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राज्य सूचना आयोग की कार्यवाही से हुआ, भूखण्ड आवंटित

राज्य सूचना आयोग की कार्यवाही से हुआ, भूखण्ड आवंटित

गाजियाबाद निवासी श्री सत्यवीर सिंह ने सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत जनसूचना अधिकारी एनआरआई विभाग, उ0प्र0 शासन, लखनऊ को आवेदन देकर जानकारी चाही थी कि प्रार्थी का भतीजा ( आनन्द कुमार) ने 30 सितम्बर, 2015 को एनआरआई विभाग को पत्र दिया था, जिसमें उन्होंने अवगत कराया था कि प्रार्थी आनन्द कुमार उत्तर प्रदेश का मूल निवासी है, पिछले कुछ समय से स्काॅटलैण्ड (विदेश) में कार्यरत है। 05 वर्ष पूर्व मेरे चाचा सत्यबीर ने अपनी फर्म बीएमआर एसोसिएट्स, गाजियाबाद को भूखण्ड सं0 वीएल-1 लोनी स्टेट आवंटित करने के लिए भूखण्ड को एकमुश्त पूरा भुगतान रू0 60,32,000 (रू0 साठ लाख, बत्तीस हजार) यूपीएसआईडीसी, कानपुर में जमा किया था, जो आज भी यूपीएसआईडीसी के पास है, परन्तु कुछ अधिकारियों के षडयंत्र के चलते भूखण्ड बीएमआर एसोसिएट्स को उद्योग लगाने के लिए नहीं मिला है, जबकि कोई विधिक अडचन नहीं है, जिसका परीक्षण उच्च अधिकारियों के निर्देश पर किया जा चुका है। इस सम्बन्ध में वादी ने कर्ज पर पैसा लेकर भूखण्ड हेतु विभाग को दिया, जिसका ब्याज आज भी चुकाया जा रहा है, उसकी वहज से वादी की आर्थिक स्थिति बेहद जर्जर व मानसिक उत्पीड़न से गुजरना पड़ रहा है, परन्तु विभाग द्वारा इस सम्बन्ध में कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, आदि से सम्बन्धित बिन्दुओं की जानकारी चाही थी, परन्तु विभाग द्वारा वादी को कोई जानकारी नहीं दी गयी, अधिनियम के तहत सूचनाएं प्राप्त न होने पर वादी ने राज्य सूचना आयोग में अपील दाखिल कर अपने प्रार्थना-पत्र पर हुई कार्यवाही के विषय में जानकारी चाही है।
राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने जनसूचना अधिकारी एनआरआई विभाग, उ0प्र0 शासन, लखनऊ को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 20 (1) के तहत नोटिस जारी कर आदेशित किया कि वादी द्वारा उठाये गये, बिन्दुओं की बिन्दुवार सभी सूचनाएं अगले 30 दिन के अन्दर अनिवार्य रूप से वादी को उपलब्ध कराते हुए, मा0 आयोग को अवगत कराये, अन्यथा जनसूचना अधिकारी स्पष्टीकरण देंगे कि वादी को सूचना क्यों नहीं दी गयी है, क्यों न उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाये।
सुनवाई के दौरान वादी/प्रतिवादी दोनों उपस्थित हुए। प्रतिवादी द्वारा बताया गया है कि वादी जिस प्रार्थना-पत्र की सूचना चाह रहे है, उसका सम्बन्ध प्रबन्ध निदेशक, उ0प्र0 राज्य औद्योगिक विकास निगम, यूपीएसआईडीसी काम्पलेक्स लखनपुर, कानपुर से सम्बन्धित है। इसलिए हमने वादी के प्रार्थना-पत्र को अधिनियम की धारा 6(3) के तहत अन्तरित कर दिया है, इस आशय की जानकारी प्रतिवादी ने मा0 आयोग को दी है। इस सम्बन्ध में आयोग ने प्रतिवादी प्रबन्ध निदेशक, उ0प्र0 राज्य औद्योगिक विकास निगम, यूपीएसआईडीसी कानपुर को निदेर्शित किया जाता है कि वादी को सभी सूचनाएं उपलब्ध कराते हुए, आयोग को अवगत कराये, अन्यथा अधिनियम के तहत कार्यवाही की जायेगी।
