महात्मा गांधी ने अच्छाई के हर मार्ग पर चलकर जीने की राह दिखाई : सचिन पायलट

महात्मा गांधी ने अच्छाई के हर मार्ग पर चलकर जीने की राह दिखाई  :  सचिन पायलट

जयपुर । उप मुख्यमंत्री एवं मंत्री ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिन पायलट ने कहा कि महात्मा गांधी ने सुसभ्य संस्कारित व समृद्ध समाज बनाने हेतु अच्छाई के हर मार्ग पर स्वंय चल कर देश व दुनिया को जीने की राह दिखाई इसलिए वे आज एक व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक विराट संस्था का रूप ले चुके हैं।






पायलट को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के तहत संचालित राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महात्मा गांधी के जीवन दर्शन एवं महिला सशक्तिकरण पर स्वयं सहायता समुहों की कार्यशाला में प्रदेश के कोने कोने से आयी महिला स्वयं सहायता समूह की संचालकों, पदाधिकारियों, सदस्योें व सखियों को सम्बोधित कर रहे थे।





उपमुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा कहा कि दुनिया में ऎसा कोई विषय नहीं है जिससे गांधी जी न जुड़ें हाें चाहे वह सामाजिक न्याय की बात हो, नर नारी की समानता, गरीबी उन्मूलन, आर्थिक उपलब्धि, पर्यावरण व स्वच्छता आदि सभी मसलों पर उन्हाेंने देश व दुनियां में चेतना लाने में योगदान दिया इसीलिए वे महात्मा कहलाये ।






महिलाओं को महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए श्री पायलट ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सामाजिक व राजनितिक सशक्तिकरण के लिए पुरूषों की सोच में बदलाव लाने हेतु समाज के सभी वर्गों को मिलकर मुहिम चलानी होगी तभी हम महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने की दिशा में आगे बढ़ पायेंगे।






ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग व राजीविका के माध्यम से प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक स्वावलम्बन हेतु किये जा रहे प्रयासों के लिए अधिकारियों को बधाई देते हुए पायलट ने कहा कि राजीविका के माध्यम से सहकारिता व सहभागिता के जो प्रयास किये जा रहें हैं उसे एक आन्दोलन का रूप देना होगा व उन्हें ज्यादा से ज्यादा ऋण साख संस्थाओं से जोड़ कर इसे ओर विस्तार देना होगा । इसके साथ-साथ महिलाओं की शिक्षा, रोजगार व राजनीति में उनकी भागीदारी पर भी ध्यान देना होगा ।

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ममता भूपेश ने अपने सम्बोधन में कहा कि महात्मा गांधी विधवा विवाह न होने, बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ थे। उन्होंने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण एवं स्वावलम्बन पर बल दिया । राजस्थान पायल जांगिड़ जैसी बाल विवाह के विरूद्ध आवाज बुलंद करने वाली बालिकाओं का प्रदेश है, जो महात्मा गांधी के दिखाए मार्ग पर चल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक हजार करोड रुपये की इंदिरा प्रियदर्शनी महिला शक्ति निधि की बजट घोषणा कर महिलाओें के सशक्तिकरण किए जाने के संकल्प को जताया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बालिकाओं को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना चाहती है, इसलिए कक्षा 6 से 12 तक विद्यालयों मे बालिकाओें को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिलाया जाना अनिवार्य किया जाएगा।


अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज एवं स्टेट मिशन हैड राजीविका राजेश्वर सिंह ने महाभारत के श्लोक से स्वागत भाषण की शुरूआत करते हुए कहा कि सत्य, तप, दया व क्षमा भारतीय संस्कृति के ऎसे शाश्वत व सनातन जीवन मूल्य है जिन्हें महात्मा जी ने न केवल आत्मसात व हद्वयगंम किया था बल्कि अपने चिन्तन, वचन, कर्म व जीवन में पूर्णतः समाहित किया था। महात्मा गांधी की सोच की परिधि समूचे देश, समाज, समुदाय, सम्प्रदाय की सीमा के आगे थी । उनकी सोच सम्पूर्ण विश्व के कल्याण के प्रति व मानव मात्र के प्रति प्रेम, करूणा, सहनशीलता, नैतिकता व क्षमा से परिपूर्ण थी।


उन्होंने न केवल ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरूद्ध संधर्ष किया था बल्कि भारतीय समाज में फैली कुरीतियों छुआछूत, भेदभाव, अस्पृश्यता,साम्प्रदायिकता, कुटीर व ग्रामाद्योगों की खराब स्थिति के विरूद्ध जीवन भर संघर्ष किया।


सिंह ने कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम में उनकी प्रेरणा से समाज के सभी पूंजीपति, व्यवसायी, दलित, महिलाएं,आदिवासी, किसान सभी वर्ग सम्मिलित हुए । महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में सम्मानजनक स्थान दिलाने का पूरा-पूरा श्रेय गांधी जी को जाता है । उन्हीं की प्रेरणा का प्रतिफल था कि स्वर कोकिला सरोजनी नायडू, कमला देवी चट्टोपाध्याय सुशीला नैयर,राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी ओर अनेक अन्य गणमान्य महिलाओं ने स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई बल्कि राष्ट्रीय व सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महात्मा गांधी की सोच थी कि जब तक महिलाओं का शरीर पोषित नहीं होगा, उन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिलेगा,उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा, उनकी सामाजिक व आर्थिक प्रक्रियाओं में सहभागिता नहीं होगी तब तक महिलाओं का ही नहीं देश का उत्थान भी संभव नहीं होगा। उनकी इसी सोच से पे्ररित होकर देश में भारत सरकार ने 2010-11 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका विकास मिशन की शुरूआत की जिसके तहत राज्य में राजीविका के तहत 1 लाख से अधिक स्वंय सहायता समूह सक्रियता से संचालित है जिससे महिलाओं के जीवन में अनेक सकारात्मक बदलाव आये हैं।


इस अवसर पर राजस्थान विश्वविधालय की प्रोफेसर विद्या जैन ने महात्मा गांधी के जीवन के कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं को उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी महिलाओं के स्वावलम्बन के प्रबल समर्थक थे। वहीं प्रोफेसर विजय वीर सिंह ने राजिविका के बारे में बताया। इस अवसर पर स्वंय सहायता समूहों की महिलाओं ने भी अनुभवों को साझा किया। वहीं अलवर की पायल जांगिड़ ने बाल विवाह के खिलाफ अपने संघर्ष को बताया। उन्होंने कहा कि वे लगातार बाल विवाह के खिलाफ अभियान को निरन्तर जारी रखेंगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने पायल जांगिड़ का सूत की माला पहनाकर स्वागत किया।





कार्यशाला में पोषण आधारित एक पोस्टर का भी विमोचन किया गया। इस मौके पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारी व आजीविका के राज्य स्तरीय व जिला स्तरीय परियोजना प्रबंधक उपस्थित थे।

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