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भारत में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू

भारत में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू

लखनऊ। आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक कोरोना संक्रमण के लिए एक वैक्सीन लॉन्च करने का लक्ष्य। कोरोना वायरस महामारी कब खत्म होगी? इसकी वैक्सीन कब तक आएगी? क्या अभी इसका पीक टाइम चल रहा है या पीक खत्म हो चुका है? ऐसे कई सवाल हैं जो लोग एक दूसरे से कर रहे हैं और या फिर हर कोई इसका जवाब ढूंढ़ रहा है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि अभी दुनिया ने कोरोना वायरस का पीक देखा ही नहीं है, अभी जो हाल है इससे भयावह हाल हो सकता है। डब्लूएचओ का ये बयान तब आया है जब दुनिया में अब हर रोज दो लाख नए केस सामने आ रहे हैं। 7 जुलाई कोे प्रेस वार्ता में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कहा गया, ''हमें नहीं लगता है कि अभी तक कोरोना वायरस का पीक आया है''। डब्लूएचओ ने माना कि जैसे-जैसे कुछ देशों ने लॉकडाउन हटाया है, वैसे ही केस में तेज उछाल देखने को मिला है। इसका नजारा पिछले पांच हफ्तों में देख चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉक्टर माइकल रायन ने कहा कि अभी कोरोना वायरस के मामलों में उछाल आया है, अगर यही रफ्तार रही तो अगले कुछ दिनों में मौतों के आंकड़ों में तेजी से उछाल आ सकता है। यहां बताया गया कि अप्रैल और मई में दुनिया में हर रोज एक लाख से अधिक केस आ रहे थे। अब जुलाई के पहले हफ्ते में हर रोज दो लाख से अधिक केस सामने आ रहे हैं। उम्मीद की किरण यह दिखी है कि भारत में कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल 7 जुलाई से शुरू हो गया है।

डब्लूएचओ ने माना कि इसका एक कारण बढ़ती हुई टेस्टिंग भी है, जैसे-जैसे टेस्टिंग बढ़ती जाएगी नए मामले सामने आते जाएंगे। पिछले पांच हफ्तों में टेस्टिंग लगभग दोगुनी हो गई है, यही कारण है कि ये आंकड़े सामने आ रहे हैं। गौरतलब है कि दुनिया भर में संक्रमण ने रफ्तार पकड़ ली है। 7 जुलाई को दुनिया भर में संक्रमण के 2 लाख 7 हजार से ज्यादा नए केस सामने आए जिसके बाद कुल मामले बढ़कर अब 1 करोड़ 19 लाख से भी ज्यादा हो गए हैं। बीते 24 घंटे में संक्रमण से 5000 से ज्यादा लोगों ने अपनी जन गंवा दी और कुल मौतों का आंकड़ा बढ़कर अब 5 लाख 45 हजार से ज्यादा हो गया है। अमेरिका में 55 हजार, ब्राजील में 48 हजार और भारत में 24 हजार नए केस सामने आए हैं। उधर साउथ अफ्रीका में हालत खराब होने लगे हैं और 7 जुलाई को 10 हजार नए केस सामने आए।

देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा साढ़े सात लाख के करीब पहुंच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बुधवार सुबह जारी अपडेट के मुताबिक, देश में कुल मरीजों का आंकड़ा 7 लाख 42 हजार 417 है, जिसमें 20 हजार 642 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में 22 हजार 752 नए मामले सामने आए हैं और 482 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना से अब तक 4 लाख 56 हजार 831 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि एक्टिव केस की संख्या 2 लाख 64 हजार 944 है। इस बीच महाराष्ट्र में होटल कारोबार पर पड़ा ताला भी खुलने जा रहा है। महाराष्ट्र में सारी पाबंदियां ऐसे वक्त में हटाई जा रही हैं, जब कोरोना संक्रमण अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है। मुंबई में भले ही संक्रमण का स्तर स्थिर हो, लेकिन महाराष्ट्र में रोजाना सामने आने वाले मामले रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे हैं। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने और उसका सामना करने के लिए दुनियाभर में वैक्सीन की खोज पर काम काफी तेजी से चल रहा है, लेकिन इस मामले में चीन शायद बाकी देशों से आगे निकलता दिख रहा है। खबरों के अनुसार, सिनोवैक बॉयोटेक प्रायोगिक वैक्सीन बनाने के साथ ही इस महीने के अंत में वैक्सीन के टेस्टिंग स्टेज के तीसरे और निर्णायक दौर में पहुंचने वाली चीन की दूसरी और दुनिया की तीसरी कंपनी बन गई है।

