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लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वोच्च है : उपराष्ट्रपति

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वोच्च है : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि अल्पकालिक अवधि की माफियों और मुफ्त उपहार देने की तुलना में गरीबी मिटाने के दीर्घकालिक नीति, समाधान ढूंढे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और नीति-निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाज के सबसे अधिक पात्र वर्ग को सभी कार्यक्रमों का लाभ मिले।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आए लोगों को गरीबी दूर करने तथा लोगों के बीच एकता लाने के प्रयास करने चाहिए।

उपराष्ट्रपति नई दिल्ली के उपराष्ट्रपति भवन में इंडियन सोशल रिसपोंबिलिटी नेटवर्क (आईएसआरएन) द्वारा संकलित पुस्तक 'द विज़न ऑफ अंत्योदय' पुस्तक का लोकार्पण कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस्तीफा दिए बिना दल-बदल करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों को ऐसा करने से रोकने के लिए दल-बदल विरोधी कानून की खामियों को दूर करना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपने सदस्यों को अनुशासित बनाने और ऐसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोगों को नीति मतभेद के कारण दल-बदलने का विकल्प है लेकिन व्यक्तिगत लाभों के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आए लोगों को हमेशा अपने कार्य को सेवा का मिशन समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वोच्च है और दुर्भाग्य की बात है कि कुछ लोगों ने जनादेश के प्रति असहिष्णु भाव विकसित कर लिए है। उन्होंने संसद तथा राज्य विधानपालिकाओं में कामकाज में अवरोध पैदा करने और प्रक्रियाओं के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी विकास समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन के अनुरूप समावेशी विकास पर फोकस किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी-ग्रामीण खाई को पाटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को सुधारने पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की विकास प्रक्रिया में लोगों को साझेदार बनाने के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा सभी स्तर पर सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की भावना को लागू करना चाहिए।

वेंकैया नायडू ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को दार्शनिक, संगठनकर्ता तथा वैसा नेता बताया, जिन्होंने व्यक्तिगत ईमानदारी के उच्च मानकों को बनाए रखा। उन्होंने कहा कि उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं देश के लिए मार्गदर्शक और नैतिक प्रेरणा हैं।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षण संस्थानों से भारत के मूल्यों और लोकाचारों के साथ-साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे नेताओं के जीवन और योगदान के बारे में शिक्षा देने का आग्रह किया।

समारोह में राज्यसभा सदस्य डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, आईएसआरएन के अध्यक्ष ओमप्रकाश, आईएसआरएन के सीईओ संतोष गुप्ता तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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