अमित शाह ने सम्भाला गृहमंत्री का कार्यभार

अमित शाह ने सम्भाला गृहमंत्री का कार्यभार

नई दिल्ली। आज अमित शाह ने गृहमंत्री का कार्यभार विधिवत रूप से सम्भाल लिया है। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब गुजरात में बतौर गृहमंत्री नम्बर दो की पोजिशन पर माने वाले अमित शाह ने हिन्दुस्तान की 17वीं लोकसभा में गृहमंत्री का दायित्व सम्भालने वाले अमित शाह ने देश में नम्बर दो की पोजिशन पर कब्जा करके गुजरात के इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर दोहरा दिया है। राजनीतिक जानकारों की मोने तो उन्हें ये पोजिशन यूं ही नहीं मिली है। इसके लिए उन्होंने अपने आपको कई मोर्चों पर साबित किया है। बात हालिया लोकसभा चुनाव की करें तो उन्होंने इसमें अपने राजनीतिक कौशल को पूरी तरह साबित करके भाजपा को 300 प्लस सीटे दिलाने का इतिहास रचा है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा नीत गठबन्धन के साथ अपने सम्बन्धों को मजबूत करके अपने सांगठनिक एवं कूटनीतिक कौशल को भी साबित कर दिया है। इससे पहले अमित शाह व नरेन्द्र मोदी की जोड़ी 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने कौशल को साबित कर चुके हैं।

अमित शाह के बारे में सबसे महत्वपूर्ण है कि वे अपनी हैसियत को लेकर किसी भी तरह से मुगालते को नहीं पालते हैं। उन्होंने शुरू से लेकर वर्तमान तक नरेन्द्र मोदी को हमेशा अपना नेता माना है और खुद को नरेन्द्र मोदी के सामने एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में देखा है। शायद यही एक बात है जो मोदी-शाह की जोडी को मजबूत करती है।

भारत के नये गृहमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को महाराष्ट्र के मुंबई में एक व्यापारी के घर हुआ था। वे गुजरात के एक रईस परिवार से ताल्लुक रखते है। उनका गाँव पाटण जिले के चँन्दूर में है। मेहसाणा में शुरुआती पढ़ाई के बाद बॉयोकेमिस्ट्री की पढ़ाई के लिए वे अहमदाबाद आए, जहां से उन्होने बॉयोकेमिस्ट्री में बीएससी की, उसके बाद अपने पिता का बिजनेस संभालने में जुट गए। राजनीति में आने से पहले वे मनसा में प्लास्टिक के पाइप का पारिवारिक बिजनेस संभालते थे। वे बहुत कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। 1982 में उनके अपने कॉलेज के दिनों में शाह की मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई। 1983 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और इस तरह उनका छात्र जीवन में राजनीतिक रुझान बना। अमित शाह के बारे में ये बेहद महत्वपूर्ण है कि उन्होंने अभी तक जो भी चुनाव लड़ा, उसमें उन्हें कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ा। वे हर चुनाव में विजयी रहे।

अमित शाह 1986 में भाजपा में शामिल हुए। 1987 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का सदस्य बनाया गया। अमित शाह को पहला बड़ा राजनीतिक मौका मिला 1991 में, जब आडवाणी के लिए गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में उन्होंने चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला। दूसरा मौका 1996 में मिला, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात से चुनाव लड़ना तय किया। इस चुनाव में भी उन्होंने चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला। पेशे से स्टॉक ब्रोकर अमित शाह ने 1997 में गुजरात की सरखेज विधानसभा सीट से उप चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 1999 में वे अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक (एडीसीबी) के प्रेसिडेंट चुने गए। 2009 में वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने। 2014 में नरेंद्र मोदी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। 2003 से 2010 तक उन्होने गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृहमंत्रालय का जिम्मा संभाला। 2012 में नारनुपरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से उनके विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने तीन बार सरखेज विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे गुजरात के सरखेज विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चार बार क्रमशः 1997 (उप चुनाव), 1998, 2002 और 2007 से विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीबी माने जाते हैं।

सोलहवीं लोकसभा चुनाव के लगभग 10 माह पूर्व अमित शाह दिनांक 12 जून 2013 को भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया, तब उत्तर प्रदेश में भाजपा की मात्र 10 लोक सभा सीटें ही थी। उनके संगठनात्मक कौशल और नेतृत्व क्षमता का अंदाजा तब लगा जब 16 मई 2014 को सोलहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आए। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 71 सीटें हासिल की। उत्तर प्रदेश में भाजपा की ये अब तक की सबसे बड़ी जीत घ्थी। इस करिश्माई जीत केघ् शिल्पकार रहे अमित शाह का कद पार्टी के भीतर इतना बढ़ा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का पद प्रदान किया गया।

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