कोरोना वायरस संक्रमण को शुरू हुए 6 महीने हो चुके हैं। वैक्सीन और कोरोना वायरस के इलाज पर लगातार काम हो रहा है लेकिन ये कहना बेहद मुश्किल है कि वैक्सीन कब तक तैयार होगी। भारत, अमेरिका, चीन, रूस समेत कई अन्य देश, वैक्सीन की खोज की रेस जीतने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। एक तरफ इस खतरनाक वायरस के स्त्रोत और पहले मामले को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोविड-19 का स्वदेशी टीका मेडिकल उपयोग के लिए 15 अगस्त तक उपलब्ध कराने की बात कही है। भारत ने वैक्सीन तैयार कर ली है और अब 7 जुलाई से इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है।

सभी के मन में यह सवाल है कि आखिर भारत में कैसे इस वैक्सीन को डेवलप किया गया। किन-किन चरणों से गुजरकर यह क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार हुई है। कोविड-19 (जायकोव-डी) के लिए जायडस वैक्सीन ने प्री-क्लीनिकल डेवलपमेंट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब इसका मानव पर परीक्षण शुरू करने की अनुमति भी मिल गई है। कंपनी के एक बयान में कहा गया है, इस वैक्सीन को जानवरों की कई प्रजातियों के लिए इम्युनोजेनिक पाया गया है। जानवरों पर हुए अध्ययन में जो एंटीबॉडी बनी हैं, वे वाइल्ड टाइप के वायरस को पूरी तरह से बेअसर करने में सक्षम हैं। वैक्सीन तैयार करने वाले वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की टीम ने ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर किया है। भारत के पहले स्वदेशी संभावित कोविड-19 टीके 'कोवैक्सीन' को डीसीजीआई से मानव पर परीक्षण की हाल में अनुमति मिली है। 'कोवैक्सीन' को हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के साथ मिलकर विकसित किया है।

एक्सपट्र्स का मानना है कि किसी भी वैक्सीन को तैयार करते वक्त कई महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना होता है। किसी भी वायरस को खत्म करने के लिए सबसे पहले उसे आइसोलेट किया जाता है। इसके बाद उसके स्ट्रक्चर की स्टडी की जाती है, फिर वायरस के अंदर मौजूद एंटीजन के पार्ट की स्टडी होती है और फिर उसके खिलाफ मॉलिक्यूल तैयार किया जाता है। यह बहुत लंबा प्रोसेस होता है। इस प्रोसेस में यह देखा जाता है कि वायरस के किस भाग को प्रभावित करके उसे मारा जा सकता है। एक लंबी स्टडी के बाद यह तय किया जाता है कि वैक्सीन वायरस के किस भाग के लिए तैयार की जानी है। इसके बाद वैक्सीन को डेवलप करके उसका ट्रायल शुरू होता है। किसी भी वैक्सीन का ट्रायल इंसानों से पहले जानवरों पर किया जाता है। जानवरों में वैक्सीन का कोई रिएक्शन नजर नहीं आता है तो इसका अगला चरण होता है ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल, जो कई चरणों में होता है। पहले चरण में लगभग 20 लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल होता है। अगर सब सही रहता है तो अगला चरण शुरू होता है नहीं तो वहीं पर इसे रोक दिया जाता है। चरण दर चरण इंसानों की संख्या के साथ ही डोज बढ़ा दी जाती है। वैक्सीन संक्रमित व्यक्ति के अंदर वायरस के खिलाफ एक एंटीबॉडी बनाता है। इस एंटीबॉडी से व्यक्ति वायरस के प्रभाव से लड़ने में सक्षम होता है और कुछ दिन में वायरस खत्म हो जाता है। इसलिए ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल के दौरान देखा जाता है कि जिस व्यक्ति को वैक्सीन दी गई है, उसके अंदर एंटीबॉडी बनी या नहीं। अगर एंटीबॉडी शरीर में बनता है तभी ट्रायल को सफल माना जाता है और आगे की प्रोसेस शुरू होती है। भारत अगर अपने ट्रायल में कामयाब होता है तो ये बहुत गर्व की बात होगी। कोरोना वायरस की वैक्सीन बन जाने से महामारी एक झटके में खत्म तो नहीं होगी लेकिन कोरोना की चपेट में आने से बचा जा सकता है और इस महामारी से लड़ना आसान हो जाएगा।

(नाज़नींन-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

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