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सोनिया का तीखापन, ममता की मिठास

सोनिया का तीखापन, ममता की मिठास

नई दिल्ली लद्दाख की गलवान घाटी में चीन से तनाव के मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक बुलायी थी। इस बैठक में 20 दलों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हिस्सा लिया। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार से कई सवाल भी पूछे। इन सवालों में कुछ तीखे थे लेकिन सामयिक और वाजिब लगे। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे समेत कई नेताओं ने चीनी मसले पर पीएम मोदी के समर्थन की बात कही। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी गई।


इस बैठक में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, बसपा प्रमुख मायावती, जेपी नड्डा (भाजपा), उद्धव ठाकरे (शिवसेना), एमके स्टालिन (डीएमके), पलानीस्वामी और ओ पन्नीरसेल्वम (एआईएडीएमके), एन चंद्रबाबू नायडू (टीडीपी), जगन मोहन रेड्डी (वाईएसआर कांग्रेस), शरद पवार (एनसीपी), नीतीश कुमार (जेडीयू), अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), डी राजा (सीपीआई), सीताराम येचुरी (सीपीएम), के चंद्रशेखर राव (टीआरएस), सुखबीर बादल (अकाली दल), चिराग पासवान (लोक) जनशक्ति पार्टी) और हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) शामिल हुए। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। सोनिया गांधी के सवालों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा हमारी सीमा में कोई भी नहीं घुसा है, न ही कोई घुसा हुआ है और न ही हमारी किसी पोस्ट पर किसी ने कब्जा किया है। पीएम मोदी ने कहा, मैं शहीदों के परिवारों को विश्वास दिलाता हूं कि पूरा देश उन्घ्हें नमन करता है। पूरा देश उनके साथ है। लद्दाख में हमारे 20 जवान शहीद हुए हैं लेकिन जिन्होंने भारत माता की ओर आंख उठाकर देखा, उन्हें वे शहीद जवान सबक सिखाकर गए हैं। भारत अब भी बिना किसी दबाव के काम कर रहा है। इसका प्रमाण 60 मीटर का वह पुल है जो श्योक और गलवान नदियों के संगम से लगभग चार किलोमीटर पूर्व में अभी बनकर तैयार हुआ है और संकरे पहाड़ी क्षेत्र को श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क से जोड़ता है।

भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी विवाद और हिंसक झड़प में शहीद हुए भारत के 20 जवानों को लेकर देशभर में जमकर गुस्सा है। यह गुस्सा चीन पर उतरने भी लगा है। देश भर में चीनी राष्ट्रपति के पुतले जलाए जा रहे हैं। चीन में बने सामान की होली भी जलने लगी है। इस संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून को सर्वदलीय बैठक बुलायी। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के बाद अपनी बात शुरू की। सोनिया गांधी ने कहा, कई चीजें अभी अंधेरे में हैं। सोनिया ने केंद्र सरकार से पूछा, चीन की सेना ने किस तारीख को लद्दाख में अतिक्रमण किया? क्या यह 5 मई को हुआ था या पहले? उन्होंने कहा कि जब 5 मई को लद्दाख समेत कई जगह चीनी घुसपैठ की जानकारी सामने आई, तो उसके तुरंत बाद ही सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी। केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए सोनिया ने कहा, क्या सरकार को बॉर्डर की सैटेलाइट से तस्वीरें नहीं मिलती हैं? क्या खुफिया एजेंसियों ने बॉर्डर पर हो रही हलचल की जानकारी नहीं दी? क्या मिलिट्री इंटेलिजेंस ने सरकार को एलएसी के पास उनकी सीमा में या भारतीय सीमा की तरफ चीन द्वारा सेना को जुटाने की जानकारी नहीं दी थी? क्या यह खुफिया विभाग की असफलता नहीं है? कांग्रेस नेता श्रीमती सोनिया गांधी ने यह भी कहा, देश को आश्वासन की जरूरत है कि यथास्थिति बहाल हो। माउंटेन स्ट्राइक कोर की वर्तमान स्थिति क्या है? विपक्षी दलों को नियमित रूप से जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, राष्ट्र की अखंडता और रक्षा के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा है। साथ ही सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन करता है। सोनिया गांधी ने कहा, कांग्रेस पार्टी का यह मानना है कि 5 मई से लेकर 6 जून के बीच का कीमती समय हमने गंवा दिया, जब दोनों देशों के कोर कमांडरों की बैठक हुई। इसके बाद 6 जून की बैठक हुई। उसके बाद भी चीन के नेतृत्व से राजनीतिक और कूटनीतिक स्तरों पर सीधे बात क्यों नहीं की गई? इस प्रकार श्रीमती सोनिया गांधी ने तीखापन लिये हुए सवाल उठाए हैं, जिनका जवाब सरकार ने स्पष्ट रूप से नहीं दिया है।

