दिल की बीमारी, अकाल मृत्यु का पहला कारण बन गया है। 10-15 साल पहले तक दिल की बीमारी को अकसर बुजुर्गों से जोड़ कर देखा जाता था लेकिन पिछले एक दशक में दिल से जुड़ी बीमारी के आंकड़े कुछ और कहानी कहते हैं।

एक आम भ्रम जो लोगों में दिल की बीमारी को लेकर रहता है वो ये है कि हार्ट अटैक पुरुषों को होते हैं, महिलाओं को नहीं या बहुत कम लेकिन इस गलत धारणा की वजह से महिलाएं हार्ट अटैक से बेवजह मर रही हैं। बेवजह इसलिए क्योंकि इस धारणा की वजह से वो दिल की बीमारी के लक्षण समझ नहीं पातीं और अपने दिल का ख्याल भी कम रखती हैं। ये खुलासा ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में किया गया है। हां यह सही है कि महिलाओं के लिए दिल की बीमारी का रिस्क पुरुषों के मुकाबले कम होता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें दिल की बीमारी का खतरा होता ही नहीं है। महिलाओं में अक्सर इसके संकेत जल्दी नहीं दिखते हैं और उनके बॉडी फंक्शन्स के कारण ऐसा हो सकता है कि ये कई बार खतरनाक स्थिति में पहुंचने तक न दिखें। भारत में हर साल एक करोड़ से ज्यादा लोग दिल की बीमारी से मारे जाते हैं। हृदय रोगों के कारण पुरुषों में 20.3 फीसद और महिलाओं में 16.9 प्रतिशत मौतें होती हैं। पुरुषों की तुलना में मृत्यु दर कम होने के बावजूद, रिपोट्र्स बताती हैं कि महिलाओं में हृदय रोग संबंधित मौतों का खतरा ज्यादा होता है।

खानपान की गड़बड़ आदतें, कसरत नहीं करने और तनाव के अलावा धूम्रपान एवं शराब पीने से रक्तचाप बढ़ने, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह का खतरा युवावस्था में ही बढ़ रहा है जिससे दिल का दौरा पड़ने की आशंकाएं पैदा होती हैं। जीवनशैली में बदलाव लाकर इन जोखिमों को कम किया जा सकता है। लोगों के पास अपने शरीर और मन को स्वस्थ और शांत रखने के लिए समय ही नहीं है, जिस वजह से लोगों में कई तरह की बीमारियां देखने को मिल रही हैं। डॉक्टरों का मानना है लोगों को कम से कम आधे घंटे की एक्सरसाइज करनी चाहिए, थोड़ा बाहर घूमना चाहिए लेकिन कोविड से बचने के उपाय के साथ ही नमक, चीनी और ट्रांस फैट वाली चीजें खाने से बचें। इससे दिल की बीमारी होने का खतरा कम होता है। हृदय शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, इसकी सलामती बहुत जरूरी है लेकिन आजके दौर में भागती-दौड़ती जिंदगी में लोगों को अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का मौका नहीं मिलता, जिसका उन्हें भारी खामियाजा चुकाना पड़ता है। कहा जाता है कि दिल का सबसे बड़ा दुश्मन तनाव है। इसके लिए अपने दिनचर्या में सही बदलाव आवश्यक है, चाहे आप युवा हों या बुजुर्ग एक हेल्दी लाइफस्टाइल को अपने जीवन में जगह दें। ताकि गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से आप बच पाएं।

दिल का खास ख्याल रखें साथ ही साथ दूसरे के दिल का भी ख्याल रखें और उसे ऐसी कोई बात न कहें जिससे उसके दिल को कोई तकलीफ हो क्योंकि दिल ही हमारे शरीर का वो हिस्सा है जिसके बिना जीना नामुमकीन है। दिल न हो तो इमोशंस नहीं, जज्बात नहीं, मोहब्बत नहीं और इन सबके बिना जिंदगी, जिंदगी नहीं। जीवन की आपाधापी के बीच सेहत और दिल को दुरुस्त रखना चुनौती बन रहा है। इनसे बचने के लिए खुद को तैयार करना होगा, तभी हमारा दिल आबाद रहेगा और जिंदगी को पूरी तरह से जी सकेंगे। इसलिए विश्व हृदय दिवस पर अपने दिल के साथ दूसरों का भी रखें ख्याल। (नाज़नींन-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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