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महंगाई पर क्या बोले RBI गवर्नर शक्तिकांत दास

महंगाई पर क्या बोले RBI गवर्नर शक्तिकांत दास

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी मौद्रिक नीति पर इस महीने के पहले सप्ताह में हुई बैठक के ब्योरे से पता चलता है कि महंगाई नियंत्रण में है। साथ ही समिति का मानना है कि अर्थव्यवस्था में वृद्धि को समर्थन की जरूरत है, जो अभी निचले स्तर से उबर रही है, लेकिन यह शुरुआती अवस्था में है। एमपीसी सदस्यों का विचार है था कि जब तक वृद्धि सतत न हो जाए, नीतिगत नीतिगत समर्थन बनाए रखने की जरूरत है। साथ ही महंगाई बढने के जोखिम को लेकर भी समिति के सदस्यों ने चिंता जताई है।

समिति का कहना है कि खाद्य की कीमतें निचले स्तर पर हैं और वित्त वर्ष 22 की पहली तिमाही से इसमें तेजी शुरू हो सकती है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, हालांकि वृद्धि अभी असमान है, लेकिन रिकवरी हो रही है और इसे गति मिल रही है। साथ ही देश भर में टीकाकरण अभियान के साथ परिदृश्य में भी सुधार हो रहा है। बहरहाल वृद्धि की गति आगे और मजबूत बनाए रखने की जरूरत है, जिससे अर्थव्यवस्था में टिकाऊ रिकवरी हो सके और आउटपुट कोविड के पहले की स्थिति में पहुंच सके।

ध्यान रहे 3 से 5 फरवरी के बीच आयोजित मौद्रिक नीति की बैठक में रिजर्व बैंक ने मानक ब्याज दरें बगैर बदलाव के 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया था, लेकिन समावेशी स्थिति बनाए रखी। इससे पता चलता है कि अगर जरूरत पड़ती है तो कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को समर्थन करने के लिए भविष्य में दरों में कटौती हो सकती है। दास ने कहा, खाद्य महंगाई में तेज सुधार से कम अवधि की प्रमुख महंगाई दर परिदृश्य में सुधार आया है, हालांकि प्रमुख महंगाई का दबाव बरकरार है। एमपीसी के सदस्य माइकल पात्र ने कहा, महंगाई बढने का जोखिम बना हुआ है। पहला, प्रमुख महंगाई दर अडियल बनी हुई है और इस पर नजदीक से निगरानी रखे जाने की जरूरत है क्योंकि इससे हाल में हुए सुधार पर बुरा असर पड़ सकता है।

एमपीसी में बाहरी सदस्य आशिमा गोयल ने कहा, मौजूदा वृहद् आर्थिक स्थिति और इसके संभावित भविष्य से पता चलता है कि अभी एमपीसी के लिए संभावना है कि वह अर्थव्यवस्था में सुधार को समर्थन जारी रखे, क्योंकि महंगाई लक्ष्य की सीमा के अंतर्गत बनी हुई है। गवर्नर के मुताबिक आपूर्ति के मामले में अति सक्रिय कदम, खासकर केंद्र व राज्यों में तालमेल बिठाकर पेट्रोल व डीजल के उच्च अप्रत्यक्ष कर पर विचार अहम है, जिससे अर्थवव्यवस्था पर आगे दबाव न बने।

स्वास्थ्य जांच पर कर में छूट

आप किसी भी कंपनी में काम करते हों, साल के इस महीने में आमतौर पर सभी जगह लेखा विभाग आपसे आयकर बचाने के लिए किए गए निवेश आदि के सबूत मांगता है। यह जरूरी भी है क्योंकि आपके वेतन में से कर उसी हिसाब से कटता है। अगर आप सबूत के कागजात जमा नहीं करा पाते हैं तो मान लिया जाता है कि आपने निवेश नहीं किया है और फरवरी-मार्च में आपके वेतन का बड़ा हिस्सा बतौर कर कट जाता है। हो सकता है कि मार्च में आपका पूरा वेतन ही साफ हो जाए। इसलिए निवेश और आयकर छूट के दूसरे दस्तावेज तैयार रखें तथा समय से जमा भी कर दें। आम तौर पर करदाता मानते हैं कि निवेश पर ही आयकर छूट मिलती है। मगर कई तरह के खर्चों पर भी छूट पाने का प्रावधान है। टैक्समैन में उप महाप्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत बच्चों की स्कूल फीस और स्टांप शुल्क आदि पर भी छूट मिलती है। अगर आपने स्वास्थ्य जांच कराई है तो उसके बिल दिखाकर आप धारा 80डी के तहत छूट पा सकते हैं।

स्वास्थ्य जांच पर हुआ खर्च धारा 80डी की कटौती या छूट सीमा के भीतर आता है। आरएसएम इंडिया के संस्थापक सुरेश सुराणा बताते हैं, धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य जांच के लिए 5,000 रुपये तक की कर छूट सीमा तय की गई है। 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए यह सीमा 25,000 रुपये तक है। अगर करदाता की उम्र 35 साल है। वह 22,000 रुपये स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम चुकाने के बाद 5,000 रुपये स्वास्थ्य जांच पर भी खर्च करता है तो उसे कुल 25,000 रुपये तक ही कटौती का फायदा मिलेगा। 60 साल या अधिक उम्र के लोग कुल 50,000 रुपये तक फायदा उठा सकते हैं।

इन कटौती सीमा का लाभ करदाता, उसका जीवनसाथी, आश्रित बच्चे एवं माता-पिता उठा सकते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंसी कंपनी विकास मित्तल ऐंड एसोसिएट्स में पार्टनर विकास मित्तल का कहना है, आपके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है तो भी स्वास्थ्य जांच पर हुए खर्च के जरिये कर कटौती का फायदा उठा सकते हैं।

हिफी

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