पुण्यतिथि पर विशेषः मेरी मृत्यु के दिन काम करना, छुट्टी नही - एपीजे अब्दुल कलाम

पुण्यतिथि पर विशेषः मेरी मृत्यु के दिन काम करना, छुट्टी नही - एपीजे अब्दुल कलाम

''सपने वो नही जो आप नींद में देखते है' सपने वो है जो आपको नींद ही नही आने दे


जनता के राष्ट्रपति के नाम से प्रख्यात्, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें राष्ट्रपति अबुल पाकिर जैनुलआबेदीन अब्दुल कलाम मसऊदी, जिन्हें मिसाइल मैन भी कहा जाता है। वे जानेमाने वैज्ञानिक और इंजीनियर थे। जीवनभर युवाओं के प्रेरणा स्रोत रहे अब्दुल कलाम के विचार आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। एपीजे अब्दुल कलाम व्यक्तिगत जिन्दगी में बेहद अनुशासनप्रिय और शाकाहारी थे। आज से चार वर्ष पहले आज ही के दिन जब एपीजे अब्दुल कलाम आजाद 27 जुलाई 2015 की शाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में रहने योग्य ग्रह पर एक व्याख्यान दे रहे थे, कि मैं यह बहुत गर्वोक्ति पूर्वक तो नहीं कह सकता कि मेरा जीवन किसी के लिये आदर्श बन सकता है, लेकिन जिस तरह मेरी नियति ने आकार ग्रहण किया, उससे किसी ऐसे गरीब बच्चे को सांत्वना अवश्य मिलेगी, जो किसी छोटी सी जगह पर सुविधाहीन सामजिक दशाओं में रह रहा हो। शायद यह ऐसे बच्चों को उनके पिछड़ेपन और निराशा की भावनाओं से विमुक्त होने में अवश्य सहायता करे........, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा और ये बेहोश हो कर गिर पड़े। उन्हें आनन-फानन में लगभग 6.30 बजे बेथानी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसी दिन दो घंटे के बाद इनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी गई। इस तरह आज से चार साल पूर्व 30 जुलाई 2015 को 87 वर्ष 9 माह और 12 दिन की आयु में वे दुनिया को अलविदा कह गये। पूर्व राष्ट्रपति को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में दफनाया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित देश के प्रमुख राजनेताओं सहित 3,50,000 से अधिक लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया था।


डा.एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि देने के लिये देश और विदेश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गए थे। भारत सरकार ने डा.एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर सात दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की थी। भूटान सरकार ने कलाम की मौत के शोक के लिए देश के झंडे को आधी ऊंचाई पर फहराने के लिए आदेश दिया, और श्रद्धांजलि में 1000 मक्खन के दीपक की भेंट किए। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने डा.एपीजे अब्दुल कलाम को एक महान राजनेता प्रशंसित वैज्ञानिक और दक्षिण एशिया के युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत के संयोग बताते हुए उनकी मृत्यु को भारत के लिए अपूरणीय क्षति से भी परे बताया था। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने डा.एपीजे अब्दुल कलाम को लाखों लोगों के लिए एक प्रेरणादायक शख्सियत बताया था। नेपाली प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने कहा था कि नेपाल ने एक अच्छा दोस्त खो दिया है और मैंने एक सम्मानित और आदर्श व्यक्तित्व को खो दिया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति , ममनून हुसैन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने डा.एपीजे अब्दुल के निधन पर उनके प्रति दुख, शोक व संवेदना व्यक्त की थी। श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा था कि डा.एपीजे अब्दुल कलाम आजाद दृढ़ विश्वास और अदम्य भावना के आदमी थे। मैंने उन्हें दुनिया के एक उत्कृष्ट राजनेता के रूप में देखा था। उनकी मौत भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति सुसीलो बम्बनग युधोयोनो, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सियन लूंग , संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नहयान सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय नेताओं और संयुक्त अरब अमीरात के प्रधानमंत्री और दुबई के शासक ने भी डा.एपीजे अब्दुल कलाम आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित की। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि अमेरिकी लोगों की ओर से, मैं पूर्व भारतीय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर भारत के लोगों के लिए अपनी गहरी संवेदना का विस्तार करना चाहता हूँ। एक वैज्ञानिक और राजनेता, कलाम ने अपनी विनम्रता से घर में और विदेशों में सम्मान कमाया और भारत के सबसे महान नेताओं में से एक बने।


