दो गुजरातियों ने फिर रचा इतिहास, जम्मू-कश्मीर का भारत में कराया सही विलय

दो गुजरातियों ने फिर रचा इतिहास, जम्मू-कश्मीर का भारत में कराया सही विलय

नई दिल्ली। देश के आजाद होने के बाद जिस तरह तत्कालील उप प्रधानमंत्री व गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल व मैनन की जोडी ने देसी रियासतों को भारत के झंडे तले लाकर एक नया इतिहास रच दिया था, अब उसी तर्ज पर गुजरात के ही नरेन्द्र मोदी व अमितशाह की जोड़ी ने लगभग 72 साल बाद जम्मू-कश्मीर से धारा 307 व 35ए को प्रभावहीन करके नया इतिहास रच दिया है। एक तबका मानता है कि गुजरात के शेर वल्लभ भाई पटेल और तत्कालीन वरिष्ठ नौकरशाह वीके मेनन की जोड़ी ने अंग्रेजी शासन से सबक लेते हुए अलग नीति को अपनाया और अपने अनुभव और विवेक की बदौलत केवल 2 साल में 500 से ज्यादा रियासतों को भारत का हिस्सा बना दिया था।

15 अगस्त, 1947 तक हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ भारतीय रियासतें भारत में विलय के लिए किसी भी कीमत पर तैयार नहीं थी, लेकिन तब भी एक गुजराती ने अपने अदम्य साहस के बल पर उस जूनागढ़ को, जिसका नवाब विद्रोह करके पाकिस्तान भाग गया था और जूनागढ़ की जनता ने उसके खिलाफ विद्राह कर दिया था को भारत में विलय करके जो इतिहास रचा था, उसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी। उस समय सरदार पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया था। निःसंदेह सरदार पटेल द्वारा यह 562 रियासतों का एकीकरण विश्व इतिहास का एक आश्चर्य था। अब गुजरात के ही दो नेताओं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 व 35ए प्रभावहीन करके नया इतिहास रच दिया है। नरेन्द्र मोदी व अमितशाह की गुजराती जोडी के इस कारनामे को भी जानकार जम्मू-कश्मीर को भारत के सही मायनों में विलय के रूप में देख रहे हैं।

ज्ञात हो कि भारत की एकता के सूत्रधार कहे जाने वाले और भारत के लौह-पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कराकर उनके नक्शेकदम पर चलने का संदेश पहले ही दे दिया था, लेकिन वे इस तरह से उनके नक्शेकदम पर चलेंगे, शायद किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। बताते हैं कि पटेल नवीन भारत के निर्माता थे। देश की आजादी के संघर्ष में उन्होंने जितना योगदान दिया, उससे ज्यादा योगदान उन्होंने स्वतंत्र भारत को एक करने में दिया। वास्तव में वे आधुनिक भारत के शिल्पी थे। जिस अदम्य उत्साह असीम शक्ति से उन्होंने नवजात गणराज्य की प्रारंभिक कठिनाइयों का समाधान किया, उसके कारण विश्व के राजनीतिक मानचित्र में उन्होंने अमिट स्थान बना लिया था। भारत की स्वतंत्रता संग्राम में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। नीतिगत दृढ़ता के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उन्हें सरदार और लौह पुरुष की उपाधि दी थी। अब देखना होगा कि नरेन्द्र मोदी व अमितशाह की गुजराती जोडी को भारतीय जनता क्या उपाधि देती है।

जानकारों के अनुसार 1947 में आजादी के समय भारत के अन्तर्गत तीन तरह के क्षेत्र थे, जिनमें से ब्रिटिश भारत के क्षेत्र जो लंदन के इण्डिया आफिस तथा भारत के गवर्नर-जनरल के सीधे नियंत्रण में थे। देसी राज्य व फ्रांस और पुर्तगाल के औपनिवेशिक क्षेत्र चन्दननगर, पाण्डिचेरी, गोवा आदि को एक राजनैतिक इकाई के रूप में एकीकृत करना भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का घोषित लक्ष्य था। चीन सीमा पर स्थित सिक्किम को 1972 में भारत में विलय करके उसे 22वाँ भारतीय राज्य बनाया गया था। सबसे बाद में 1 जून 1949 को भोपाल रियासत, भारत का हिस्सा बनी थी और वहां से लगभग 225 साल पुराने (1724 से 1949) नवाबी शासन का प्रतीक रहा तिरंगा (काला, सफेद, हरा) लाल कोठी से उतारा जा रहा था और भारत संघ का तिरंगा (केसरिया, सफेद, हरा) चढ़ाया जा रहा था।

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