इतिहास के पन्नों से दारा शिकोह की हिंदुस्तानी संस्कृति एवं संस्कार से सराबोर सोंच और सन्देश को मिटाने का सोंचा-समझा पाप : नकवी

इतिहास के पन्नों से दारा शिकोह की हिंदुस्तानी संस्कृति एवं संस्कार से सराबोर सोंच और सन्देश को मिटाने का सोंचा-समझा पाप : नकवी

एक ओर औरंगजेब अपनी क्रूरता-जुल्म के चलते खलनायक बन गया वहीँ भारतीय संस्कारों से सराबोर दारा शिकोह भारतीय जनमानस के लिए नायक बन गए। दारा शिकोह भारत की संस्कृति-संस्कार में रचे-बसे एक ऐसे संदेशवाहक बनें जिन्होंने दुनिया को हिंदुस्तान को संस्कृति-संस्कार को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



नई दिल्ली। "एकेडेमिक्स फॉर नेशन" द्वारा दारा शिकोह पर परिसंवाद का आयोजन किया गया। आरएसएस के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल एवं बड़ी संख्या में जाने-माने शिक्षाविद, विचारक, प्रमुख बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी उपस्थित थे। दारा शिकोह अपने जीवनकाल में औरंगजेबी क्रूरता का शिकार और बाद में तथाकथित "सेक्युलर इतिहासकारों की असहिष्णुता" के निशाने पर रहे। कुछ लोगों द्वारा इतिहास के पन्नों से दारा शिकोह की हिंदुस्तानी संस्कृति-संस्कार से सराबोर सोंच और सन्देश को मिटाने का सोंचा-समझा पाप किया गया। कुछ "कट्टरपंथी, वामपंथी, तथाकथित सेक्युलर इतिहासकारों की जमात" द्वारा अराजक, हिंसक, जालिम औरंगजेब जैसे शासक को महिमामंडित करने का काम किया गया। औरंगजेब की सोंच इंसानी मूल्यों, हिंदुस्तान की सनातन एवं समावेशी संस्कृति को तबाह करने की साजिशों से भरी थी। औरंगजेब आतंकवाद का प्रतीक था जबकि दारा शिकोह राष्ट्रवाद की पहचान था। सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती की शिक्षा के प्रभाव एवं महर्षियों, सन्यासियों की संगत और संस्कार ने दारा शिकोह की संपूर्ण शख्सियत को जन्म दिया।






कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में "एकेडेमिक्स फॉर नेशन" द्वारा दारा शिकोह पर आयोजित परिसंवाद को सम्बोधित करते हुए नकवी ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा इतिहास के पन्नों से दारा शिकोह की हिंदुस्तानी संस्कृति एवं संस्कार से सराबोर सोंच और सन्देश को मिटाने का सोंचा-समझा पाप किया गया।

नकवी ने कहा कि कुछ "इस्लामी कट्टरपंथी, वामपंथी, सेक्युलर इतिहासकारों की जमात" द्वारा अराजक, हिंसक, जालिम औरंगजेब जैसे शासक को महिमामंडित करने का काम किया गया। औरंगजेब की सोंच इंसानी मूल्यों, हिंदुस्तान की सनातन संस्कृति को तबाह करने की साजिशों से भरी थी। ऐसी ही सोंच ने अलकायदा, आईएसईएस, जैश-ऐ-मुहम्मद, लश्करे तैय्यबा जैसे शैतानी संगठनों को जन्म दिया
नकवी ने कहा कि अगर हमने दारा शिकोह की संस्कृति-संस्कार और सन्देश को अपनी पीढ़ी की रगों में उतारा होता तो ऐसी शैतानी ताकतें जो पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं, वो ना पनप पाती।





नकवी ने कहा कि औरंगजेब आतंकवाद का प्रतीक था जबकि दारा शिकोह राष्ट्रवाद की पहचान था। सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती की शिक्षा के प्रभाव एवं महर्षियों, सन्यासियों की संगत और संस्कार ने दारा शिकोह की संपूर्ण शख्सियत को जन्म दिया जो, दारा शिकोह की किताब "मज़्म-उल-बहरीन" (समुद्रों का संगम), सूफी, वैदांतिक, इस्लाम, अध्यात्म, हिंदुत्व और अन्य धर्मों के एकेश्वरवाद, मानवतावाद, जियो और जीने दो, के समानता के सिद्धांतों का निचोड़ हैं।





नकवी ने कहा कि 52 उपनिषदों का संस्कृत से फ़ारसी में अनुवाद "सीर-ए-अकबर", दारा शिकोह के भारतीय सनातन संस्कृति-संस्कार के प्रति संकल्प को दिखाता था। इसी "अनेकता में एकता" के सन्देश के लिए दारा शिकोह को औरंगजेब ने काफिर घोषित किया, उनके हिंदुस्तानी संस्कृति-संस्कार के प्रति प्रेम को इस्लाम विरोधी बताया, पर दारा शिकोह इंसाफ-इंसानियत के लक्ष्य से नहीं डिगे। सिक्ख धर्म के सातवे गुरु, गुरु हर राय, हिन्दू धर्म के संतों, सन्यासियों की संगत, इस्लामी एवं सुफिज्म के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता दारा शिकोह के सर्वधर्म समभाव के चरित्र को निखारती रही; औरंगजेब की क्रूरता-कट्टरता भी दारा शिकोह के जुनून -जज़्बे को जख्मी नहीं कर सकी।


नकवी ने कहा कि जिस वक्त औरंगजेब ने दारा शिकोह के खिलाफ फ़तवा जारी कर उन्हें काफिर घोषित किया और उनका सिर कलम कर, जेल में बंद उनके पिता शाहजहां को दारा शिकोह का सिर भेजा, उस समय पूरे देश में औरंगजेब के जुल्म और शैतानी हरकतों के खिलाफ चिंगारी आग का रूप ले चुकी थी और यही औरंगजेब के पतन का कारण बना।


नकवी ने कहा कि जहा एक ओर औरंगजेब अपनी क्रूरता-कट्टरता-जुल्म के चलते खलनायक बन गया वहीँ भारतीय संस्कारों से सराबोर दारा शिकोह भारतीय जनमानस के लिए नायक बन गए। श्री नकवी ने कहा कि दारा शिकोह भारत की संस्कृति एवं संस्कार में रचे-बसे एक ऐसे संदेशवाहक बनें जिन्होंने दुनिया को हिंदुस्तान को संस्कृति-संस्कार को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


दारा शिकोह ने कहा था- "जब मैं सत्य को अपने सीने में महसूस करता हूँ तब समझ लेता हूँ कि हिन्दू और मुसलमान में कोई फर्क नहीं है।" "हिन्दू और मुसलमान दोनों के धर्म, अल्लाह के पास जाने का एक ही रास्ता बताते हैं। दोनों धर्म कहते हैं कि ईश्वर एक है। उससे बड़ा कोई नहीं।''


नकवी ने कहा कि दारा शिकोह के शांति का संदेश हिंदुत्व और इस्लाम के सह अस्तित्व पर आधारित था। नकवी ने दारा शिकोह पर इस परिसंवाद के आयोजन के लिए "एकेडमिक्स फॉर नेशन" को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों को दारा शिकोह के बारे में जागरूक करेंगे।

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