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कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार का फ्लोर टेस्ट आज

कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार का फ्लोर टेस्ट आज

नई दिल्ली। कर्नाटक में आज विधानसभा में विश्वासमत से पहले ही कांग्रेस-जदएस सरकार का भविष्य अधर में लटकता दिख रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बागी विधायकों को विधानसभा सत्र में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालती आदेश के बाद कांग्रेस के बागी विधायक बी सी पाटिल ने कहा है कि हम उच्चतम न्यायालय के निर्णय से खुश हैं, हम उसका सम्मान करते हैं। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी एस येदियुरप्पा फैसले से खुश हैं. उन्होंने कहा कि यह बागी विधायकों के लिए एक नैतिक जीत है। उन्होंने कहा कि मैं उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करता हूं. यह संविधान और लोकतंत्र की एक जीत है। उन्होंने कहा है कि यह बागी विधायकों की नैतिक जीत है। कुमारस्वामी ने येद्दियुरप्पा पर तंज कसते हुए कहा है कि विपक्ष के नेता काफी जल्दबाजी में दिख रहे हैं। भाजपा इस बात को लेकर आशंकित है कि सत्तारूढ़ गठबंधन मतदान होने से पहले संख्याबल को मजबूत करने के अंतिम प्रयास में जितना संभव हो सके उतना समय बिताने के लिए बहस को लंबा खींचने की कोशिश करेगा।

राजनीतिक पंड़ितों की मानें तो सुप्रीमकोर्ट इस फैसले के बाद कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस व जदएस पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बता दें कि कांग्रेस के 13 और जदएस के तीन विधायकों सहित कुल 16 विधायकों ने इस्तीफा दिया है और दो निर्दलीय विधायकों- आर शंकर तथा एच नागेश ने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इस समय सदन में सत्ताधारी गठबंधन का संख्याबल 117 हैं, जिसमें कांग्रेस के 78, जदएस के 37, बसपा का एक और एक नामित सदस्य हैं। इसके विधानसभाध्यक्ष और दो निर्दलीयों के समर्थन प्राप्त है। 225 सदस्यीय विधानसभा में विपक्षी भाजपा के पास 107 विधायक हैं, यदि 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो जाते हैं तो सत्ताधारी गठबंधन का संख्याबल कम होकर 101 हो जाएगा, इससे 13 महीने पुरानी कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

कुमारस्वामी ने कहा कि कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन के बारे में संशय पैदा किया गया है और इसे देश के सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें सच बताना होगा। शक्ति परीक्षण से एक दिन पहले उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया कि कांग्रेस-जद(एस) के असंतुष्ट 15 विधायकों को राज्य विधानसभा के मौजूदा सत्र की कार्यवाही में भाग लेने के लिए बाध्य ना किया जाए।

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