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अली ने कहा मेरी पत्नी, नाजमा ने बताया अभी कुंवारी है मेरी बेटी हाफिज उस्मान की कोर्ट में आया युनानी मैडिकल काॅलेज, देवबन्द का मामला

अली ने कहा मेरी पत्नी, नाजमा ने बताया अभी कुंवारी है मेरी बेटी   हाफिज उस्मान की कोर्ट में आया युनानी मैडिकल काॅलेज, देवबन्द का मामला

उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त हाफिज़ उस्मान की अदालत में अजीबो गरीब केस आया है किस्सा कुछ यूँ है अली पुत्र नूर हसन निवासी नया बांस चैक, सहारनपुर ने दिनांक 18.10.2016 को सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत युनानी मेडिकल काॅलेज, हाॅस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर देवबन्द, सहारनपुर को आवेदन देकर दिनांक 26.09.2016 के प्रार्थना-पत्र पर कार्यवाही के सम्बन्ध में पूछा था, जिसमें अली पुत्र नूर हसन ने जानकारी चाही थी कि श्रीमती जोया जो काॅलेज में बी0एस0सी0 जी0एन0एम0 की छात्रा है ने कालेज में एडमिशन के समय खुद को विवाहिता बताया है, या अविवाहित। उक्त छात्रा ने अली पुत्र नूर हसन को नाजायज हानि पहुँचाने की गरज से अपने आपको कुुंवारी दर्शाया है, जिसका औचित्य किसी प्रकार से नहीं था। अली पुत्र नूर हसन की कानूनी व विधिक पत्नी है, जो एडमिशन के दौरान भी पत्नी थी, और अब वर्तमान में भी पत्नी है, इन्होंने खुद को कुंवारी दिखाकर कालेज के नियम के विरूद्ध व प्रधानाचार्य व प्रबन्ध समिति के साथ धोखेबाजी की है, के विरूद्ध क्या कानूनी कार्यवाही की गयी है, एवं कालेज में श्रीमती जोया से सम्बन्धित समस्त प्रमाण-पत्रों की प्रमाणित छायाप्रति उपलब्ध करायी जाये, परन्तु युनानी मेडिकल काॅलेज, हाॅस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर देवबन्द, सहारनपुर द्वारा अली पुत्र नूर हसन को कोई जानकारी नहीं दी गयी, अधिनियम के तहत सूचनाएं प्राप्त न होने पर अली पुत्र नूर हसन ने राज्य सूचना आयोग में अपील दाखिल कर प्रकरण की जानकारी चाही है।
राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने युनानी मेडिकल काॅलेज, हाॅस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर देवबन्द, सहारनपुर को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 20 (1) के तहत नोटिस जारी कर आदेशित किया कि अली पुत्र नूर हसन के प्रार्थना-पत्र में उठाये गये समस्त बिन्दुओं की सभी सूचनाएं अगले 30 दिन के अन्दर अनिवार्य रूप से वादी को उपलब्ध कराते हुए, आयोग को अवगत कराये, अन्यथा जनसूचना अधिकारी स्पष्टीकरण देंगे कि अली पुत्र नूर हसन को सूचना क्यों नहीं दी गयी है, क्यों न उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाये।
सुनवाई के दौरान अली पुत्र नूर हसन और युनानी मेडिकल काॅलेज, हाॅस्पिटल एण्ड रिसर्च सेन्टर देवबन्द, सहारनपुर दोनों उपस्थित हुए,अली पुत्र नूर हसन द्वारा लिखित तौर पर आयोग को बताया है कि अली पुत्र (नूर हसन नया बांस चैक सहारनपुर) ने जोया पुत्री (हाजी नौशाद अहम मौहल्ला नया बांस झाटेवाला, सहारनपुर) से दिनांक 14.11.2013 में निकाह किया था, दो गवाहों के बीच निकाह के बाद लगभग एक साल मैं और मेरी पत्नी साथ रहे है, क्योंकि मैंने और मेरी पत्नी ने घर वालों की मर्जी के खिलाफ निकाह किया था जिस वहज से इन्होंने मेरे ऊपर बलात्कार का केस (मुकदमा) किया था, जिसमें मुझे बाईज्जत बरी कर दिया गया था। इस बीच इन्होंने मुझे जेल भेज कर मेरे पिता को ब्लैकमेल कर मेरा पुस्तैनी मकान व रू0 19,00,000 (रू0 उन्नीस लाख) का मेरा माल गोदाम से हाजी नौशाद अहम (सुसर) ने जप्त कर लिया था, क्योंकि ससुर मेरे व्यवसाय में हिस्सेदार थे, जबकि उनका आधा हिस्सा था, उन्होंने मेरा आधा हिस्सा भी जप्त कर लिया, मुझे वापिस नहीं किया।