आयोग की कार्यवाही के बाद दोनों पक्ष उपस्थित हुए। प्रतिवादी द्वारा बताया है कि भूखण्ड के आवंटन हेतु विज्ञापन निकाला गया था, जिसके सम्बन्ध में विभाग को एकमुश्त पूरा भुगतान रू0 60,32,000 (रू0 साठ लाख, बत्तीस हजार) प्राप्त हुआ था। विज्ञापन के उपरान्त औद्योगिक क्षेत्र लोनी ईस्टेट, गाजियाबाद में निगम की खाली जगह पर कुछ व्यक्तियों द्वारा अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया गया, जिसे हटाने का निरन्तर प्रयास किया गया। उक्त भूमि के बीच से गांव वाले आने-जाने हेतु रास्ते के रूप में उपयोग करने लगे, भूमि पर कब्जा निगम द्वारा लिये जाने का प्रयास किया जा रहा था, तभी गांव वालों ने रास्ता बन्द करने का विरोध करना शुरू कर दिया। इस बीच अधिशासी अभियन्ता, निर्माण खण्ड प्रथम द्वारा उक्त भूमि के बीच में रास्ते को छोड़ते हुए, दोनों तरफ बची हुई, भूमि की बाउण्ड्री वाल बनवाकर शेष भूमि को कब्जे में ले लिया गया। वादी को भूमि का कब्जा न दिये जाने पर उनके द्वारा जमा की गयी धनराशि रू0 60,32,000 (रू0 साठ लाख, बत्तीस हजार) को चेक के माध्यम से वापस किया गया, परन्तु उनके द्वारा उसका भुगतान (चेक लेने से इंकार) कर दिया गया। प्रकरण अत्यन्त गंभीर होने के कारण मुख्यालय से संयुक्त रूप से जांच की गयी। भौतिक निरीक्षण के उपरान्त भूखण्ड के मध्य में 9.60 मीटर चैड़ी सड़क विद्यमान है, व सड़क के दोनों ओर दो भू-भाग चाहरदीवारी (बाउण्ड्री) से घिरे हैं, जिनके सम्बन्ध में भूखण्ड संख्या-वीएल-1, दो खण्डों में विभक्त (विभाजित) हो गया है, ऐसी स्थिति में दोेनों को सम्मिलित रूप में किया जाना प्रायोगिक न होगा।
इस सम्बन्ध में वादी का कथन यह है कि जमा की गयी धनराशि विभाग द्वारा चेक के माध्यम से वापस की गयी, मगर उसका भुगतान हमने इसलिए नहीं करवाया, क्योंकि भूखण्ड हेतु रूपये दिये गये थे, इसलिए भूखण्ड की ही आवश्यकता है। प्रतिवादी द्वारा बताया गया कि भूखण्ड की बाउण्ड्री वाल विभाग द्वारा बनाई गयी है, जिसके एवज में रू0 14,24,305 (रूपया चैदह लाख, चैबीस हजार, तीन सौ पाॅच) देने होंगे। वादी ने मौके पर जाकर बाउण्ड्री वाल की हालत देखी गयी तो वह अत्यन्त जर्जर हाल में मिली, जिसमें पीला-टेढ़ा ईंट का काफी इस्तेमाल हुआ है, क्वालिटी इतनी खराब है कि इसी बाउण्ड्री वाल पर फैक्ट्री का काम शुरू किया जाता है, तो अवश्य ही जन-हानि होने एवं बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी रहेगी, इसके बावजूद भी विभाग द्वारा रूपये देने का दबाव बना रहा है, जबकि विभाग द्वारा एकमुश्त धनराशि ली गयी थी, उस समय बाउण्ड्री वाल बनाने की कोई शर्त नहीं थी।
एनआरआई विभाग, लखनऊ एवं यूपीएसआईडीसी कानपुर की ओर से आर0के0 चतुर्वेदी उपस्थित हुए। प्रतिवादी द्वारा बताया गया है कि वादी के प्रार्थना-पत्र के सम्बन्ध में वादी को सभी जानकारी उपलब्ध करा दी गयी है, एवं भूखण्ड सं0-वीएल-1/1 एवं सं0-वीएल-1/2 औद्योगिक क्षेत्र लोनी आवंटित किया जा चुका है, जिस पर वादी पूर्णरूप से सहमत भी है, इस आशय की जानकारी प्रतिवादी ने मा0 आयोग को दी है। इस सम्बन्ध में वादी ने भी लिखित रूप से बताया कि प्रतिवादी द्वारा भूखण्ड मुझे उपलब्ध कराया जा चुका है।

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