तमिलनाडू के रामेश्वर स्थित धनुषकोडी गाँव में 15 अक्टूबर 1931 को एक मध्यमवर्गीय संयुक्त मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके पिता जैनुलाब्दीन भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए। आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 बजे उठते थे। घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं होने के कारण अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अखबार तक वितरित किये थे। एपीजे अब्दुल कलाम ने 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक करने के बाद हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया। 1962 में उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में ज्वाइन किया और 1982 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किये गये भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में परियोजना निदेशक के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसके बाद भारत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया था। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी एपीजे अब्दुल कलाम को ही जाता है। एपीजे अब्दुल कलाम ने ही स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियंत्रित प्रक्षेपास्त्र को डिजाइन किया था। इन्होंने ही अग्नि एवं पृथ्वी जैसे प्रक्षेपास्त्रों को स्वदेशी तकनीक से बनाया था। पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षण भी एपीजे अब्दुल कलाम के निर्देशन में परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर किया गया था।


एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आने के पीछे कलाम अपने पांचवी कक्षा के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर को वजह बताते थे। उनके अनुसार एक बार उन्होंने सवाल किया था कि चिड़िया कैसे उड़ती है? किसी भी छात्र ने इसका जवाब नहीं दिया। अगले दिन वो सभी बच्चों को समुद्र के किनारे ले गए। वहां कई पक्षी उड़ रहे थे। कुछ समुद्र के किनारे बैठे थे और कुछ किनारे पर उतर रहे थे। टीचर ने उस दिन पक्षी के उड़ने के पीछे के कारण को समझाया साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को भी विस्तार से बताया। उनके द्वारा बताई गई बाते कलाम के अंदर तक समा गई और उन्हें जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। बाद में उन्होंने तय किया कि वह उड़ान की दिशा में ही अपना करियर बनाएंगे। डा. एपीजे अब्दुल कलाम बनना तो पायलट चाहते थे, लेकिन किन्ही कारणों से पायलट नहीं बन पाए। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और वह कर दिखाया जिससे वे असाधारण बन गये।

यूं तो एपीजे अब्दुल कलाम राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं थे लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से सम्पन्न माना जा सकता है। एपीजे अब्दुल कलाम भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर राष्ट्र बनते देखना चाहते थे और इसके लिए इनके पास एक कार्य योजना भी थी, जो किसी राजनैतिक व्यक्ति की सोच को टक्कर देने के लिए काफी है। 18 जुलाई 2002 को कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा भारत का राष्ट्रपति चुना गया था और इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई थी।

भारत सरकार ने उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था। 1997 में कलाम साहब को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया था। एपीजे अब्दुल कलाम आजाद ने इण्डिया 2020 ए विजन फॉर द न्यू मिलेनियम, माई जर्नी तथा इग्नाटिड माइंड्स-अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया पुस्तकों अपने विचारों को विस्तार से लिखा था। वे भारत के एक ऐसे विशिष्ट वैज्ञानिक थे, जिन्हें 40 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी है। कलाम को विधार्थियों के प्रति विशेष प्रेम था, जिसकेे चलते संयुक्त राष्ट्र ने उनके जन्मदिन को विधार्थी दिवस के रुप में मनाने का निर्णय लिया था। वर्ष 2005 में स्विट्जरलैंड की सरकार ने डॉक्टर कलाम के स्विट्जरलैंड आगमन के उपलक्ष्य में 26 मई को विज्ञान दिवस घोषित किया था। नेशनल स्पेस सोसायटी ने वर्ष 2013 में उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान सम्बंधित परियोजनाओं के कुशल संचलन और प्रबंधन के लिये वॉन ब्राउन अवार्ड से पुरस्कृत किया था।

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