जोया की माता जी (नाजमा मेरी सास) ने मुझसे कहा कि मैं अपनी बेटी को डाॅक्टर बनाना चाहती हॅू, इसका दाखिला देवबन्द मेडिकल कालेज में कराना चाहती हॅू, उसके लिए मुझे रू0 2,00,000 (रू0 दो लाख) का खर्चा बताकर मुझसे शुरू में रू0 1,15,000 (रू0 एक लाख, पन्द्रह हजार) ले लिये। जब मैं देवबन्द मेडिकल कालेज में दाखिलें के लिए साथ में जाना चाहा तो मुझे मेरी सास ने ये कहकर मना कर दिया कि तुम अनपढ़ हो, वहाॅ जाओंगे तो हमें शर्मिन्दिगी का सामना करना पड़ेगा, तुम एडमिशन फार्म पर साईन नहीं कर पाओगे, और मैं नहीं गया, जिस कारण कालेज के एडमिशन फार्म में श्रीमती जोया को कु0 जोया दर्शाया दिखाया गया, इससे मेरे साथ-साथ कालेज वालों को भी धोखा दिया गया।
अली पुत्र नूर हसन ने मसरूर अहमद, नौशाद अहमद, इकबाल अहमद, नदीम, अतीकुर्रहमान, अब्दुल खालिक, मौ0 नासिर, अब्दुल क्ययूम, व मरगूब आदि के शपथ-पत्र पेश किये है, जिसमें सभी का कहना है कि दोनों ने सहमति से निकाह किया था, और ये पति-पत्नी के रूप में मौहल्ला नयां बांस में रहे, इस निकाह को दोनों के घरवालों व पंचायत ने स्वीकार कर लिया था तथा अली ने अपने और अपनी पत्नी के साथ रहने के छायाप्रति भी पेश किये हैं।
प्रतिवादी डाॅ0 काशिफ नाज़, युनानी मेडिकल काॅलेज, देवबन्द, सहारनपुर आयोग में उपस्थित हुए, उनके द्वारा प्रकरण के सम्बन्ध में लिखित तौर पर अवगत कराया गया कि कालेज के प्रमाण-पत्र के अनुसार कु0 जोया पुत्री हाजी नौशाद अहमद निवासी (महाविद्यालय के रिकार्ड के अनुसार) मौहल्ला नया बांस, चिलकाना रोड़, सहारनपुर जी0एन0एम0 पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष की छात्रा है, उक्त छात्रा ने इस पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में अगस्त, 2015 में अपनी माता जी के साथ आकर प्रवेश लिया था। प्रवेश के समय आवेदन-पत्र में उसने स्वयं को अविवाहित दर्शाया था। तब से अब तक जोया की माता ही उसकी शिक्षा के बारे में मालूम करती है, और शिक्षण शुल्क जमा करके महाविद्यालय के कार्यालय से रसीद प्राप्त करती है। अली पुत्र नूर हसन द्वारा महाविद्यालय को कु0 जोया के सम्बन्ध में अपना पति-पत्नी का रिश्ता होना बताया गया है वह कभी महाविद्यालय में नही आया है, एवं यह भी स्पष्ट करना है कि किसी भी छात्र/छात्रा का प्रवेश उसका कोई भी अभिभावक करा सकता है, चाहे वह छात्र/छात्रा विवाहित अथवा अविवाहित हो। महाविद्यालय द्वारा छात्रा की माता से स्पष्टीकरण मांगा गया तो उसने छात्रा को अविवाहता बताया है। साथ ही प्रतिवादी ने यह भी बताया कि जोया की माता नाजमा ने कालेज को एक प्रार्थना पत्र देकर अनुरोध किया है कि मेरी पुत्री कु0 जोया आपके विद्यालय में जी0एन0एम0 द्वितीय वर्ष की छात्रा है। मेरी बेटी का काॅलेज में अध्ययन हेतु आना-जाना होता है। मेरी पुत्री को अकेले आते-जाते देखकर कोई अली नाम का एक लड़का जो सुनने में आया है कि बहुत ही आवारा है, वह मेरी पुत्री कु0 जोया के साथ छेड-छाड करता है, तरह-तरह से परेशान करता है, मेरी बेटी के पिता जी घर से बाहर रहते हैं, इसलिए यह मेरी बेटी जोया को परेशान करता है।
दोनों की बहस सुनी गयी, आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए, वादी/प्रतिवादी दोनों को निदेर्शित किया कि अपने-अपने कथन के सम्बन्ध में सभी अभिलेख एवं तृतीय पक्ष से सम्बन्धित सभी दस्तावेज अगली तिथि पर आयोग के समक्ष पेश करें, जिससे प्रकरण में अन्तिम निर्णय लिया जा सकें और अली पुत्र नूर हसन को सूचना उपलब्ध करवायी जा सकें।

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