इसी बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकार से कोई सवाल नहीं पूछा बल्कि चीन पर जमकर बरसीं। उन्होंने कहा, तृणमूल कांग्रेस संकट की इस घड़ी में देश के साथ खड़ी है। ममता बनर्जी ने कहा, चीन एक लोकतंत्रिक देश नहीं है बल्कि एक तानाशाह हैं। वो जो महसूस करते हैं वह कर सकते हैं। दूसरी ओर, हमें साथ काम करना होगा। भारत जीत जाएगा, चीन हार जाएगा। उन्होंने कहा, एकता के साथ बोलिए। एकता के साथ सोचें। एकता के साथ काम करें। हम ठोस रूप से सरकार के साथ हैं। सर्वदलीय बैठक में ममता ने कहा, चीन को दूरसंचार, रेलवे और विमानन क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करने देंगी। हम कुछ समस्याओं का सामना करेंगे लेकिन हमें चीन को प्रवेश करने की अनुमति नहीं देनी है। इससे पहले ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का स्वागत किया था। ममता बनर्जी ने कहा था कि उनकी पार्टी संकट की इस घड़ी में देश के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा था कि हम संकट की इस घड़ी में देश और हमारे सशस्त्र बलों के साथ खड़े हैं और सर्वदलीय बैठक बुलाने के फैसले का पूर्ण समर्थन करते हैं। तकनीकी रूप से, यह एक सही निर्णय है।

सभी दलों के नेताओं के विचार जानने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी लद्दाख में चीन से जारी तनाव के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारी सीमा में कोई भी नहीं घुसा है, न ही कोई घुसा हुआ है और न ही हमारी किसी पोस्ट पर किसी ने कब्जा किया है। पीएम मोदी ने कहा, मैं शहीदों के परिवारों को विश्वास दिलाता हूं कि पूरा देश उन्हें नमन करता है। पूरा देश उनके साथ है। लद्दाख में हमारे 20 जवान शहीद हुए हैं लेकिन जिन्होंने भारत माता की ओर आंख उठाकर देखा, उन्हें वे शहीद जवान सबक सिखाकर गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय हमारे पास ऐसी क्षमताएं हैं कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन के ऊपर भी बुरी नजर नहीं डाल सकता है। हम उसकी आंख निकालने की क्षमता रखते हैं। चीन के विरोध जताने के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुल का निर्माण गलवान नदी के ऊपर कर लिया है। भारत ने ऐसा चीन की ओर से इस पुल को लेकर बेहद आक्रामक विरोध के बावजूद किया है। इस पुल का निर्माण उन तमाम वजहों में से एक था, जिसके चलते चीन आक्रामकता दिखा रहा था। यह पुल भी एक वजह था, जिसके चलते चीनी सेना और भारतीय सेना के बीच पिछले छह हफ्तों से इस इलाके में तनातनी चल रही है।

60 मीटर का यह पुल श्योक और गलवान नदियों के संगम से लगभग चार किलोमीटर पूर्व में है और संकरे पहाड़ी क्षेत्र को श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क से जोड़ता है। यह पुल उस इलाके में भारतीय सैनिकों की तेज आवाजाही की सुविधा देगा, जो सोमवार 15 जून की शाम को गलवान में हुई हिंसक झड़प की जगह से बहुत दूर नहीं है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के अनुसार पुल निश्चित रूप से क्षेत्र में भारतीय सैनिकों की आवाजाही में सुधार करेगा। हमने सैन्य गतिरोध और चीनी सेना के कड़े विरोध के बावजूद पुल का निर्माण पूरा किया है।

~अशोक त्रिपाठी (हिफी)


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